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देश में हृदय, गुर्दे, लीवर की बीमारियों पर और अधिक शोध की जरूरत
Allahabad
Updated Mon, 16 Dec 2013 05:41 AM IST
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इलाहाबाद। राजकीय लाल बहादुर शास्त्री होम्योपैथिक मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में एक दिवसीय वैज्ञानिक सेमिनार एवं वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। डॉ. डीपी मेमोरियल साइंटिफिक सेमिनार के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति धरनीधर झा ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश जहां बहुत बड़ी आबादी गरीबों की है, वह महंगेे उपचार का खर्च नहीं वहन कर सकती है। ऐसे में लोगों को होम्योपैथिक जैसी चिकित्सकीय सुविधाएं मुहैया कराए जाने की जरूरत है। न्यायमूर्ति झा ने कहा कि चिकित्सकों को चाहिए कि वे कैंसर, एचआईवी, एड्स जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को सस्ता इलाज उपलब्ध कराएं। उन्होंने होम्योपैथिक औषधियों की और अधिक उपलब्धता पर जोर दिया, ताकि इस चिकित्सा पद्घति की ओर से मरीजों का रुझान और अधिक बढ़े।
न्यायमूर्ति झा ने इस बात पर भी जोर दिया कि हृदय, लीवर और किडनी के रोगों पर और अधिक शोध किए जाने की जरूरत है। सेमिनार में उपस्थित पूर्व केंद्रीय मंत्री सुनील शास्त्री ने कहा कि होम्योपैथी रोगों को जड़ से ठीक करने वाली एकमात्र पद्घति है। रिसर्च सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सीपी सिंह ने होम्योपैथिक औषधियों के मूल नियंत्रण की बात कही। केंद्रीय होम्योपैथिक परिषद के सदस्य डॉ. अनिरूद्घ वर्मा ने होम्योपैथिक कालेजों मेें शिक्षकों की कमी पर चिंता जतायी। पूर्व निदेशक डॉ. बीएन सिंह ने कहा कि होम्योपैथी जन आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कालेज केसंस्थापक डॉ. आरके कपूर ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कई संस्मरण भी सुनाए। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी ने पिछले दो सौ सालों में पूरी दुनिया में स्थान बना लिया है।
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सेमिनार को संबोधित करते हुए नागपुर के होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. कासिम चिम्थानवाला ने अपना शोध पत्र पढ़ते हुए कहा कि हार्ट अटैक, एन्जाइनोपेक्टारिस, हृदय वाल्व में खराबी जैसी बीमारियों का होम्योपैथी चिकित्सा पद्घति में कारगर इलाज है। इस मौके पर पुरातन छात्रों का सम्मेलन भी आयोजित किया। जिसमें कालेज की गरिमा को बरकरार रखने का संकल्प लिया गया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति धरनीधर झा और विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. टीएन सिंह और आभार कालेज प्राचार्य डॉ. आनंद कुमार चतुर्वेदी ने व्यक्त किया।
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न्यायमूर्ति झा ने इस बात पर भी जोर दिया कि हृदय, लीवर और किडनी के रोगों पर और अधिक शोध किए जाने की जरूरत है। सेमिनार में उपस्थित पूर्व केंद्रीय मंत्री सुनील शास्त्री ने कहा कि होम्योपैथी रोगों को जड़ से ठीक करने वाली एकमात्र पद्घति है। रिसर्च सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सीपी सिंह ने होम्योपैथिक औषधियों के मूल नियंत्रण की बात कही। केंद्रीय होम्योपैथिक परिषद के सदस्य डॉ. अनिरूद्घ वर्मा ने होम्योपैथिक कालेजों मेें शिक्षकों की कमी पर चिंता जतायी। पूर्व निदेशक डॉ. बीएन सिंह ने कहा कि होम्योपैथी जन आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम है।
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समारोह की अध्यक्षता करते हुए कालेज केसंस्थापक डॉ. आरके कपूर ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कई संस्मरण भी सुनाए। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी ने पिछले दो सौ सालों में पूरी दुनिया में स्थान बना लिया है।
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सेमिनार को संबोधित करते हुए नागपुर के होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. कासिम चिम्थानवाला ने अपना शोध पत्र पढ़ते हुए कहा कि हार्ट अटैक, एन्जाइनोपेक्टारिस, हृदय वाल्व में खराबी जैसी बीमारियों का होम्योपैथी चिकित्सा पद्घति में कारगर इलाज है। इस मौके पर पुरातन छात्रों का सम्मेलन भी आयोजित किया। जिसमें कालेज की गरिमा को बरकरार रखने का संकल्प लिया गया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति धरनीधर झा और विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. टीएन सिंह और आभार कालेज प्राचार्य डॉ. आनंद कुमार चतुर्वेदी ने व्यक्त किया।