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विवि शिक्षक दो फाड़!
Allahabad
Updated Wed, 11 Dec 2013 05:41 AM IST
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इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कार्य बहिष्कार को लेकर शिक्षक दो फाड़ हो गए हैं। अध्यापक संघ (आटा) की सभा में हुए फैसलों के विपरीत कई शिक्षकों ने बुधवार से कक्षाएं लेने की घोषणा की है। उनका कहना है कि जब हर काम हो रहा है तो फिर पढ़ाई ही क्यों बाधित हो।
जेके इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर आरआर तिवारी, प्रोफेसर सीके द्विवेदी समेत कई शिक्षकों तथा कर्मचारियों पर हमले के बाद से शिक्षक आंदोलनरत हैं। आटा की मंगलवार को हुई सभा में भी कार्य बहिष्कार जारी रखने की घोषणा की गई। इसके विपरीत पूर्व आटा अध्यक्ष मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी, रसायन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर जगदम्बा सिंह, हिन्दी के डॉ.सूर्य नारायण सिंह ने शिक्षण कार्य शुरू करने की घोषणा की है। प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी ने शिक्षकों पर हमले की कठोर शब्दों में निंदा करने के साथ यह भी कहा कि आरोपी छात्रों का निलंबन किया जा चुका है। हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप किया है। इसके बाद पठन-पाठन शुरू होना चाहिए। इसलिए यह निर्णय लिया गया है। डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर जगदम्बा सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय में सभी काम हो रहे हैं। कई विभागों में परीक्षाएं भी हुईं। इसके अलावा हाईकोर्ट ने भी पूरे मामले को संज्ञान में लिया है। ऐसे में सिर्फ पढ़ाई बाधित कर छात्र-छात्राओं का नुकसान क्यों। उनका कहना है कि ऐसे में इस आंदोलन का क्या अर्थ है। डॉ.सूर्य नारायण सिंह ने तो यहां तक कहा कि पढ़ाई से विरत रहना है तो फिर वेतन भी कटवाया जाए। उन्होंने कहा कि वह बुधवार से कक्षाएं लेंगे। शिक्षकों का यह भी कहना है कि आखिर कब तक पढ़ाई बाधित की जा सकती है।
इससे अलग आटा और कुलपति के बीच गतिरोध और बढ़ गया है। मंगलवार को हुई आम सभा में कार्य बहिष्कार बृहस्पतिवार तक जारी रखने की घोषणा की गई। अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने प्रेसवार्ता में बताया कि बार-बार अनुरोध के बाद भी कुलपति की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। इससे शिक्षकों में काफी नाराजगी है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर 12 दिसंबर को सुरक्षा संबंधी प्रस्ताव तैयार किया जाएगा तथा जिला और पुलिस प्रशासन से बात की जाएगी। इसमें शामिल प्रस्तावों से शिक्षक संतुष्ट हुए तो कार्य बहिष्कार समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है। अन्यथा, आंदोलन और तेज होगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि शिक्षक सामूहिक इस्तीफा देने का भी निर्णय ले सकते हैं।
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कार्य बहिष्कार समाप्त कर कक्षाएं शुरू करने की मांग को लेकर छात्रों ने शिक्षकों की आम सभा के दौरान मंगलवार को बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि कक्षाएं नहीं चलने से उनका कोर्स पहले से ही काफी पिछड़ गया है। ऐसे में कार्य बहिष्कार से परेशानी और बढ़ गई तथा छात्र-छात्राओं का भविष्य भी दांव पर लग गया है। उन्होंने जल्द से जल्द कक्षाएं शुरू करने की मांग की।
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जेके इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर आरआर तिवारी, प्रोफेसर सीके द्विवेदी समेत कई शिक्षकों तथा कर्मचारियों पर हमले के बाद से शिक्षक आंदोलनरत हैं। आटा की मंगलवार को हुई सभा में भी कार्य बहिष्कार जारी रखने की घोषणा की गई। इसके विपरीत पूर्व आटा अध्यक्ष मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी, रसायन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर जगदम्बा सिंह, हिन्दी के डॉ.सूर्य नारायण सिंह ने शिक्षण कार्य शुरू करने की घोषणा की है। प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी ने शिक्षकों पर हमले की कठोर शब्दों में निंदा करने के साथ यह भी कहा कि आरोपी छात्रों का निलंबन किया जा चुका है। हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप किया है। इसके बाद पठन-पाठन शुरू होना चाहिए। इसलिए यह निर्णय लिया गया है। डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर जगदम्बा सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय में सभी काम हो रहे हैं। कई विभागों में परीक्षाएं भी हुईं। इसके अलावा हाईकोर्ट ने भी पूरे मामले को संज्ञान में लिया है। ऐसे में सिर्फ पढ़ाई बाधित कर छात्र-छात्राओं का नुकसान क्यों। उनका कहना है कि ऐसे में इस आंदोलन का क्या अर्थ है। डॉ.सूर्य नारायण सिंह ने तो यहां तक कहा कि पढ़ाई से विरत रहना है तो फिर वेतन भी कटवाया जाए। उन्होंने कहा कि वह बुधवार से कक्षाएं लेंगे। शिक्षकों का यह भी कहना है कि आखिर कब तक पढ़ाई बाधित की जा सकती है।
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इससे अलग आटा और कुलपति के बीच गतिरोध और बढ़ गया है। मंगलवार को हुई आम सभा में कार्य बहिष्कार बृहस्पतिवार तक जारी रखने की घोषणा की गई। अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने प्रेसवार्ता में बताया कि बार-बार अनुरोध के बाद भी कुलपति की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। इससे शिक्षकों में काफी नाराजगी है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर 12 दिसंबर को सुरक्षा संबंधी प्रस्ताव तैयार किया जाएगा तथा जिला और पुलिस प्रशासन से बात की जाएगी। इसमें शामिल प्रस्तावों से शिक्षक संतुष्ट हुए तो कार्य बहिष्कार समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है। अन्यथा, आंदोलन और तेज होगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि शिक्षक सामूहिक इस्तीफा देने का भी निर्णय ले सकते हैं।
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कार्य बहिष्कार समाप्त कर कक्षाएं शुरू करने की मांग को लेकर छात्रों ने शिक्षकों की आम सभा के दौरान मंगलवार को बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि कक्षाएं नहीं चलने से उनका कोर्स पहले से ही काफी पिछड़ गया है। ऐसे में कार्य बहिष्कार से परेशानी और बढ़ गई तथा छात्र-छात्राओं का भविष्य भी दांव पर लग गया है। उन्होंने जल्द से जल्द कक्षाएं शुरू करने की मांग की।