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यहां ‘दामिनी’ के परिजनों को है न्याय का इंतजार
Allahabad
Updated Wed, 11 Sep 2013 05:35 AM IST
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यहां ‘दामिनी’ के परिजनों को है न्याय का इंतजार
0 बलात्कार के बाद कत्ल के कई मामलों में अब तक नहीं हुई सजा
0 जिले में लंबित हैं 750 मामले, कई में सुनवाई तक नहीं हुई शुरू
आशुतोष
इलाहाबाद। केस एक- जनवरी 2011, जार्जटाउन क्षेत्र में घर के नौकर ने 70 साल की रिटायर्ड प्रिंसिपल से दुराचार करने के बाद हत्या कर दी। नौकर जेल भेजा गया, मुकदमा चल रहा, ढाई साल बाद भी मामला लंबित।
केस दो- दो मार्च 2011, करेली में सात साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या। मामला उछला तो पुलिस ने एक रिश्तेदार को पकड़ा। साथ देने के आरोप में तीन और धरे गए। मामला विचाराधीन।
केस तीन- 21 अप्रैल 2011, को नवाबगंज में छह साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। आरोप फूफा पर लगा। गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
केस चार- आठ जनवरी 2012, शंकरगढ़ में छह साल की मासूम बच्ची को पड़ोस के ही एक युवक ने हवस का शिकार बनाने के बाद गला घोंटकर मार डाला। आरोपी को जेल भेजा गया। मामला विचाराधीन।
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केस पांच- 28 अक्तूबर 2012, को नवाबगंज में 12 साल की बच्ची की पड़ोस के दुकानदार ने दुराचार के बाद हत्या कर दी। शव को घर में ही गाड़ दिया गया। मामले की सुनवाई चल रही है।
केस छह-एक मई 2013, सोरांव की रहने वाली बीएससी की छात्रा के साथ चलती कार में गैंगरेप, एक गिरफ्तार लेकिन किसी को सजा नहीं।
केस सात-एक मई 2013, झूंसी में 10 साल की लड़की के साथ रेप, चाचा पर आरोप, मां-बाप कार्रवाई के लिए लगा रहे दौड़।
दिल्ली में ‘दामिनी’ को हवस का शिकार बनाने वाले दरिंदों को अपने किए की सजा बुधवार को मिल जाएगी लेकिन इलाहाबाद में कई ‘दामिनियों’ को अब तक न्याय नहीं मिल सका है। वर्षों पहले बलात्कार और उसके बाद नृशंस हत्या के दर्जनों मामलों में पीड़ितों के परिवार इंसाफ की आस में एड़ियां घिस रहे हैं। जटिल प्रक्रिया और गवाहों के पलटने के कारण ‘दामिनियाें’ के गुनहगार अब भी खुले में सांस ले रहे हैं। कुछ लोग जेल में हैं लेकिन उन्हें सजा नहीं मिली है। मामला विचाराधीन है तो कुछ जमानत पर घूम रहे हैं। तीन साल के दौरान कई ऐसी घटनाएं हुई जिसने अंदर तक झकझोर दिया। आरोपी पकड़े भी गए लेकिन मामला कानूनी प्रक्रियाओं में अटक कर रह गया है। इन दामिनियों के परिजनों को इंसाफ की दरकार है लेकिन रफ्तार काफी धीमी है। आलम यह है कि बलात्कार के 750 मामले इलाहाबाद में लंबित हैं जिनकी वक्त पर सुनवाई तक नहीं हो पा रही है। इसमें दुराचार के बाद जघन्य हत्याओं के मामले भी शामिल हैं। मौकाए वारदात से पकड़े गए आरोपियों को भी सजा नहीं दिलवाई जा सकी।
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0 बलात्कार के बाद कत्ल के कई मामलों में अब तक नहीं हुई सजा
0 जिले में लंबित हैं 750 मामले, कई में सुनवाई तक नहीं हुई शुरू
आशुतोष
इलाहाबाद। केस एक- जनवरी 2011, जार्जटाउन क्षेत्र में घर के नौकर ने 70 साल की रिटायर्ड प्रिंसिपल से दुराचार करने के बाद हत्या कर दी। नौकर जेल भेजा गया, मुकदमा चल रहा, ढाई साल बाद भी मामला लंबित।
केस दो- दो मार्च 2011, करेली में सात साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या। मामला उछला तो पुलिस ने एक रिश्तेदार को पकड़ा। साथ देने के आरोप में तीन और धरे गए। मामला विचाराधीन।
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केस तीन- 21 अप्रैल 2011, को नवाबगंज में छह साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। आरोप फूफा पर लगा। गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
केस चार- आठ जनवरी 2012, शंकरगढ़ में छह साल की मासूम बच्ची को पड़ोस के ही एक युवक ने हवस का शिकार बनाने के बाद गला घोंटकर मार डाला। आरोपी को जेल भेजा गया। मामला विचाराधीन।
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केस पांच- 28 अक्तूबर 2012, को नवाबगंज में 12 साल की बच्ची की पड़ोस के दुकानदार ने दुराचार के बाद हत्या कर दी। शव को घर में ही गाड़ दिया गया। मामले की सुनवाई चल रही है।
केस छह-एक मई 2013, सोरांव की रहने वाली बीएससी की छात्रा के साथ चलती कार में गैंगरेप, एक गिरफ्तार लेकिन किसी को सजा नहीं।
केस सात-एक मई 2013, झूंसी में 10 साल की लड़की के साथ रेप, चाचा पर आरोप, मां-बाप कार्रवाई के लिए लगा रहे दौड़।
दिल्ली में ‘दामिनी’ को हवस का शिकार बनाने वाले दरिंदों को अपने किए की सजा बुधवार को मिल जाएगी लेकिन इलाहाबाद में कई ‘दामिनियों’ को अब तक न्याय नहीं मिल सका है। वर्षों पहले बलात्कार और उसके बाद नृशंस हत्या के दर्जनों मामलों में पीड़ितों के परिवार इंसाफ की आस में एड़ियां घिस रहे हैं। जटिल प्रक्रिया और गवाहों के पलटने के कारण ‘दामिनियाें’ के गुनहगार अब भी खुले में सांस ले रहे हैं। कुछ लोग जेल में हैं लेकिन उन्हें सजा नहीं मिली है। मामला विचाराधीन है तो कुछ जमानत पर घूम रहे हैं। तीन साल के दौरान कई ऐसी घटनाएं हुई जिसने अंदर तक झकझोर दिया। आरोपी पकड़े भी गए लेकिन मामला कानूनी प्रक्रियाओं में अटक कर रह गया है। इन दामिनियों के परिजनों को इंसाफ की दरकार है लेकिन रफ्तार काफी धीमी है। आलम यह है कि बलात्कार के 750 मामले इलाहाबाद में लंबित हैं जिनकी वक्त पर सुनवाई तक नहीं हो पा रही है। इसमें दुराचार के बाद जघन्य हत्याओं के मामले भी शामिल हैं। मौकाए वारदात से पकड़े गए आरोपियों को भी सजा नहीं दिलवाई जा सकी।