फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   सहज विचारक, सुहृद मित्र थे शिवकुमार

सहज विचारक, सुहृद मित्र थे शिवकुमार

Sat, 22 Jun 2013 05:30 AM IST
Allahabad
Allahabad Updated Sat, 22 Jun 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद। जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष और प्रसिद्ध चिंतक-आलोचक डॉ.शिवकुमार मिश्र के निधन पर इलाहाबाद के साहित्यकारों ने भी दुख व्यक्त किया है। उन्होंने उनका भावपूर्ण स्मरण करते हुए आलोचना के क्षेत्र में उनके योगदान और व्यक्तित्व के उल्लेखनीय पक्षों को रेखांकित किया।
विज्ञापन

जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और वरिष्ठ कथाकार दूधनाथ सिंह ने कहा, जिंदगी भर मार्क्सवादी विचारों के साथ रहकर महत्वपूर्ण प्रगतिशील आलोचक के रूप में शिवकुमार ने यथार्थवाद पर कई दृष्टिकोणों से काम किया। कठमुल्ला राजनीति और आलोचना दोनों से उन्हें सख्त नफरत थी। वह एक सहज विचारक और सुहृद मित्र थे। इफको फूलपुर केनिदेशक उदयशंकर अवस्थी के आग्रह पर उन्होंने गीतिकाव्य का महत्वपूर्ण संकलन निकाला था। उनका जाना जलेस के लिए अपूरणीय क्षति है।
विज्ञापन

जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और वरिष्ठ आलोचक प्रोफेसर राजेंद्र कुमार ने कहा, नंददुलारे वाजपेयी के शिष्य होने के कारण मार्क्सवादी होते हुए शिवकुमार के मन में गैरमार्क्सवादी आलोचकों के प्रति भी सम्मान का भाव था। वह व्यावहारिक आलोचना के पक्षधर थे। आधुनिक काल के अध्येता होने के बावजूद उन्होंने मध्यकाल और प्राचीन काल के कवियों पर काम किया। नए लेखकों को प्रोत्साहन देने के साथ ही वह मित्रता के स्तर पर छोटे और बड़े का भेद भूल जाया करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

जसम के राष्ट्रीय महासचिव और सुपरिचित आलोचक प्रणय कृष्ण ने उन्हें ताकत और धीरज वाला व्यक्ति बताया। कहा, उन्होंने संघर्षों के बीच अपनी रचनाधर्मिता बनाए रखी। आपातकाल के बाद की स्थितियों में सत्ता के प्रतिरोध के लिए लेखकों की एकजुटता में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। सांप्रदायिकता के खिलाफ आवाज उठाने में भी वह आगे रहे। आज जब एक बार फिर वैसे दौर की पुनरावृत्ति हो रही है, ऐसे में उन्हीं संकल्पों पर कायम रहना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

प्रलेस के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ साहित्यकार अजित पुष्कल ने कहा, वह क्रांतिकारी विचारों के पक्षधर थे। वह आंदोलन को समग्रता में देखते थे। उनकी लेखनी में कभी किसी तरह का बंटवारा नहीं दिखा। वह एक ऐसे आलोचक थे जो जीवन भर प्रगतिशील विचारधारा के लिए काम करते रहे। वह गजब के निष्ठावान थे। उनकी स्मृति में शनिवार को कैरियर कोचिंग परिसर में शाम पांच बजे श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed