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वीवीआईपी के लिए ही क्यों है चौबीस घंटे बिजली
Allahabad
Updated Sat, 22 Jun 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। प्रदेश के कुछ जिलों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति और बाकी जिलों में भीषण कटौती के मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। पूछा है कि यह कौन से वीवीआईपी लोग हैं, जिनके क्षेत्र में बिना किसी नियम-कानून के ऐसी सुविधाएं दी जा रही हैं। वीवीआईपी की क्या परिभाषा है? कौन लोग इसके दायरे में आते हैं। कोर्ट ने पूछा कि सरकार ने किस प्रावधान के तहत ऐसी श्रेणियोें में लोगों को बांटा है। घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की क्या श्रेणियां हैं और उसका आधार क्या है। रामपुर, संभल और कन्नौज में कौन वीवीआईपी है।
प्रदेश सरकार की ओर से अदालत के इस सवाल का जवाब नहीं दिया जा सका इलेक्ट्रिक सिटी बोर्ड का कोई ऐसा प्रावधान है जिसके तहत बिजली आपूर्ति में भेदभाव हो सकता है। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं से 24 घंटे बिजली सप्लाई के हिसाब से फिक्स चार्ज और टैरिफ रेट वसूल करती है, मगर बिजली कुछ घंटे ही सप्लाई की जाती है। इस हिसाब से उन जिलों को उपभोक्ताओं को बिजली महंगी पड़ती है, जहां चौबीस घंटे सप्लाई नहीं है। ऐसा करना भेदभाव पूर्ण है और इस भेदभाव का कोई कानूनी आधार नहीं है। फिलहाल कोर्ट ने प्रदेश सरकार से विस्तृत हलफनामा मांगते हुए याचिका को जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार किया है।
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प्रदेश सरकार की ओर से अदालत के इस सवाल का जवाब नहीं दिया जा सका इलेक्ट्रिक सिटी बोर्ड का कोई ऐसा प्रावधान है जिसके तहत बिजली आपूर्ति में भेदभाव हो सकता है। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं से 24 घंटे बिजली सप्लाई के हिसाब से फिक्स चार्ज और टैरिफ रेट वसूल करती है, मगर बिजली कुछ घंटे ही सप्लाई की जाती है। इस हिसाब से उन जिलों को उपभोक्ताओं को बिजली महंगी पड़ती है, जहां चौबीस घंटे सप्लाई नहीं है। ऐसा करना भेदभाव पूर्ण है और इस भेदभाव का कोई कानूनी आधार नहीं है। फिलहाल कोर्ट ने प्रदेश सरकार से विस्तृत हलफनामा मांगते हुए याचिका को जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार किया है।
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