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विवि में विवादों भरा एक और साल
Allahabad
Updated Thu, 16 May 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के लिए सत्र 2012-13 का खास महत्व था। एक जमाने में पूरब का ऑक्सफोर्ड रहे इस संस्थान ने गौरवमयी 125 साल पूरे किए। छात्र-छात्राएं ही नहीं शहरियों को भी कुछ बड़ी शुरुआत की उम्मीद थी लेकिन विश्वविद्यालय का यह सत्र भी नए विवादों के साथ बुधवार को समाप्त हो गया। पहले छात्रसंघ फिर हास्टल, इन दोनों मामलों में विश्वविद्यालय की भद पिटी लेकिन 10 जुलाई को शुरू हुए इस सत्र में भी यह सिलसिल नहीं टूटा। पहले दिन ही शिक्षकों और अफसरों की गाड़ियों के परिसर में प्रवेश पर रोक लगाने को लेकर काफी हंगामा हुआ। शिक्षक और अफसर आपस में ही बंट गए। आज भी छात्रसंघ मामले में शिक्षक समुदाय दो गुटों में बंटा हुआ है तथा कुलपति समेत अन्य अफसरों की भूमिका पर सवाल खड़ा है। इस दौरान एएन झा में रैगिंग, आंदोलनरत छात्रों द्वारा कुलपति के साथ हाथापाई, कुलपति पर छेड़खानी का मुकदमा, कुलपति कार्यालय में छात्रसंघ अध्यक्ष, उपाध्यक्ष की मौजूदगी में तोड़फोड़, स्टेनो तथा गार्ड की पिटाई, कार्यवाहक कुलपति रहे प्रोफेसर एनआर फारुकी की बैठक में छात्रसंघ महामंत्री का घुस जाना, एआर को धमकी, प्रवेश परीक्षाओं में वित्तिय अनियमितता का आरोप समेत कई मामले हैं जिसमें वीसी तथा उनकी टीम सीधे निशाने पर हैं। ये ऐसे मामले हैं जिसे कोई भी याद नहीं करना चाहेगा। संस्थान में इस सत्र में शिक्षक भर्ती तथा छात्रसंघ चुनाव की पहल जरूर हुई लेकिन पक्षपात तथा पारदर्शिता न होने के आरोपों के बीच यह उपलब्धि भी विवादों को जन्म दे गई। इसको लेकर पूरा तंत्र सवालों के घेरे में हैं और परिसर अखाड़ा बना गया है जिसका दंश नए सत्र में भी छात्र-छात्राओं को झेलना पड़ेगा। कई अन्य विवाद हैं जिनकी छाया 11 जुलाई को शुरू होने वाले नए सत्र पर रहेगी।
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