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जली ‘होलिका’, हुआ धमाल
Allahabad
Updated Wed, 27 Mar 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। रंगों के पर्व होली की पूर्व संध्या पर मंगलवार को शहर में अनेक मोहल्लों, चौराहों पर परंपरागत तरीके से होलिका जलाई गई। भद्रा को लेकर कई तरह के संशय थे लेकिन प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा के कारण मंगलवार को ही अनेक ज्योतिषीय उपायों के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भद्रा के बीच ही होलिका में आग लगाई गई। थोड़ी ही देर में लकड़ियां धू-धू करके जल उठीं। मुहूर्त रात 11.25 से 12.35 केबीच था सो शहर में अधिकतर स्थानों पर आधी रात के बाद तक होलिका स्थलों पर लोगों का जमावड़ा रहा।
परंपरागत रूप से होलिका में चने, बर्रे की डालियां और गेहूं की बालियां डाली गईं। साथ ही शरीर पर उबटन लगाकर छुड़ाने के बाद बचे हुए की बनाई गई पिंडियां और सिर से लेकर पांव तक नापा गया कच्चा सूत भी होलिका में डाला गया। माना जाता है कि होलिका में इन चीजों को डालने के साथ परिवार की आपदाएं भी जलकर भस्म हो जाती हैं। पर्व के मद्देनजर शहर के बाजारों और चौराहों पर बर्रे, चने की डालियां और गेहूं की बालियां बिकीं।
इस मौके पर मोहल्लों की टोलियों की ओर से पूरी मस्ती, पूरे धमाल की तैयारी की गई थी। होलिका स्थल को चारों ओर से कागज की रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया था। कई स्थानों पर लाउडस्पीकरों से होली के गीत भी बजे जिसमें तेज धुन वाले गीतों पर उत्साही युवकों ने जमकर डांस भी किया। कई मोहल्लों में होलिका पर फाग सहित अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। होलिका जलने के बाद वहां जुटे लोगों ने होलिका की राख और अबीर-गुलाल लगाकर एक दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
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0 महादेवी आवास पर बरसा ‘शब्दरंग’
अशोक नगर स्थित महादेवी आवास पर भी परंपरागत तरीके से होलिका जलाई गई। आवास की मुखिया रानी पांडेय ने महादेवी की ही तर्ज पर वहां पहुंचने वालों की राई-नोन से नजर उतारी। सांस्कृतिक संध्या के तहत गीतकार यश मालवीय ने महादेवी की पंरपरा को रेखांकित करते हुए उन्हें याद किया। कवि श्लेष गौतम ने कहा, यहां की होली में रंग और शब्द दोनों ही बरसते हैं।
इसी क्रम में आरती मालवीय ने सुमधुर स्वर में महादेवी की कविताएं सुनाकर मंत्रमुग्ध किया। बाद में सभी ने एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। सचिव ब्रजेश पांडेय ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में नरेंद्र खोसला, अनिल रंजन भौमिक, राजेश श्रीवास्तव, केके राय, भास्कर श्रीवास्तव, अंशु मालवीय, आभा पांडेय, विक्रमाजीत तिवारी आदि मौजूद थे।
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परंपरागत रूप से होलिका में चने, बर्रे की डालियां और गेहूं की बालियां डाली गईं। साथ ही शरीर पर उबटन लगाकर छुड़ाने के बाद बचे हुए की बनाई गई पिंडियां और सिर से लेकर पांव तक नापा गया कच्चा सूत भी होलिका में डाला गया। माना जाता है कि होलिका में इन चीजों को डालने के साथ परिवार की आपदाएं भी जलकर भस्म हो जाती हैं। पर्व के मद्देनजर शहर के बाजारों और चौराहों पर बर्रे, चने की डालियां और गेहूं की बालियां बिकीं।
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इस मौके पर मोहल्लों की टोलियों की ओर से पूरी मस्ती, पूरे धमाल की तैयारी की गई थी। होलिका स्थल को चारों ओर से कागज की रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया था। कई स्थानों पर लाउडस्पीकरों से होली के गीत भी बजे जिसमें तेज धुन वाले गीतों पर उत्साही युवकों ने जमकर डांस भी किया। कई मोहल्लों में होलिका पर फाग सहित अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। होलिका जलने के बाद वहां जुटे लोगों ने होलिका की राख और अबीर-गुलाल लगाकर एक दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
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0 महादेवी आवास पर बरसा ‘शब्दरंग’
अशोक नगर स्थित महादेवी आवास पर भी परंपरागत तरीके से होलिका जलाई गई। आवास की मुखिया रानी पांडेय ने महादेवी की ही तर्ज पर वहां पहुंचने वालों की राई-नोन से नजर उतारी। सांस्कृतिक संध्या के तहत गीतकार यश मालवीय ने महादेवी की पंरपरा को रेखांकित करते हुए उन्हें याद किया। कवि श्लेष गौतम ने कहा, यहां की होली में रंग और शब्द दोनों ही बरसते हैं।
इसी क्रम में आरती मालवीय ने सुमधुर स्वर में महादेवी की कविताएं सुनाकर मंत्रमुग्ध किया। बाद में सभी ने एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। सचिव ब्रजेश पांडेय ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में नरेंद्र खोसला, अनिल रंजन भौमिक, राजेश श्रीवास्तव, केके राय, भास्कर श्रीवास्तव, अंशु मालवीय, आभा पांडेय, विक्रमाजीत तिवारी आदि मौजूद थे।