{"_id":"8-26320","slug":"Allahabad-26320-8","type":"story","status":"publish","title_hn":"इलाहाबाद में बनेगा लोकशिल्प संग्रहालय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इलाहाबाद में बनेगा लोकशिल्प संग्रहालय
Allahabad
Updated Fri, 15 Mar 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद। अब अलग-अलग प्रदेशों के लोकशिल्पों की जानकारी के लिए आपको अलग-अलग नहीं भटकना पड़ेगा बल्कि एक ही छत के नीचे सभी लोकशिल्पों का परिचय मिल सकेगा। इसके लिए इलाहाबाद में जल्द ही ‘लोकशिल्प संग्रहालय’ बनाया जाएगा, जहां सांस्कृतिक केंद्र के अधीन आने वाले सभी सात राज्यों के प्रमुख लोकशिल्पों को संग्रहीत किया जाएगा।
सांस्कृतिक केंद्र की पहल के तहत लोकशिल्प संग्रहालय में उत्तर प्रदेश सहित उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, मध्यप्रदेश के विविधतापूर्ण लोकशिल्पों का संगम रहेगा। इसमें मृत्तिका शिल्प और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े अनेक हस्तशिल्पों के साथ ही हाथ से बने अनेक लोकशिल्प होंगे। अलग-अलग प्रदेशों की लोक कलाओं के संरक्षण के लिए कलावीथिकाओं का निर्माण किया जाएगा जिसमें संबंधित प्रदेश के चुनिंदा लोकशिल्प शामिल होंगे।
केंद्र निदेशक राजेश पुरोहित के मुताबिक केंद्र की ओर से प्राथमिकता के आधार पर गांव-गांव जाकर दर्शकों तक पहुंच बनाने और उनके बीच उनकी रुचि के कार्यक्रम प्रस्तुत करने सहित लोककलाओं की सभी विधियों के अभिलेखीकरण की गतिविधियों को और तेज किया जाएगा। इसी तरह सभी राज्यों को वही दर्जा देने की कोशिश की जाएगी जैसा कि इलाहाबाद और स्थानीय कलाविधाओं के कलाकारों को हासिल है। वहीं सांस्कृतिक केंद्र की गतिविधियों पर एक डाक्यूमेंटरी भी तैयार कराई जाएगी जो उसकी योजनाओं और उपलब्धियों का आईना हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
सांस्कृतिक केंद्र की पहल के तहत लोकशिल्प संग्रहालय में उत्तर प्रदेश सहित उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, मध्यप्रदेश के विविधतापूर्ण लोकशिल्पों का संगम रहेगा। इसमें मृत्तिका शिल्प और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े अनेक हस्तशिल्पों के साथ ही हाथ से बने अनेक लोकशिल्प होंगे। अलग-अलग प्रदेशों की लोक कलाओं के संरक्षण के लिए कलावीथिकाओं का निर्माण किया जाएगा जिसमें संबंधित प्रदेश के चुनिंदा लोकशिल्प शामिल होंगे।
विज्ञापन
केंद्र निदेशक राजेश पुरोहित के मुताबिक केंद्र की ओर से प्राथमिकता के आधार पर गांव-गांव जाकर दर्शकों तक पहुंच बनाने और उनके बीच उनकी रुचि के कार्यक्रम प्रस्तुत करने सहित लोककलाओं की सभी विधियों के अभिलेखीकरण की गतिविधियों को और तेज किया जाएगा। इसी तरह सभी राज्यों को वही दर्जा देने की कोशिश की जाएगी जैसा कि इलाहाबाद और स्थानीय कलाविधाओं के कलाकारों को हासिल है। वहीं सांस्कृतिक केंद्र की गतिविधियों पर एक डाक्यूमेंटरी भी तैयार कराई जाएगी जो उसकी योजनाओं और उपलब्धियों का आईना हो।
विज्ञापन