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पूर्णिमा की डुबकी से पूरा होगा कल्पवास
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Mon, 25 Feb 2013 12:05 PM IST
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माघी पूर्णिमा पर सोमवार को डुबकी के साथ महीने भर से चल रहा कल्पवास पूरा हो जाएगा। इसी के साथ माह भर के जप, तप, यम, नियम, संयम का संकल्प भी पूरा होगा। कल्पवासी संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाने के बाद शिविरों में पूजा-अर्चना करेंगे और घर को रवाना होंगे।
ज्यादातर कल्पवासियों के घर से लोग उन्हें लेने आ पहुंचे हैं इसलिए रविवार को पूरा दिन शिविर का सामान समेटने और वापसी की तैयारियों में बीता।
बड़ी संख्या में कल्पवासियों ने रविवार को कल्पवास का भंडारा किया। उन्होंने अपने तीर्थ पुरोहित की देखरेख में ठाकुरजी को भोग लगाने के बाद अन्य सदस्यों के बीच भोग का प्रसाद ग्रहण किया। माघी पूर्णिमा पर डुबकी के साथ ही ऐसे कल्पवासी भी संगम की रेती से विदा होंगे जिन्होंने संक्रांति से संक्रांति का कल्पवास किया लेकिन माघी पूर्णिमा पर स्नान के लिए अब तक रुके रहे।
तीर्थपुरोहित अजय कुमार पांडेय के मुताबिक कल्पवास की शुरुआत पर जो तुलसी का पौधा रोपा गया था, ज्यादातर श्रद्धालु उसे साथ ले जाएंगे। इसी तरह पूजन के बाद जौ के पौधे भी शिविर में ही विसर्जित कर दिए जाएंगे। अपने तीर्थ पुरोहित को यथाशक्ति दान-दक्षिणा देने, ठाकुर जी को भेंट चढ़ाने और उनका आशीष लेने के बाद संगम की रेती से विदा हो जाएंगे।
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माघ की पूर्णिमा तिथि रविवार 1.40 बजे से शुरू हो रही है। सोमवार को रात 2.01 बजे तक पूर्णिमा की तिथि रहेगी इस कारण पूरे दिन स्नान किया जा सकेगा। ज्योतिर्विदों के मुताबिक कुंभ राशि में चार ग्रहों का संयोग, मघा नक्षत्र तथा अतिगंड योग स्नान का अच्छा फल देगा। सोमवार को दिन में 1.41 बजे तक भद्रा रहेगी लेकिन स्नान के लिए इसका कोई प्रभाव नहीं माना जाता। दोपहर के बाद घर वापसी के वक्त भद्रा का प्रभाव खत्म हो जाएगा।
संगम की रेती पर कल्पवास के बाद घर वापसी पर परंपरानुसार कल्पवासी फिर कथा सुनेंगे। ज्यादातर कल्पवासी याज्ञिक अनुष्ठान के बाद भंडारा भी करेंगे, इसके बाद ही कल्पवास के संकल्प को पूर्णता मिलेगी।
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ज्यादातर कल्पवासियों के घर से लोग उन्हें लेने आ पहुंचे हैं इसलिए रविवार को पूरा दिन शिविर का सामान समेटने और वापसी की तैयारियों में बीता।
बड़ी संख्या में कल्पवासियों ने रविवार को कल्पवास का भंडारा किया। उन्होंने अपने तीर्थ पुरोहित की देखरेख में ठाकुरजी को भोग लगाने के बाद अन्य सदस्यों के बीच भोग का प्रसाद ग्रहण किया। माघी पूर्णिमा पर डुबकी के साथ ही ऐसे कल्पवासी भी संगम की रेती से विदा होंगे जिन्होंने संक्रांति से संक्रांति का कल्पवास किया लेकिन माघी पूर्णिमा पर स्नान के लिए अब तक रुके रहे।
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तीर्थपुरोहित अजय कुमार पांडेय के मुताबिक कल्पवास की शुरुआत पर जो तुलसी का पौधा रोपा गया था, ज्यादातर श्रद्धालु उसे साथ ले जाएंगे। इसी तरह पूजन के बाद जौ के पौधे भी शिविर में ही विसर्जित कर दिए जाएंगे। अपने तीर्थ पुरोहित को यथाशक्ति दान-दक्षिणा देने, ठाकुर जी को भेंट चढ़ाने और उनका आशीष लेने के बाद संगम की रेती से विदा हो जाएंगे।
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माघ की पूर्णिमा तिथि रविवार 1.40 बजे से शुरू हो रही है। सोमवार को रात 2.01 बजे तक पूर्णिमा की तिथि रहेगी इस कारण पूरे दिन स्नान किया जा सकेगा। ज्योतिर्विदों के मुताबिक कुंभ राशि में चार ग्रहों का संयोग, मघा नक्षत्र तथा अतिगंड योग स्नान का अच्छा फल देगा। सोमवार को दिन में 1.41 बजे तक भद्रा रहेगी लेकिन स्नान के लिए इसका कोई प्रभाव नहीं माना जाता। दोपहर के बाद घर वापसी के वक्त भद्रा का प्रभाव खत्म हो जाएगा।
संगम की रेती पर कल्पवास के बाद घर वापसी पर परंपरानुसार कल्पवासी फिर कथा सुनेंगे। ज्यादातर कल्पवासी याज्ञिक अनुष्ठान के बाद भंडारा भी करेंगे, इसके बाद ही कल्पवास के संकल्प को पूर्णता मिलेगी।