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दलाई लामा, रामदेव भी जपेंगे राम नाम
Allahabad
Updated Sat, 02 Feb 2013 05:30 AM IST
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महाकुंभ नगर। कुंभ का इतिहास रहा है कि हिंदू धर्म और इससे जुड़े तमाम पहलुओं पर मेले के दौरान बड़े पैमाने पर मंथन किया गया। देश भर के संत जुटे और किसी निष्कर्ष तक भी पहुंचे। इस बार भी यही होने जा रहा है। लोकसभा चुनाव-2014 करीब है, सो प्रमुख मुद्दा राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण से जुड़ा है। चार फरवरी को अपराह्न दो बजे महामंडलेश्वर गुरू शरणानंद जी महाराज के नेतृत्व में सेक्टर-12 स्थित कार्षिण आश्रम में सभी संप्रदायों के वरिष्ठ आचार्यों का परस्पर मिलन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें दलाईलामा और योग गुरु बाबा रामदेव जैसी हस्तियां भी शामिल होंगी। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल भी इस सम्मेलन में शामिल होंगे और संतों के साथ मिलकर आवाज उठाएंगे कि रामजन्म भूमि के मसले पर अब संसद ही कोई फैसला करे।
कुंभ मेला क्षेत्र के सेक्टर-6 में स्थित विहिप के शिविर मे अशोक सिंहल ने संवाददाताओं से कहा कि भगवान रामलला को अब कपड़े के मंदिर से मुक्त कराने का समय आ गया है। उनके गौरव के अनुरूप 70 एकड़ परिसर में विशाल मंदिर का निर्माण जरूरी हो गया है। संत किसी भी कीमत पर रामजन्म भूमि का बंटवारा नहीं चाहते हैं। मंदिर के लिए प्रदेश भर में अनुष्ठान होंगे। जरूरत पड़ी तो आंदोलन भी होगा। सिंघल मानते हैं कि आमरण अनशन से उनका विश्वास उठ चुका है, सो आंदोलन का स्वरूप कुछ और होना चाहिए। अगले एक महीने में यह भी तय हो जाएगा। अब वक्त आ गया है कि राम जन्मभूमि के मसले पर कोई अंतिम निर्णय हो। परिस्थितियां अनुकूल हैं। हिंदू समाज दबने को तैयार नहीं है।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में कई ऐसे संत भी पहुंच रहे हैं, जो कुंभ में पहले कभी नहीं आए। इनमें अरुणाचल प्रदेश के 100 प्रतिनिधि और शंकरदेव की ओर से स्थापित भागवत संप्रदाय के लोग भी शामिल हैं। बंगाल, उड़ीसा, तमिलनाडु, केरल से भी लोग आएंगे। साथ ही कर्नाटक एवं महाराष्ट्र में प्रभावशाली लिंगायत समाज के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचेंगे। सम्मेलन में तकरीबन 10 हजार प्रमुख साधु-संतों के पहुंचने का अनुमान है। सिंघल ने बताया कि छह फरवरी को सेक्टर-10 के मोरी मार्ग स्थित रसिया बाबा नगर में केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक होगी और सात फरवरी को शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज के शिविर में धर्मसंसद एवं संत महासम्मेलन होगा और इन आयोजनों के दौरान भी राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का मुद्दा प्रमुख होगा।
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सम्मेलन में चर्चा के अन्य बिंदु
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कुंभ मेला क्षेत्र के सेक्टर-6 में स्थित विहिप के शिविर मे अशोक सिंहल ने संवाददाताओं से कहा कि भगवान रामलला को अब कपड़े के मंदिर से मुक्त कराने का समय आ गया है। उनके गौरव के अनुरूप 70 एकड़ परिसर में विशाल मंदिर का निर्माण जरूरी हो गया है। संत किसी भी कीमत पर रामजन्म भूमि का बंटवारा नहीं चाहते हैं। मंदिर के लिए प्रदेश भर में अनुष्ठान होंगे। जरूरत पड़ी तो आंदोलन भी होगा। सिंघल मानते हैं कि आमरण अनशन से उनका विश्वास उठ चुका है, सो आंदोलन का स्वरूप कुछ और होना चाहिए। अगले एक महीने में यह भी तय हो जाएगा। अब वक्त आ गया है कि राम जन्मभूमि के मसले पर कोई अंतिम निर्णय हो। परिस्थितियां अनुकूल हैं। हिंदू समाज दबने को तैयार नहीं है।
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उन्होंने बताया कि सम्मेलन में कई ऐसे संत भी पहुंच रहे हैं, जो कुंभ में पहले कभी नहीं आए। इनमें अरुणाचल प्रदेश के 100 प्रतिनिधि और शंकरदेव की ओर से स्थापित भागवत संप्रदाय के लोग भी शामिल हैं। बंगाल, उड़ीसा, तमिलनाडु, केरल से भी लोग आएंगे। साथ ही कर्नाटक एवं महाराष्ट्र में प्रभावशाली लिंगायत समाज के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचेंगे। सम्मेलन में तकरीबन 10 हजार प्रमुख साधु-संतों के पहुंचने का अनुमान है। सिंघल ने बताया कि छह फरवरी को सेक्टर-10 के मोरी मार्ग स्थित रसिया बाबा नगर में केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक होगी और सात फरवरी को शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज के शिविर में धर्मसंसद एवं संत महासम्मेलन होगा और इन आयोजनों के दौरान भी राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का मुद्दा प्रमुख होगा।
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सम्मेलन में चर्चा के अन्य बिंदु