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पीपा खत्म, पांटून पुल पर संकट
Allahabad
Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। महाकुंभ के लिए सबसे जरूरी पांटून पुलों का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। स्थिति यह है कि छतनाग से अरैल को जोड़ने वाले पांटून पुल में लगाने के लिए पीडब्ल्यूडी के पास पीपे खत्म हो गए हैं। पुल के लिए ठेकेदार को पूर्व में जो पीपे दिए गए, उसमें से कई क्रैक हैं या फूटे हुए हैं। इस अव्यवस्था के बीच ठेकेदार ने काम न करने तक की चेतावनी दे डाली है।
महाकुंभ मेला क्षेत्र में छतनाग से अरैल को जोड़ने के लिए अप और डाउन दो पुलों का निर्माण होना है। इसमें से डाउन पुल आधा से ज्यादा बन गया है लेकिन अप पांटून पुल को बनाने में अड़चन आ गई। यह अड़चन आई है पीपों की कमी से। अप पांटून पुल में कुल 134 पीपे लगने हैं लेकिन पीडब्ल्यूडी ने ठेकेदार को अब तक मात्र 72 पीपे उपलब्ध कराए हैं। उसमें से भी नौ पीपे फूटे होने के कारण किसी काम के नहीं हैं, जबकि इन नौ के अलावा अभी 62 पीपों की और जरूरत है। ठेकेदार ने इस संबंध में अधिशासी अभियंता आरके अत्री को भी लिखा, जिसमें सामान मिलने में देरी पर काम न करने तक की चेतावनी दी है। अभियंता का कहना है कि पीपा मिलने में देरी होगी तो पहले शाही स्नान तक काम पूरा करना मुश्किल होगा।
दारागंज को झूंसी से जोड़ने वाला भारद्वाज पांटून पुल और नागवासुकि पांटून पुल भी अधूरा है। विभागीय लोगों का कहना है कि दूसरे जिलों में पीपे की तलाश की जा रही है। विभाग के मेला डिवीजन में पुराने पीपे रखे हैं, उनकी रिपेयरिंग कर काम निकाला जा सकता है लेकिन उस पर अधिकारियों का तो ध्यान नहीं है या फिर कमीशन के फेर में उसे जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है। सवाल यह है कि अफसरों को जब पहले से पता था कि पांटून पुल में कितने पीपे लगने हैं, उस हिसाब से पीपे तैयार क्यों नहीं कराए गए? या फिर अतिरिक्त पीपों की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
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खड़ंजा मार्ग बनाने में हो रहा ‘खेल’
इलाहाबाद। अरैल में खड़ंजा मार्ग बनाने में पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता और अवर अभियंता की मिलीभगत से ठेेकेदार लंबा ‘खेल’ कर रहे हैं। खड़ंजा मार्ग बनाने में दोयम दर्जे की ईंट लगाई जा रही है। तीन दिन पहले निर्माण खंड चार के अधिशासी अभियंता हंसराज हंस ने मौके पर ईंट की जांच कर घटिया क्वालिटी पर आपत्ति जताते हुए एई और जेई को जमकर खरी-खोटी सुनाई। ठेकेदार से ईंट उखाड़ कर अव्वल ईंट लगाने को कहा लेकिन उसने बमुश्किल 40-50 मीटर ईंट उखाड़ कर नई लगा दी बाकी को उसी तरह छोड़ दिया। निगरानी कर रहे एई और जेई ने भी ठेकेदार के इस काम पर आपत्ति नहीं की।
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महाकुंभ मेला क्षेत्र में छतनाग से अरैल को जोड़ने के लिए अप और डाउन दो पुलों का निर्माण होना है। इसमें से डाउन पुल आधा से ज्यादा बन गया है लेकिन अप पांटून पुल को बनाने में अड़चन आ गई। यह अड़चन आई है पीपों की कमी से। अप पांटून पुल में कुल 134 पीपे लगने हैं लेकिन पीडब्ल्यूडी ने ठेकेदार को अब तक मात्र 72 पीपे उपलब्ध कराए हैं। उसमें से भी नौ पीपे फूटे होने के कारण किसी काम के नहीं हैं, जबकि इन नौ के अलावा अभी 62 पीपों की और जरूरत है। ठेकेदार ने इस संबंध में अधिशासी अभियंता आरके अत्री को भी लिखा, जिसमें सामान मिलने में देरी पर काम न करने तक की चेतावनी दी है। अभियंता का कहना है कि पीपा मिलने में देरी होगी तो पहले शाही स्नान तक काम पूरा करना मुश्किल होगा।
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दारागंज को झूंसी से जोड़ने वाला भारद्वाज पांटून पुल और नागवासुकि पांटून पुल भी अधूरा है। विभागीय लोगों का कहना है कि दूसरे जिलों में पीपे की तलाश की जा रही है। विभाग के मेला डिवीजन में पुराने पीपे रखे हैं, उनकी रिपेयरिंग कर काम निकाला जा सकता है लेकिन उस पर अधिकारियों का तो ध्यान नहीं है या फिर कमीशन के फेर में उसे जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है। सवाल यह है कि अफसरों को जब पहले से पता था कि पांटून पुल में कितने पीपे लगने हैं, उस हिसाब से पीपे तैयार क्यों नहीं कराए गए? या फिर अतिरिक्त पीपों की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
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खड़ंजा मार्ग बनाने में हो रहा ‘खेल’
इलाहाबाद। अरैल में खड़ंजा मार्ग बनाने में पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता और अवर अभियंता की मिलीभगत से ठेेकेदार लंबा ‘खेल’ कर रहे हैं। खड़ंजा मार्ग बनाने में दोयम दर्जे की ईंट लगाई जा रही है। तीन दिन पहले निर्माण खंड चार के अधिशासी अभियंता हंसराज हंस ने मौके पर ईंट की जांच कर घटिया क्वालिटी पर आपत्ति जताते हुए एई और जेई को जमकर खरी-खोटी सुनाई। ठेकेदार से ईंट उखाड़ कर अव्वल ईंट लगाने को कहा लेकिन उसने बमुश्किल 40-50 मीटर ईंट उखाड़ कर नई लगा दी बाकी को उसी तरह छोड़ दिया। निगरानी कर रहे एई और जेई ने भी ठेकेदार के इस काम पर आपत्ति नहीं की।