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शिक्षकों के तबादले में सियासी दखल
Allahabad
Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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इलाहाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों में संशोधन नियम लागू होने के बाद भी राजनीतिक हस्तक्षेप पर तबादले किए गए। हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका में यह आरोप एक शिक्षक ने लगाया है। याचिका में इस बात का खुलासा किए जाने के बाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव और बेसिक शिक्षा मंत्री कार्यालय के सचिव से हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा सचिव को भी 15 अक्टूबर को न्यायालय में मुख्यमंत्री और मंत्री बेसिक शिक्षा कार्यालय के रिकार्ड और अन्य दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
रजनी गोयल द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वीके शुक्ला ने यह आदेश दिया। याचिका के मुताबिक रजनी गोयल ने बेसिक शिक्षा अधिनियम 1981 में 13 संशोधन के लागू होने के बाद अंतरजनपदीय तबादले के लिए आवेदन किया था। मांगे गए तीन विकल्पों में से उसने एक विकल्प लखनऊ का भी चुना था। अदालत मेें सचिव बेसिक शिक्षा परिषद् का 31 अगस्त 2012 का एक पत्र प्रस्तुत किया गया जिसमें कहा गया है कि संशोधन को लागू कर दिया गया है और उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय तथा सचिव बेसिक शिक्षा कार्यालय से शिक्षकों की सूची प्राप्त हुई थी जिसके आधार पर तबादले किए गए।
कोर्ट ने कहा कि जब एक बार नियम बन गया तो उसके बाद मुख्यमंत्री या बेसिक शिक्षा मंत्री कार्यालय की सूची पर तबादलेे करने का क्या औचित्य है। कोर्ट ने दोनों कार्यालयों केसचिवों से इस संबंध में हलफनामा मांगा है। यह बताने को कहा है कि किन परिस्थितियों में वैधानिक नियम बनने के बाद भी बेसिक शिक्षा सचिव को शिक्षकों की सूची उपलब्ध कराई गई। बेसिक शिक्षा विभाग को इस आशय का एक नोटिस प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया है जिससे मुख्यमंत्री और बेसिक शिक्षा मंत्री कार्यालय की सूची द्वारा लाभान्वित हुए। कहा कि इस मामले में शिक्षक भी अदालत में अपना पक्ष रख सकते हैं।
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रजनी गोयल द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वीके शुक्ला ने यह आदेश दिया। याचिका के मुताबिक रजनी गोयल ने बेसिक शिक्षा अधिनियम 1981 में 13 संशोधन के लागू होने के बाद अंतरजनपदीय तबादले के लिए आवेदन किया था। मांगे गए तीन विकल्पों में से उसने एक विकल्प लखनऊ का भी चुना था। अदालत मेें सचिव बेसिक शिक्षा परिषद् का 31 अगस्त 2012 का एक पत्र प्रस्तुत किया गया जिसमें कहा गया है कि संशोधन को लागू कर दिया गया है और उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय तथा सचिव बेसिक शिक्षा कार्यालय से शिक्षकों की सूची प्राप्त हुई थी जिसके आधार पर तबादले किए गए।
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कोर्ट ने कहा कि जब एक बार नियम बन गया तो उसके बाद मुख्यमंत्री या बेसिक शिक्षा मंत्री कार्यालय की सूची पर तबादलेे करने का क्या औचित्य है। कोर्ट ने दोनों कार्यालयों केसचिवों से इस संबंध में हलफनामा मांगा है। यह बताने को कहा है कि किन परिस्थितियों में वैधानिक नियम बनने के बाद भी बेसिक शिक्षा सचिव को शिक्षकों की सूची उपलब्ध कराई गई। बेसिक शिक्षा विभाग को इस आशय का एक नोटिस प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया है जिससे मुख्यमंत्री और बेसिक शिक्षा मंत्री कार्यालय की सूची द्वारा लाभान्वित हुए। कहा कि इस मामले में शिक्षक भी अदालत में अपना पक्ष रख सकते हैं।
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