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शुआट्स कुलपति आरबी लाल को नहीं मिली जमानत
अदालत ने कहा- आरोप संगीन, जमानत का आधार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। एक्सिस बैंक घोटाले में जेल में बंद शुआट्स के कुलपति आरबी लाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला अदालत ने उनको जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता के मद्देनजर कुलपति की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। जमानत पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम मनोहर नारायण मिश्र ने सुनवाई की। प्रदेश सरकार की ओर से डीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि, एडीजीसी राज कुमार सिंह ने आरबी लाल की जमानत का कड़ा विरोध किया।
एक्सिस बैंक में 22 करोड़ से अधिक के घोटाले का मुकदमा सिविल लाइंस थाने में दर्ज होने के बाद आरबी लाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कई प्रयास किए थे। उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली, वहां से राहत नहीं मिलने पर सुप्रीमकोर्ट गए। सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इंकार करते हुए उनको 15 अप्रैल को जिला अदालत में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। सरेंडर करने के बाद जिला न्यायालय ने उनकी अंतरिम जमानत अर्जी नामंजूर कर दी थी, जिसकी वजह से उनको जेल जाना पड़ा।
आरबी लाल पर आरोप है कि शुआट्स के एक्सिस बैंक खाते से बैंक और शुआट्स के कर्मचारियों की मिलीभगत से एक मार्च 2013 से नवंबर 2016 के बीच लगभग 22 करोड़ रुपये का गबन किया गया। पांच मई 2017 को थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। विवेचना के दौरान आरबी लाल का नाम प्रकाश में आया। इसके बाद पुलिस ने प्रकरण में आरबी लाल और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया किया। मंगलवार को आरबी लाल की जमानत पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरबी लाल प्राथमिकी में नामजद नहीं है। विवेचना में नाम प्रकाश में आया है। बैंक से इनके द्वारा कोई धन निकासी नहीं की गई और न हीं कोई धन लाभ लिया गया है। सिर्फ संभावना के आधार पर आरोपी बनाया गया है। अभियोजन की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरबी लाल शुआट्स के कुलपति हैं और एक जिम्मेदार पद पर हैं। बैंक घोटाले की जानकारी होने के बाद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की और न ही किसी दोषी कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। जिससे इनकी मिलीभगत उजागर होती है।
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शुआट्स कुलपति आरबी लाल को नहीं मिली जमानत
अदालत ने कहा- आरोप संगीन, जमानत का आधार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। एक्सिस बैंक घोटाले में जेल में बंद शुआट्स के कुलपति आरबी लाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला अदालत ने उनको जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता के मद्देनजर कुलपति की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। जमानत पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम मनोहर नारायण मिश्र ने सुनवाई की। प्रदेश सरकार की ओर से डीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि, एडीजीसी राज कुमार सिंह ने आरबी लाल की जमानत का कड़ा विरोध किया।
एक्सिस बैंक में 22 करोड़ से अधिक के घोटाले का मुकदमा सिविल लाइंस थाने में दर्ज होने के बाद आरबी लाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कई प्रयास किए थे। उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली, वहां से राहत नहीं मिलने पर सुप्रीमकोर्ट गए। सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इंकार करते हुए उनको 15 अप्रैल को जिला अदालत में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। सरेंडर करने के बाद जिला न्यायालय ने उनकी अंतरिम जमानत अर्जी नामंजूर कर दी थी, जिसकी वजह से उनको जेल जाना पड़ा।
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आरबी लाल पर आरोप है कि शुआट्स के एक्सिस बैंक खाते से बैंक और शुआट्स के कर्मचारियों की मिलीभगत से एक मार्च 2013 से नवंबर 2016 के बीच लगभग 22 करोड़ रुपये का गबन किया गया। पांच मई 2017 को थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। विवेचना के दौरान आरबी लाल का नाम प्रकाश में आया। इसके बाद पुलिस ने प्रकरण में आरबी लाल और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया किया। मंगलवार को आरबी लाल की जमानत पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरबी लाल प्राथमिकी में नामजद नहीं है। विवेचना में नाम प्रकाश में आया है। बैंक से इनके द्वारा कोई धन निकासी नहीं की गई और न हीं कोई धन लाभ लिया गया है। सिर्फ संभावना के आधार पर आरोपी बनाया गया है। अभियोजन की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरबी लाल शुआट्स के कुलपति हैं और एक जिम्मेदार पद पर हैं। बैंक घोटाले की जानकारी होने के बाद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की और न ही किसी दोषी कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। जिससे इनकी मिलीभगत उजागर होती है।
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