{"_id":"5c3508dfbdec2256dc68c581","slug":"91546979551-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुंभ पर्व में जल पीकर रहने का संकल्प","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुंभ पर्व में जल पीकर रहने का संकल्प
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महामंडलेश्वर स्वामी शिव चैतन्य पुरी जी महाराज ने मंगलवार को गंगा स्नान और पूजन करने के बाद कुंभ पर्व के दौरान सिर्फ जल पीकर रहने और साधना करने का संकल्प लिया है।
संकल्प के बाद उन्होंने गंगा के साथ ही संतों के स्नान की महिमा बखानी। कहा, संतों के गंगा स्नान की महिमा ऐसी है कि इससे स्वयं गंगा पवित्र होती है। भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा मृत्युलोक में आने को तैयार तो हुईं लेकिन प्रश्न किया कि पापयुक्त लोगों के स्नान से अपवित्र होने पर क्या करूंगी। तब भगवान शिव ने कहा था, आपके जल में जब संत-महात्मा स्नान करेंगे तो लोगों का पाप स्वत: धुल जाएगा। इसीलिए संतों के स्नान की महिमा है।
विज्ञापन
संकल्प के बाद उन्होंने गंगा के साथ ही संतों के स्नान की महिमा बखानी। कहा, संतों के गंगा स्नान की महिमा ऐसी है कि इससे स्वयं गंगा पवित्र होती है। भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा मृत्युलोक में आने को तैयार तो हुईं लेकिन प्रश्न किया कि पापयुक्त लोगों के स्नान से अपवित्र होने पर क्या करूंगी। तब भगवान शिव ने कहा था, आपके जल में जब संत-महात्मा स्नान करेंगे तो लोगों का पाप स्वत: धुल जाएगा। इसीलिए संतों के स्नान की महिमा है।
विज्ञापन