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हत्यारोपियों की उम्रकैद की सजा रद्द
Updated Mon, 19 Nov 2018 10:03 PM IST
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हत्यारोपियों की उम्रकैद की सजा रद्द
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा पाए अभियुक्तों राजू तेली, लल्लू उर्फ लाल दिवान और भूपेंद्र यादव की मिली आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी है। दो आरोपी राजू तेली और लल्लू जमानत पर हैं। कोर्ट ने उनको समर्पण न करने का आदेश देते हुए जमानत बांड निरस्त कर दिया है। जेल में बंद भूपेंद्र को भी तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट का कहना था कि घटना का न तो कोई चश्मदीद गवाह है और न ही कोई ठोस साक्ष्य है। अभियोजन की कहानी से आरोप साबित नहीं होता है।
सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति आरएसआर मौर्या और न्यायमूर्ति यूसी त्रिपाठी की पीठ ने दिया। घटना 17 नवंबर 1992 की अमीरपुर के राठ की है। सुबह नौ बजे रवि प्रकाश गुटखा खरीदने दुकान पर गया था। आरोप है कि तीनों अभियुक्तों ने उस पर फायरिंग कर दी जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। रवि प्रकाश के भाई ओम प्रकाश न भूपेंद्र यादव पर बदले की नीयत से हत्या करने का आरोप लगाते मुकदमा दर्ज कराया। अभियोजन की कहानी से हत्या का आरोप साबित नहीं हुआ। मृतक को तीन गोलियां मारना बताया गया जबकि उसकी जांघ से मात्र एक गोली मिली। कोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय ने साक्ष्यों पर विचार किए बिना सजा सुना दी जो कानून के विपरीत तथा रद्द होने योग्य है।
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प्रयागराज। हाईकोर्ट ने हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा पाए अभियुक्तों राजू तेली, लल्लू उर्फ लाल दिवान और भूपेंद्र यादव की मिली आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी है। दो आरोपी राजू तेली और लल्लू जमानत पर हैं। कोर्ट ने उनको समर्पण न करने का आदेश देते हुए जमानत बांड निरस्त कर दिया है। जेल में बंद भूपेंद्र को भी तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट का कहना था कि घटना का न तो कोई चश्मदीद गवाह है और न ही कोई ठोस साक्ष्य है। अभियोजन की कहानी से आरोप साबित नहीं होता है।
सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति आरएसआर मौर्या और न्यायमूर्ति यूसी त्रिपाठी की पीठ ने दिया। घटना 17 नवंबर 1992 की अमीरपुर के राठ की है। सुबह नौ बजे रवि प्रकाश गुटखा खरीदने दुकान पर गया था। आरोप है कि तीनों अभियुक्तों ने उस पर फायरिंग कर दी जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। रवि प्रकाश के भाई ओम प्रकाश न भूपेंद्र यादव पर बदले की नीयत से हत्या करने का आरोप लगाते मुकदमा दर्ज कराया। अभियोजन की कहानी से हत्या का आरोप साबित नहीं हुआ। मृतक को तीन गोलियां मारना बताया गया जबकि उसकी जांघ से मात्र एक गोली मिली। कोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय ने साक्ष्यों पर विचार किए बिना सजा सुना दी जो कानून के विपरीत तथा रद्द होने योग्य है।
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