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पायलेट प्रोजेक्ट रुका, सीजीएचएस में दवाओं की भारी किल्लत

Mon, 23 Apr 2018 01:44 AM IST
Updated Mon, 23 Apr 2018 01:44 AM IST
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पायलेट प्रोजेक्ट रुका, सीजीएचएस में दवाओं की भारी किल्लत
पायलेट प्रोजेक्ट रुका, सीजीएचएस में दवाओं की भारी किल्लत
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इंडेंट के जरिए मरीजों को उपलब्ध कराई जा रहीं 90 फीसदी दवाएं
केंद्र सरकार के उपक्रम एचएलएल को दवाओं की सप्लाई का जिम्मा

अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
केंद्र सरकार की नीतियों में बदलाव से सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) की डिस्पेंसरियों में दवाओं की भारी किल्लत हो गई है। पायलेट प्रोजेक्ट रोक दिए जाने से मरीजों को 90 फीसदी दवाएं सीधे सीजीएचएस के स्टोर से नहीं मिल पा रही हैं। ये दवाएं इंडेंट के माध्यम से दो-तीन दिन बाद मरीजों को दी जा रही हैं और सप्लायर इसमें जमकर मनमानी कर रहे हैं। इलाहाबाद में ही सीजीएचएस से जुड़े तकरीबन एक लाख लाभार्थी परेशान हैं और दवाओं के लिए भटक रहे हैं।
पहले पायलेट प्रोजेक्ट के तहत डिस्पेंसरी इंचार्ज के पास अधिकार था कि एक माह की दवा एडवांस में मंगाई जा सकती है। इन दवाओं के लिए इंचार्ज को डिमांड भेजनी पड़ती थी। डिमांड सीधे कंपनी को भेजी जाती थी और कंपनी सप्लायर के जरिये दवाएं एक सप्ताह में सीजीएचएस को मुहैया करा देती थी। अगर पंद्रह दिन में दवाएं नहीं मिलीं तो कंपनी पर जुर्माना किए जाने का प्रावधान था। दिसंबर-2017 तक यह व्यवस्था लागू थी लेकिन इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसका नवीनीकरण नहीं किया।
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इसकी जगह दवाओं की सप्लाई का जिम्मा अब केंद्र सरकार के उपक्रम एचएलएल को सौंप दिया गया है, जो दवाओं की सप्लाई ठीक से नहीं कर पा रहा है। डॉक्टरों की ओर से मरीजों को जो भी दवाएं लिखी जा रही हैं, उनमें से 90 फीसदी दवाएं इंडेंट के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालांकि पहले पायलेट प्रोजेक्ट के साथ केंद्र सरकार के उपक्रम गवर्नमेंट मेडिकल स्टोर डिपो (जीएमएसडी) से भी दवाएं मंगाई जाती थीं और तब दवाओं की किल्लत नहीं होती थी। व्यवस्था में बदलाव के बाद सीजीएचएस से जुड़े सभी लाभार्थी परेशान हैं।
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डॉक्टरों की लिखी दवा नहीं दे रहे सप्लायर
- इलाहाबाद में ही सीजीएचएस की डिस्पेंसरियों में दवाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दो सप्लायरों को दी गई है। सप्लायर इंडेंट की जा रहीं दवाओं की आपूर्ति भी नहीं कर पा रहे। सप्लायर या तो जेनरिक दवाएं दे रहे हैं या ‘नॉट सप्लाई’ लिखकर मरीजों से बाजार से दवा खरीदने को कहा जा रहा है। जेनरिक दवाएं देने पर सप्लायर का भुगतान रोकने और जुर्माना किए जाने का भी प्रावधान है लेकिन सीजीएचएस के स्थानीय प्रशासन के अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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दवाएं खरीदने के बाद देर से हो रहा भुगतान
- ‘नॉट सप्लाई’ के तहत अगर कोई मरीज बाजार से दवा खरीदता है तो नियमत: सप्लायर को उसका भुगतान मरीज को करना पड़ता है। भुगतान एक सप्ताह में हो जाना चाहिए लेकिन सीजीएचएस में यह व्यवस्था भी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। सप्लाई भुगतान करने में दो से तीन माह समय लगा रहे हैं।
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सप्लायर की दबंगई से मरीज परेशान
- इंडेंट की जा रही दवाओं की जगह सप्लायर जेनरिक दवाएं दे रहे हैं। ‘नॉट सप्लाई’ की स्थिति में दवाओं के लिए भुगतान देर से हो रहा है। अगर कोई मरीज इसका विरोध करता है तो सप्लायर के लोग मरीज से भिड़ जाते हैं और उन्हें डराते-धमकाते हैं।
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‘मरीजों को लाइन में लगकर नंबर न लेना पड़े, इसके लिए सरकार ने ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था की। इसके बावजूद हालात और बदतर हो गए हैं। सीजीएचएस के लाभार्थियों में आधे से ज्यादा पेंशनर्स हैं। उन्हें एक माह की दवा के लेने के लिए सीजीएचएस के कम से कम तीन चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पहली बार स्टोर से सीमित दवाएं मिलती हैं, दूसरी बार इंडेंट की गई दवाओं के लिए सीजीएचएस जाना पड़ता है। तीसरी बार नॉट सप्लाई वाली दवाएं बाजार से खरीदने के बाद उसका भुगतान लेने के लिए जाना पड़ता है। सप्लायर एक बार में भुगतान नहीं करता, सो इसके बाद भी कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसमें सुधार की जरूरत है। सबसे ज्यादा परेशान बुजुर्ग मरीज हैं।’ हरिशंकर तिवारी, सिटिजन ब्रदरहुड के अध्यक्ष

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‘यह बात सही है कि पायलेट प्रोजेक्ट रुकने से दवाओं की किल्लत बढ़ गई थी लेकिन केंद्र सरकार के उपक्रम एचएलएएल से सप्लाई शुरू होने पर स्थिति में सुधार हो रहा है। सप्लायर की शिकायत मिली है। दवाओं की किल्लत के कारण वह मनमानी कर रहा था। सप्लायर को मेमो दिया गया है। जल्द ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। मरीजों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।’ डॉ. एसके चौधरी, अपर निदेशक सीजीएचएस, इलाहाबाद
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