{"_id":"5a512a954f1c1b10788b6e21","slug":"81515268757-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हॉस्टल वॉशआउट से पहले निशाने पर अवैध कब्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हॉस्टल वॉशआउट से पहले निशाने पर अवैध कब्ज
Updated Sun, 07 Jan 2018 01:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हॉस्टल वॉशआउट से पहले निशाने पर अवैध कब्जे
0 हॉस्टलों में अवैध कब्जा करने वाले ही करते हैं सबसे अधिक विरोध
0 नए सत्र से पहले छात्रावासों में अवैध रूप से जमे लोगों को हटाने की तैयारी
इलाहाबाद, 6 जनवरी। दशकों बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में पिछले साल हॉस्टल वॉशआउट की कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई के बाद इविवि प्रशासन ने हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया बदल दी है और अब हर साल हॉस्टलों को पूरी तरह से खाली कराकर नए सिरे से पाठ्यक्रमवार हॉस्टल आवंटन की व्यवस्था लागू की गई है। इस साल भी वॉशआउट की कार्रवाई होनी है, सो इविवि प्रशासन ने अवैध कब्जों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। चार दिन पहले एएन झा छात्रावास में हुई कार्रवाई को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
इविवि प्रशासन ने छह माह पहले हॉस्टल वॉशआउट की कार्रवाइ की थी। इस दौरान सभी हॉस्टल पूरी तरह से खाली करा लिए गए थे और फिर नए सिरे से पाठ्यक्रमवार उन्हें आवंटित किया गया। अभी साल भी नहीं बीता और ज्यादातर हॉस्टलों में फिर से अवैध कब्जा हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पिछले कुछ महीनों में हॉस्टलों में कई बार छापेमारी की गई और हर बार कमरों में अवैध कब्जे की पुष्टि हुई। ताराचंद छात्रावास, एएन झा हॉस्टल समेत कई हॉस्टलों में अवैध कब्जे हटाए गए। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन अवैध कब्जों पर पूरी तरह से रोक नहीं लगा सका। अफसर जानते हैं कि वॉशआउट के दौरान सबसे अधिक विरोध उन्हीं अंत:वासियों की ओर से किया जाता है, जिन्होंने हॉस्टलों में अवैध कब्जे कर रखे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन इस बार कोई गलती नहीं करना चाहता है और उसके निशाने पर अवैध कब्जे हैं। चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे का कहना है कि विरोध केवल अवैध छात्र ही करते हैं। पिछली बार भी ऐसा ही हुआ था। इस बार अभी से अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है ताकि नए सत्र में हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा न आए।
विज्ञापन
0 हॉस्टलों में अवैध कब्जा करने वाले ही करते हैं सबसे अधिक विरोध
0 नए सत्र से पहले छात्रावासों में अवैध रूप से जमे लोगों को हटाने की तैयारी
इलाहाबाद, 6 जनवरी। दशकों बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में पिछले साल हॉस्टल वॉशआउट की कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई के बाद इविवि प्रशासन ने हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया बदल दी है और अब हर साल हॉस्टलों को पूरी तरह से खाली कराकर नए सिरे से पाठ्यक्रमवार हॉस्टल आवंटन की व्यवस्था लागू की गई है। इस साल भी वॉशआउट की कार्रवाई होनी है, सो इविवि प्रशासन ने अवैध कब्जों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। चार दिन पहले एएन झा छात्रावास में हुई कार्रवाई को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
इविवि प्रशासन ने छह माह पहले हॉस्टल वॉशआउट की कार्रवाइ की थी। इस दौरान सभी हॉस्टल पूरी तरह से खाली करा लिए गए थे और फिर नए सिरे से पाठ्यक्रमवार उन्हें आवंटित किया गया। अभी साल भी नहीं बीता और ज्यादातर हॉस्टलों में फिर से अवैध कब्जा हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पिछले कुछ महीनों में हॉस्टलों में कई बार छापेमारी की गई और हर बार कमरों में अवैध कब्जे की पुष्टि हुई। ताराचंद छात्रावास, एएन झा हॉस्टल समेत कई हॉस्टलों में अवैध कब्जे हटाए गए। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन अवैध कब्जों पर पूरी तरह से रोक नहीं लगा सका। अफसर जानते हैं कि वॉशआउट के दौरान सबसे अधिक विरोध उन्हीं अंत:वासियों की ओर से किया जाता है, जिन्होंने हॉस्टलों में अवैध कब्जे कर रखे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन इस बार कोई गलती नहीं करना चाहता है और उसके निशाने पर अवैध कब्जे हैं। चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे का कहना है कि विरोध केवल अवैध छात्र ही करते हैं। पिछली बार भी ऐसा ही हुआ था। इस बार अभी से अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है ताकि नए सत्र में हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा न आए।
विज्ञापन