{"_id":"5a43c44b4f1c1bcd6d8b6778","slug":"71514390603-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धान खरीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धान खरीद
Updated Wed, 27 Dec 2017 09:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नियमों को शिथिल कर शुरू हुई धान की खरीद
0 मंडल में 1.80 लाख मीट्रिक टन की हो चुकी है खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
धान की भी रिकार्ड खरीद की उम्मीद है। लक्ष्य की तकरीबन 40 फीसदी खरीद हो चुकी है। हालांकि, इसके लिए नियमों को कुछ शिथिल करने के साथ अन्य रास्ते भी निकाले गए हैं। मानक पूरा हो सके इसके लिए मिल वाले हाइब्रिड तथा मंसूरी को मिलकर चावल निकाल रहे हैं।
मंडल में 409400 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कुल 282 क्रय केंद्र खोले गए हैं। बुधवार तक एक लाख 80 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया को 41750 टन चावल दिया भी जा चुका है। अफसरों का दावा है कि विगत वर्षों की तुलना में पांच गुना से अधिक धान की खरीद अभी हो चुकी है।
मंसूरी और हाइब्रिड धान मिलाकर पूरा हो रहा मानक
मानक के अनुसार एक क्ंिवटल धान में 67 किग्रा चावल निकलना चाहिए। टूटन आदि को लेकर भी कई मानक हैं, लेकिन हाइब्रिड धान ये मानक पूरा नहीं कर पाते। इनसे 62 से 64 किग्रा चावल ही मिलता है। इसलिए हाइब्रिड धान नहीं खरीदेे जाने की व्यापक शिकायत है। हालांकि, किसानों का दबाव बढ़ने के बाद नया रास्ता निकाला गया है। क्षेत्रीय विधायकों ने भी हस्तक्षेप किया। मंसूरी धान में 70 किग्रा तक चावल मिलता है। ऐसे में दोनों धान मिलाकर मानक पूरा किए जाने का रास्ता निकाला गया। जहां धान अधिक कमजोर है, वहां तौल से अधिक धान भी लिए जाने की बात कही जा रही है। अन्य मानकों की भी अनदेखी की जा रही है। हालांकि, अफसर इसे खुले तौर पर स्वीकार नहीं कर रहे, लेकिन इतना जरूर मान रहे हैं कि सभी मानक पर धान खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
लेकिन फूलपुर में है व्यापारियों की दखल
गंगापार में ज्यादातर किसान हाइब्रिड धान की बोआई करते हैं, ऐसे में मानक पूरा नहीं होने का विवाद वहां ज्यादा है। इसका फायदा व्यापारी भी उठा रहे हैं। किसानों की शिकायत है कि व्यापारियों के माध्यम से धान खरीदी जा रही है। फूलपुर तहसील में कई क्रय केंद्रों के बंद रहने या कर्मचारियों के नहीं होने की शिकायत है। इसकी वजह से किसान चक्कर लगाते रह जा रहे हैं। फूलपुर के कोड़ापुर गांव में तो क्रय केंद्र मौके पर है ही नहीं। इसी तरह से कई केंद्रों पर कोई मिलता ही नहीं। शेखपुर के गुड्डू यादव के पास तकरीबन 100 क्विंटल धान है। वह कई दिनों से क्रय केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन धान की ख्ररीद नहीं हुई। सूडी का पुरा गांव के अमृत लाल की भी यही शिकायत है। मानक का हवाला देकर धान न लिए जाने की शिकायत पूरे जिले में जगह-जगह है।
‘हाइब्रिड धान में कम चावल मिलता है। इसलिए मंसूरी और हाइब्रिड धान को मिलाकर मिलों को दिया जा रहा है। धान खरीद को लेकर कहीं से भी शिकायत नहीं है। बहुत खराब धान है तभी नहीं लिया जा रहा है। मंडल में 180000 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है।’
राम सहाय यादव, संभागीय खाद्य निरीक्षक
विज्ञापन
0 मंडल में 1.80 लाख मीट्रिक टन की हो चुकी है खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
धान की भी रिकार्ड खरीद की उम्मीद है। लक्ष्य की तकरीबन 40 फीसदी खरीद हो चुकी है। हालांकि, इसके लिए नियमों को कुछ शिथिल करने के साथ अन्य रास्ते भी निकाले गए हैं। मानक पूरा हो सके इसके लिए मिल वाले हाइब्रिड तथा मंसूरी को मिलकर चावल निकाल रहे हैं।
मंडल में 409400 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कुल 282 क्रय केंद्र खोले गए हैं। बुधवार तक एक लाख 80 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया को 41750 टन चावल दिया भी जा चुका है। अफसरों का दावा है कि विगत वर्षों की तुलना में पांच गुना से अधिक धान की खरीद अभी हो चुकी है।
विज्ञापन
मंसूरी और हाइब्रिड धान मिलाकर पूरा हो रहा मानक
मानक के अनुसार एक क्ंिवटल धान में 67 किग्रा चावल निकलना चाहिए। टूटन आदि को लेकर भी कई मानक हैं, लेकिन हाइब्रिड धान ये मानक पूरा नहीं कर पाते। इनसे 62 से 64 किग्रा चावल ही मिलता है। इसलिए हाइब्रिड धान नहीं खरीदेे जाने की व्यापक शिकायत है। हालांकि, किसानों का दबाव बढ़ने के बाद नया रास्ता निकाला गया है। क्षेत्रीय विधायकों ने भी हस्तक्षेप किया। मंसूरी धान में 70 किग्रा तक चावल मिलता है। ऐसे में दोनों धान मिलाकर मानक पूरा किए जाने का रास्ता निकाला गया। जहां धान अधिक कमजोर है, वहां तौल से अधिक धान भी लिए जाने की बात कही जा रही है। अन्य मानकों की भी अनदेखी की जा रही है। हालांकि, अफसर इसे खुले तौर पर स्वीकार नहीं कर रहे, लेकिन इतना जरूर मान रहे हैं कि सभी मानक पर धान खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
लेकिन फूलपुर में है व्यापारियों की दखल
गंगापार में ज्यादातर किसान हाइब्रिड धान की बोआई करते हैं, ऐसे में मानक पूरा नहीं होने का विवाद वहां ज्यादा है। इसका फायदा व्यापारी भी उठा रहे हैं। किसानों की शिकायत है कि व्यापारियों के माध्यम से धान खरीदी जा रही है। फूलपुर तहसील में कई क्रय केंद्रों के बंद रहने या कर्मचारियों के नहीं होने की शिकायत है। इसकी वजह से किसान चक्कर लगाते रह जा रहे हैं। फूलपुर के कोड़ापुर गांव में तो क्रय केंद्र मौके पर है ही नहीं। इसी तरह से कई केंद्रों पर कोई मिलता ही नहीं। शेखपुर के गुड्डू यादव के पास तकरीबन 100 क्विंटल धान है। वह कई दिनों से क्रय केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन धान की ख्ररीद नहीं हुई। सूडी का पुरा गांव के अमृत लाल की भी यही शिकायत है। मानक का हवाला देकर धान न लिए जाने की शिकायत पूरे जिले में जगह-जगह है।
‘हाइब्रिड धान में कम चावल मिलता है। इसलिए मंसूरी और हाइब्रिड धान को मिलाकर मिलों को दिया जा रहा है। धान खरीद को लेकर कहीं से भी शिकायत नहीं है। बहुत खराब धान है तभी नहीं लिया जा रहा है। मंडल में 180000 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है।’
राम सहाय यादव, संभागीय खाद्य निरीक्षक