{"_id":"59baa6f34f1c1bb6688b492c","slug":"71505404659-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मातृनवमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मातृनवमी
Updated Thu, 14 Sep 2017 09:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मातृनवमी पर पूजी गईं पुरखिनें, श्राद्ध व तर्पण
0 संगम की रेती पर पिंडदान को देश भर से आए परिजन
इलाहाबाद। आश्विन कृष्ण पक्ष यानी पितरों के प्रति श्रद्धा के पर्व पितृपक्ष के तहत वृहस्पतिवार को मातृनवमी पर पुरखिनों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण किया गया। इसके तहत संगम की रेती पर विधिपूर्वक पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण की प्रक्रिया पूरी की गई। पिंडदान के बाद परिजनों की ओर से तीर्थपुरोहितों को पुरखिनों के निमित्त यथासंभव दान दक्षिणा दी गई। घर वापसी पर ब्राह्मणी को भोजन भी कराया गया।
पुरखिनों के पिंडदान और श्राद्ध के लिए सुबह से ही संगम की रेती पर श्रद्धालुओं का जुटना आरंभ हो गया था। गंगापुत्र घाटिया संघ के सालिग राम पांडेय ने कहा, पुरखिनों के निमित्त पिंडदान और श्राद्ध से उनकी कृपा, उनका आशीष प्राप्त होता है। महालया पर नांदी मातामह श्राद्ध किया जाएगा। द्वादशी श्राद्ध के तहत संन्यासियों, यति, ब्रह्मचारी, वैष्णवों के निमित्त पिंडदान, तर्पण होंगे। चतुर्दशी को ऐसे पितरों का श्राद्ध किया जाएगा जिनकी मृत्यु किसी शस्त्र या दुर्घटना से हुई हो। वहीं सर्वपितृ श्राद्ध पर उनका श्राद्ध किया जाएगा, जिनके निधन की तिथि अज्ञात हो या फिर पूर्व की तिथियों पर उनका श्राद्ध न किया जा सका हो।
विज्ञापन
0 संगम की रेती पर पिंडदान को देश भर से आए परिजन
इलाहाबाद। आश्विन कृष्ण पक्ष यानी पितरों के प्रति श्रद्धा के पर्व पितृपक्ष के तहत वृहस्पतिवार को मातृनवमी पर पुरखिनों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण किया गया। इसके तहत संगम की रेती पर विधिपूर्वक पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण की प्रक्रिया पूरी की गई। पिंडदान के बाद परिजनों की ओर से तीर्थपुरोहितों को पुरखिनों के निमित्त यथासंभव दान दक्षिणा दी गई। घर वापसी पर ब्राह्मणी को भोजन भी कराया गया।
पुरखिनों के पिंडदान और श्राद्ध के लिए सुबह से ही संगम की रेती पर श्रद्धालुओं का जुटना आरंभ हो गया था। गंगापुत्र घाटिया संघ के सालिग राम पांडेय ने कहा, पुरखिनों के निमित्त पिंडदान और श्राद्ध से उनकी कृपा, उनका आशीष प्राप्त होता है। महालया पर नांदी मातामह श्राद्ध किया जाएगा। द्वादशी श्राद्ध के तहत संन्यासियों, यति, ब्रह्मचारी, वैष्णवों के निमित्त पिंडदान, तर्पण होंगे। चतुर्दशी को ऐसे पितरों का श्राद्ध किया जाएगा जिनकी मृत्यु किसी शस्त्र या दुर्घटना से हुई हो। वहीं सर्वपितृ श्राद्ध पर उनका श्राद्ध किया जाएगा, जिनके निधन की तिथि अज्ञात हो या फिर पूर्व की तिथियों पर उनका श्राद्ध न किया जा सका हो।
विज्ञापन