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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   7.80 quintals of ganja rotted in the police station, FIR ordered against policemen

Court : थाने में सड़ गया 7.80 क्विंटल गांजा, चारों आरोपी बरी, कोर्ट ने पुलिसकर्मियों पर एफआईआर का दिया आदेश

Fri, 09 Feb 2024 12:19 PM IST
विनोद सिंह सुनील यादव, प्रयागराज
सुनील यादव, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 09 Feb 2024 12:19 PM IST
सार

दस साल पहले चार तस्करों को गिरफ्तार कर पुलिस ने 7.80 कुंतल गांजा बरामद करने का दावा किया था। कोर्ट में सबूत पेश करते समय पुलिस न तो गांजा दिखा सकी न ही जिस वाहन पर गांजा ले जाया जा रहा था वह वाहन ही पेश कर सकी। कोर्ट ने सख्त रुख अख्तिया करते हुए पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही चारों आरोपियों को बरी कर दिया। 

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7.80 quintals of ganja rotted in the police station, FIR ordered against policemen
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

क्राइम ब्रांच और फूलपुर पुलिस ने 10 साल पहले अंतरराज्यीय चार तस्करों से 7.80 क्विंटल गांजा बरामद दिखाकर अपनी पीठ तो खूब थपथपाई, लेकिन कोर्ट में यह कहानी औंधे मुंह गिरी। गांजा थाने में ही सड़ गया। चारों आरोपी बरी हो गए। सीओ समेत 11 गवाहों में से सिर्फ एक की गवाही हुई। पुलिस वह ट्रक, कार और स्कूटी भी नहीं दिखा पाई, जिससे तस्करी का दावा था। कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

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फूलपुर थाने के तत्कालीन प्रभारी कुशल पाल यादव और क्राइम ब्रांच के प्रभारी ओम शंकर शुक्ला की टीम ने 20 अप्रैल 2014 को सरैया तिराहे से मिनी ट्रक और ऑल्टो कार से 7.80 क्विंटल गांजा बरामदगी का दावा किया था। बहरिया मुबारकपुर निवासी अशोक जायसवाल व दीपक जायसवाल, मुट्ठीगंज के रमाकांत विश्वकर्मा और तिलाई (मिर्जापुर) के तेजधर मिश्रा की गिरफ्तारी हुई थी। फरार दो आरोपियों की पहचान कांस्टेबल गुलाम शबीर ने विपिन जायसवाल और त्रिशूल चंद्र के रूप में की थी।

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सीओ अलका धर्मराज के समक्ष आरोपियों की तलाशी ली गई। दरोगा गजानंद चौबे ने चारों आरोपियों के खिलाफ नार्कोटिक्स एक्ट की धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया। 10 साल चले मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष तत्कालीन सीओ, क्राइम ब्रांच के प्रभारी, विवेचक समेत 11 गवाहों में से सिर्फ मुकदमा लिखाने वाले कुशल पाल यादव को ही पेश कर सका। बतौर सुबूत फर्द बरामदगी पेश की गई।

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एनडीपीएस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश भारत सिंह यादव की कोर्ट ने पुलिस आयुक्त प्रयागराज को पत्र लिख कर सुबूत पेश करने को कहा, लेकिन पांच महीने में कोई जवाब नहीं मिला। इसके पहले कोर्ट को बताया गया कि बरामद गांजा मालखाने में रखरखाव के समुचित इंतजाम न होने के कारण सड़कर नष्ट हो गया है। कोर्ट ने सुबूतों-गवाहों के अभाव में चार आरोपियों को बरी कर दिया। दो फरार हैं। कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने कहा...

मौजूदा हालात में इस संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता कि प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस मामले में पुलिस द्वारा अभियुक्तों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। यह हैरानी की बात है कि बरामद 7.80 क्विंटल गांजा में से एक ग्राम भी कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका।

 

एक गवाही उसमें भी छेद ही छेद


अभियोजन की ओर से पेश एकमात्र गवाह प्रभारी निरीक्षक कुशल पाल यादव की गवाही में भी ढेरों छेद थे। गवाही में बताया कि गांजे की तौल कांस्टेबल जितेंद्र कुमार द्वारा लाई गई तराजू से की गई थी। लेकिन, जिरह में वह यह नहीं बता सके कि तराजू आई कहां से थी, वह तराजू अब कहां है। वारदात के दौरान बरामद मिनी ट्रक, ऑल्टो कार और स्कूटी किसकी थी और ये वाहन कहां हैं, इसका भी वह कोई जवाब नहीं दे सके।

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