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विधायक चंदेल को आजीवन कारावास

Fri, 19 Apr 2019 08:35 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 19 Apr 2019 08:35 PM IST
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विधायक चंदेल को आजीवन कारावास
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सामूहिक हत्याकांड में बरी विधायक अशोक चंदेल को उम्रकैद
0 हमीरपुर में 22 साल पहले भाजपा नेता राजीव शुक्ल के दो भाइयों सहित पांच लोगों की गोली मारकर की गई थी हत्या
0 अपर जनपद व सत्र न्यायालय ने चंदेल सहित सभी 10 आरोपियों को कर दिया था बरी
0 सेशन कोर्ट के फैसले के विरुद्ध दाखिल राज्य सरकार और वादी की अपील आंशिक रूप से स्वीकार
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हमीरपुर में 22 साल पहले राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में हुए पांच लोगों के सामूहिक हत्याकांड में निचली अदालत से बरी भाजपा विधायक अशोक सिंह चंदेल समेत सभी 10 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इन सभी आरोपियों को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हमीरपुर ने दोषमुक्त कर दिया था।
दोषमुक्ति के आदेश को प्रदेश सरकार और वादी मुकदमा भाजपा नेता राजीव शुक्ला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। वर्ष 2002 में दाखिल अपील पर शुक्रवार को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति दिनेश सिंह की खंडपीठ ने अपीलों को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए सभी सजा का आदेश दिया। राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता कृष्ण पहल ने बहस की। कोर्ट ने सभी अभियुक्तों को सीजेएम हमीरपुर की अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया है।
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मामले के तथ्यों के अनुसार 26 जनवरी 1997 की शाम हमीरपुर के सुभाषनगर मोहल्ले में भाजपा नेता राजीव शुक्ला के भाइयों राजेश कुमार शुक्ल और राकेश कुमार शुक्ल सहित अंबुज उर्फ गुड्डा, श्रीकांत पांडेय व वेद प्रकाश की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के चश्मदीद राजीव शुक्ला ने विधायक अशोक सिंह चंदेल व अन्य को नामजद करते हुए थाने में हत्या व हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना के बाद विधायक अशोक सिंह चंदेल के अलावा रघुवीर सिंह, डब्बू सिंह, उत्तम सिंह, प्रदीप सिंह, नसीम, श्याम सिंह, साहब सिंह, झण्डू और भान सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 302,149, 307,149, 404 व 379 (, बलवा, हत्या, हत्या का प्रयास चोरी आदि) और 25/30 शस्त्र अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की। विचारण के बाद अपर जिला व सत्र न्यायाधीश ने 17 जुलाई 2002 को इस बहुचर्चित सामूहिक हत्याकांड के सभी 10 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। सेशन कोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज कराने में विलंब के साथ ही घटना के चश्मदीद गवाह राजीव शुक्ला के बयान व चुटहिल रविकांत पांडेय की घटना के वक्त उपस्थिति तथा फोरेंसिक रिपोर्ट को संदेहास्पद माना था। हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के फैसले को गलत मानते हुए सभी आरोपियों को हत्या के अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही आर्म्स एक्ट के आरोप से बरी कर दिया।
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