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Prayagraj News: बारा में लेखपालों की हड़ताल से 5500 छात्रवृत्ति फार्म अटके
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क्षेत्र में लेखपालों का पंद्रह दिन से चल रहा कार्य बहिष्कार बृहस्पतिवार को और तेज हो गया है। इससे हजारों छात्र, किसान और अभिभावक परेशान हैं। लगभग 5500 छात्रवृत्ति फार्म लेखपालों की आख्या के बिना अटके पड़े हैं।
लेखपाल संघ बारा अपनी विभिन्न मांगों जैसे 2800 ग्रेड पे पर पदोन्नति और भत्ते को लेकर कार्य बहिष्कार कर रहा है। बृहस्पतिवार से लेखपालों ने अपने मूल नियुक्त गांवों का ऑनलाइन कार्य भी बंद कर दिया है। इससे पहले अतिरिक्त प्रभार वाले गांवों का काम बंद था। शासन ने छात्रवृत्ति फार्म भरने की अंतिम तिथि घोषित कर दी है।
इन फार्मों के लिए आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र पर लेखपालों की आख्या अनिवार्य होती है। विभागीय जानकारी के अनुसार, 2000 आय, 2000 जाति और 1500 निवास के फार्म बिना आख्या के जमा हैं। कुल मिलाकर लगभग 5500 फार्म लंबित हैं। इसके साथ ही वरासत और ईडब्ल्यूएस जैसे अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी ठप हो गए हैं।
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समस्या के समाधान के प्रयास
लेखपाल संघ बारा के अध्यक्ष कैलाश किशोर मिश्रा ने बताया कि मूल नियुक्त गांवों का कार्य बृहस्पतिवार से ऑनलाइन बंद कर दिया गया है। एसडीएम बारा अर्पित कुमार ने कहा कि यह समस्या जनपद स्तर पर है। उन्होंने बताया कि बारा में लेखपालों से वार्ता कर रास्ता निकालने का प्रयास किया जाएगा। इस कार्य बहिष्कार से किसान, अधिवक्ता, छात्र-छात्राएं और अभिभावक सभी प्रभावित हो रहे हैं।
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लेखपाल संघ बारा अपनी विभिन्न मांगों जैसे 2800 ग्रेड पे पर पदोन्नति और भत्ते को लेकर कार्य बहिष्कार कर रहा है। बृहस्पतिवार से लेखपालों ने अपने मूल नियुक्त गांवों का ऑनलाइन कार्य भी बंद कर दिया है। इससे पहले अतिरिक्त प्रभार वाले गांवों का काम बंद था। शासन ने छात्रवृत्ति फार्म भरने की अंतिम तिथि घोषित कर दी है।
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इन फार्मों के लिए आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र पर लेखपालों की आख्या अनिवार्य होती है। विभागीय जानकारी के अनुसार, 2000 आय, 2000 जाति और 1500 निवास के फार्म बिना आख्या के जमा हैं। कुल मिलाकर लगभग 5500 फार्म लंबित हैं। इसके साथ ही वरासत और ईडब्ल्यूएस जैसे अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी ठप हो गए हैं।
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समस्या के समाधान के प्रयास
लेखपाल संघ बारा के अध्यक्ष कैलाश किशोर मिश्रा ने बताया कि मूल नियुक्त गांवों का कार्य बृहस्पतिवार से ऑनलाइन बंद कर दिया गया है। एसडीएम बारा अर्पित कुमार ने कहा कि यह समस्या जनपद स्तर पर है। उन्होंने बताया कि बारा में लेखपालों से वार्ता कर रास्ता निकालने का प्रयास किया जाएगा। इस कार्य बहिष्कार से किसान, अधिवक्ता, छात्र-छात्राएं और अभिभावक सभी प्रभावित हो रहे हैं।