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Prayagraj News: कसारी मसारी में 54973 वर्गमीटर भूमि फिर राज्य सरकार के नाम दर्ज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2026 02:44 AM IST
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54,973 square meters of land in Kasari Masari once again recorded in the name of the state government.
जिलाधिकारी के आदेश से मौजा कसारी मसारी व ऐनुद्दीनपुर में 54973.77 वर्गमीटर भूमि पुनः राज्य सरकार के नाम दर्ज की गई है। यह भूमि नगर भूमि (अधिकतम सीमा एवं विनियमन) अधिनियम, 1976 के तहत राज्य सरकार में निहित थी।
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भूधारक अताउल्ला ने तथ्यों को छिपाकर इस भूमि को अपने पक्ष में अवमुक्त करा लिया था। यह भूमि प्रयागराज विकास प्राधिकरण की अभिरक्षा में है। इस पर कालिंदीपुरम आवासीय योजना के तहत भूखंड, सड़क और पार्क निर्मित हैं। जिलाधिकारी ने चार जुलाई 2026 को एक आदेश पारित कर पूर्व में जारी विधि विरुद्ध प्रशासनिक आदेश को निरस्त कर दिया।
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आरोप है कि अताउल्ला एक माफिया है और उसके करीबी रिश्तेदारों ने शत्रु संपत्ति व ससुर खदेरी नदी को पाटकर अवैध प्लॉटिंग की थी। इस पर एसडीएम सदर के आदेश पर लेखपाल ने अफजल, जकी अहमद, राशिद उर्फ नीलू, मोहम्मद असलम व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी और इनका जुड़ाव माफिया अतीक अहमद से भी रहा है।यह है मामला
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यह मामला वाद संख्या 3222/1976 सरकार बनाम अताउल्ला से संबंधित है। इसमें मौजा कसारी मसारी व एनुद्दीनपुर स्थित भूखंडों से कुल 54973.77 वर्गमीटर भूमि राज्य सरकार में निहित हुई थी। इस कार्रवाई के विरुद्ध अताउल्ला ने जनपद न्यायालय, इलाहाबाद में अपील की थी। जनपद न्यायालय ने 22 सितंबर 1998 को अपील निरस्त कर दी थी, जो राज्य सरकार के पक्ष में थी।
स्थलीय निरीक्षण किए बिना अताउल्ला के नाम कर दी गई थी जमीन
भूधारक अताउल्ला ने दो सितंबर 2016 को तथ्यों को छिपाकर प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर तत्कालीन सक्षम प्राधिकारी, नगर भूमि सीमारोपण इलाहाबाद ने बिना स्थलीय निरीक्षण और सरकार का पक्ष सुने, नौ सितंबर 2016 को प्रशासनिक आदेश पारित कर भूमि अताउल्ला के पक्ष में अवमुक्त कर दी थी। प्रयागराज विकास प्राधिकरण के सचिव के पत्र के बाद जिलाधिकारी ने चार जून 2026 को अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की। जांच समिति की आख्या और अन्य तथ्यों के आधार पर जिलाधिकारी ने अवैध आदेश को निरस्त कर दिया।


होगी जांच, राजस्व रिकॉर्ड में कैसे हो गया बदलाव
एडीएम नजूल संजय पांडेय का कहना है कि इसकी जांच कराई जाएगी कि राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जमीन को सीलिंग से मुक्त करते हुए उस पर किसी व्यक्ति का नाम दर्ज हो गया। इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित अफसरों और कर्मचारियों की क्या भूमिका रही। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।


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