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वार्डेन नियुक्ति के मामले में स्थापना रजिस्टर तलब
Updated Tue, 30 Oct 2018 09:57 PM IST
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वार्डेन नियुक्ति के मामले में स्थापना रजिस्टर तलब
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने फतेहगढ़ जेल में वार्डेेन की नियुक्ति के मामले में दो जून 2007 के स्थापना रजिस्टर के साथ सक्षम प्राधिकारी को पेश होने का निर्देश दिया है। वार्डेन की नियुक्ति को फर्जी बताते हुए रद्द कर दिया गया था। मामला सुप्रीमकोर्ट तक गया। सुप्रीमकोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी तो हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है। न्यायमूर्ति एपी साही और न्यायमूर्ति हर्ष कुमार की खंडपीठ ने याचिका सुनवाई हेतु स्वीकार करते हुए 12 नवंबर को रजिस्टर पेश करने का आदेश दिया।
फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में 1986 में 16 वार्डेन की नियुक्ति की गई थी। याची दुर्विजय सिंह 2002 में गोरखपुर जेल में नियुक्त थे। उन्हें जेल अधीक्षक के कमरेे में घुसकर मारपीट करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया। मारपीट में याची को भी चोट आई और उन्हें लकवा मार गया। कोर्ट ने याची को बहाल करते हुए उनसे हल्के कार्य लेने का निर्देश दिया, मगर इस आदेश का पालन करने के बजाए उनकी नियुक्ति को फर्जी करार देते हुए रद्द कर दिया गया। याची इसके खिलाफ सुप्रीमकोर्ट तक गया, मगर वहां से एसएलपी खारिज हो गई। इसके बाद उसने पुनर्विचार अर्जी दाखिल की है, जिस पर कोर्ट अब 12 नवंबर को सुनवाई करेगी।
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इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने फतेहगढ़ जेल में वार्डेेन की नियुक्ति के मामले में दो जून 2007 के स्थापना रजिस्टर के साथ सक्षम प्राधिकारी को पेश होने का निर्देश दिया है। वार्डेन की नियुक्ति को फर्जी बताते हुए रद्द कर दिया गया था। मामला सुप्रीमकोर्ट तक गया। सुप्रीमकोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी तो हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है। न्यायमूर्ति एपी साही और न्यायमूर्ति हर्ष कुमार की खंडपीठ ने याचिका सुनवाई हेतु स्वीकार करते हुए 12 नवंबर को रजिस्टर पेश करने का आदेश दिया।
फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में 1986 में 16 वार्डेन की नियुक्ति की गई थी। याची दुर्विजय सिंह 2002 में गोरखपुर जेल में नियुक्त थे। उन्हें जेल अधीक्षक के कमरेे में घुसकर मारपीट करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया। मारपीट में याची को भी चोट आई और उन्हें लकवा मार गया। कोर्ट ने याची को बहाल करते हुए उनसे हल्के कार्य लेने का निर्देश दिया, मगर इस आदेश का पालन करने के बजाए उनकी नियुक्ति को फर्जी करार देते हुए रद्द कर दिया गया। याची इसके खिलाफ सुप्रीमकोर्ट तक गया, मगर वहां से एसएलपी खारिज हो गई। इसके बाद उसने पुनर्विचार अर्जी दाखिल की है, जिस पर कोर्ट अब 12 नवंबर को सुनवाई करेगी।
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