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स्मारक घोटाले की जांच जल्दी पूरी करने का निर्देश
Updated Mon, 01 Oct 2018 08:00 PM IST
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स्मारक घोटाले की जांच जल्दी पूरी करने का निर्देश
0 सीबीआई जांच की मांग हाईकोर्ट ने खारिज की
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने बसपा सरकार के शासनकाल में हुए 14 सौ करोड़ रुपये के स्मारक घोटाले की जांच शीघ्र पूरी करने का विजलेंस को निर्देश दिया है। मगर कोर्ट ने इस मामले में दाखिल जनहित याचिका को व्यक्तिगत हित में दाखिल की गई याचिका मानते हुए खारिज कर दिया है।
मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने शशिकांत की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि याची का भाई संतोष कुमार पांडेय भी इस घोटाले में लिप्त है और आरोपी है। उसे बचाने के लिए सीबीआई जांच की मांग में जनहित याचिका दाखिल की गई है। घोटाले में उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम के कई अफसर, कैबिनेट मंत्री, और ठेकेदार आरोपी हैं। मामले की जांच लोकायुक्त ने की थी और करीब 14 सौ करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा करते हुए अग्रिम कार्रवाई की स्वीकृति की थी।
याची का कहना था कि लोकायुक्त की स्वीकृति के करीब चार साल बाद जनवरी 2017 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जांच विजलेंस कर रही है मगर अभी तक एक भी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ है। मांग की गई कि जांच एक नियत समय में पूरी की जानी चाहिए या सीबीआई से कराई जाए। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता सुधांशु श्रीवास्तव का कहना था कि निर्माण निगम से कुछ दस्तावेज मांगे गए हैं। उनके न मिलने के कारण जांच में विलंब हो रहा है। दस्तावेजों के मिलते ही जांच आगे बढ़ेगी। कोर्ट ने विजलेंस से कहा है कि जांच यथाशीघ्र पूरी कर ली जाए।
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स्मारक घोटाले की जांच जल्दी पूरी करने का निर्देश
0 सीबीआई जांच की मांग हाईकोर्ट ने खारिज की
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने बसपा सरकार के शासनकाल में हुए 14 सौ करोड़ रुपये के स्मारक घोटाले की जांच शीघ्र पूरी करने का विजलेंस को निर्देश दिया है। मगर कोर्ट ने इस मामले में दाखिल जनहित याचिका को व्यक्तिगत हित में दाखिल की गई याचिका मानते हुए खारिज कर दिया है।
मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने शशिकांत की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि याची का भाई संतोष कुमार पांडेय भी इस घोटाले में लिप्त है और आरोपी है। उसे बचाने के लिए सीबीआई जांच की मांग में जनहित याचिका दाखिल की गई है। घोटाले में उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम के कई अफसर, कैबिनेट मंत्री, और ठेकेदार आरोपी हैं। मामले की जांच लोकायुक्त ने की थी और करीब 14 सौ करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा करते हुए अग्रिम कार्रवाई की स्वीकृति की थी।
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याची का कहना था कि लोकायुक्त की स्वीकृति के करीब चार साल बाद जनवरी 2017 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जांच विजलेंस कर रही है मगर अभी तक एक भी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ है। मांग की गई कि जांच एक नियत समय में पूरी की जानी चाहिए या सीबीआई से कराई जाए। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता सुधांशु श्रीवास्तव का कहना था कि निर्माण निगम से कुछ दस्तावेज मांगे गए हैं। उनके न मिलने के कारण जांच में विलंब हो रहा है। दस्तावेजों के मिलते ही जांच आगे बढ़ेगी। कोर्ट ने विजलेंस से कहा है कि जांच यथाशीघ्र पूरी कर ली जाए।
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