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इविवि के हॉस्टलों पर कमेटी ने उठाए सवाल

Sat, 26 May 2018 01:44 AM IST
Updated Sat, 26 May 2018 01:44 AM IST
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इविवि के हॉस्टलों पर कमेटी ने उठाए सवाल

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हॉस्टलों की बदहाली पर कमेटी ने उठाए सवाल
0 वॉशआउट के बाद भी हॉस्टलों से नहीं हटा अवैध कब्जा
0 मेडिकल सुविधाएं नदारद, एंबलेंस, व्हील चेयर तक नहीं
इलाहाबाद, 25 मई। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की पांच सदस्यीय कमेटी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के हॉस्टलों की बदहाली पर भी सवाल उठाए हैं। कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि हॉस्टल में छात्रों से फीस लिए जाने के बावजूद बिजली का बिल जमा नहीं किया जाता है और हॉस्टल की बिजली काट दी जाती है जबकि फीस में बिजली के मद में भी छात्रों से वसूली की जाती है।
कमेटी यहां पिछले साल नवंबर में आई थी और इससे पहले हॉस्टल वॉश आउट की कार्रवाई हो चुकी थी। इसके बावजूद कमेटी ने जांच में पाया कि हॉस्टल के लिए न तो कोई प्राथमिकता सूची बनाई गई है और न ही कोई रोस्टर निर्धारित किया गया है। हॉस्टलों में छात्रों से पूरी फीस ली जाती है लेकिन सुविधाएं नदारद हैं। ट्रस्ट के हॉस्टलों की हालत इतनी बदतर है कि वहां रहने लायक स्थिति नहीं है। हॉस्टलों में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं, एंबुलेंस नहीं हैं और व्हील चेयर भी नहीं हैं। हॉस्टलों की यह दशा साबित करती है कि वहां प्रबंधन और प्रशासनिक मामलों में पूरा सिस्टम फेल हो चुका है। कमेटी ने सिफारिश की है कि इसमें सुधार के लिए विश्वविद्यालय को नए हॉस्टलों के निर्माण कराने की जरूरत है।
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सिर्फ यही नहीं, कमेटी ने विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में अवैध कब्जे का मुद्दा भी उठाया है। कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि हॉस्टल के कमरों में अवैध कब्जे की गंभीर समस्या है। इससे निपटने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टलों को खाली भी कराया लेकिन यह सुनिश्चित नहीं किया कि हॉस्टलों में यह समस्या दोबारा उत्पन्न न होने पाए। विश्वविद्यालय को यह देखने की जरूरत है कि हॉस्टलों के कमरों में अवैध कब्जा रोका जाए और वहां से अवैध गतिविधियों का संचालन न हो।
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दिखावे की वाईफाई सुविधा
- कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के गिने-चुने हिस्से में ही वाईफाई सुविधा है। जहां यह सुविधा है, वहां इंटरनेट सेवा ठीक न होने के कारण इसका उचित लाभ नहीं मिल पा रहा।
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क्लास रूम में नियमित सफाई नहीं
- रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि क्लास रूम में नियमित रूप से सफाई नहीं होती है। क्लास में रखीं कुर्सियों का आकार काफी खराब है। विश्वविद्यालय में टॉयलेट तो हैं लेकिन उनका आकार सही नहीं है। महिला टॉयलेट की हालत और अधिक बदतर है। कुल मिलाकर पूरा माहौल अप्रिय और अस्वास्थ्यकर है।
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रेलवे रिजर्वेशन काउंटर की जरूरत
- कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि तमाम विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को रेलवे रिजर्वेशन काउंटर की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। इविवि में भी यह सुविधा होनी चाहिए। हालांकि इविवि में पहले यह सुविधा थी लेकिन बाद में रेलवे रिजर्वेशन काउंटर बंद कर दिए गए।
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प्राचार्यों के वित्तीय अधिकार बढ़ाने पर जोर
- कमेटी का मामना है कि तमाम वित्तीय कार्यों के लिए संघटक महाविद्यालयों के प्राचार्यों को कुलपति या वित्त अधिकारी के दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कमेटी ने प्राचार्यो के वित्तीय अधिकार बढ़ाए जाने पर जोर दिया है।

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कुलपति के समर्थन में आया ऑक्टा
- कुलपति और विश्वविद्यालय को लेकर यूजीसी की कमेटी ने जो रिपोर्ट दी है, ऑक्टा उससे संतुष्ट नहीं है। ऑक्टा के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को बैठक कर रिपोर्ट को एक पक्षीय बताया। पदाधिकारियों ने कहा कि कुलपति प्रो. आरएल हांगलू के कार्यकाल में हुए कार्य सराहनीय हैं। कुलपति ने अपनी तैनाती के ढाई वर्षों में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, जिनमें वाईफाई सुविधा, कॉलेजों में शिक्षकों की प्रोन्नति, कॉलेजों में शिक्षक भर्ती, लाइब्रेरी में सुविधा में इजाफा, एकेडमिक कैलेंडर बनाए जाने, परास्नातक में सीबीसीएस लागू किए जाने से कार्य शामिल हैं। बैठक में ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. सुनील कांत मिश्र, महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह, उपाध्यक्ष डॉ. रेखा रानी, डॉ. एसपी सिंह, सुंयक्त सचिव डॉ. राजेश कुमार गर्ग, कोषाध्यक्ष डॉ. केपी श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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