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गोरखपुर दंगे की केस डायरी कोर्ट में तलब
Updated Fri, 01 Sep 2017 07:52 PM IST
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गोरखपुर दंगे की केस डायरी कोर्ट में तलब
0 हाईकोर्ट ने योगी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति से इंकार करने संबंधी दस्तावेज भी मांगा
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। 2007 के गोरखपुर दंगे की जांच सीबीआई से कराने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी मुकदमा चलाने की मांग में चल रही सुनवाई में शुक्रवार को नया मोड़ आ गया। हाईकोर्ट ने दंगे से संबंधित रिकार्ड तलब कर लिए हैं। कोर्ट ने महाधिवक्ता से कहा है कि दंगे की केस डायरी और अभियोजन स्वीकृति देने से मना करने संबंधी रिकार्ड 11 सितंबर को कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएं। परवेज परवाज और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति कृष्णमुरारी और न्यायमूर्ति एसी शर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
पिछले तीन दिनों से चल रही सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ने अभियोजन स्वीकृति देने से इंकार करने संबंधी आदेश पर सवाल उठाए हैं। कहा है कि यह आदेश कोर्ट के दबाव पर बैक डेट से किया गया है। गृह सचिव को ऐसा आदेश करने का अधिकार नहीं है इसलिए अभियोजन स्वीकृति से इंकार करने संबंधी आदेश ही अवैधानिक है।
प्रदेश सरकार को अभी अपना पक्ष रखना है। इसके लिए महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह स्वयं कोर्ट में मौजूद रहे। हालांकि कोर्ट के दस्तावेज मांगे जाने के बाद अब प्रकरण में एक नया मोड़ आ गया है। शासन के दस्तावेजों की वैधानिकता पर कोर्ट दस्तावेजों को देखने के बाद नए सिरे से विचार करेगी। याची का वकील एसएफए नकवी का कहना है कि जिसकी सरकार है उसी के खिलाफ निष्पक्ष जांच की उम्मीद यूपी पुलिस से नहीं है इसलिए मामले को किसी अन्य एजेंसी को जांच के लिए सौंपा जाए। याचिका पर 11 सितंबर को सुनवाई होगी।
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0 हाईकोर्ट ने योगी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति से इंकार करने संबंधी दस्तावेज भी मांगा
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। 2007 के गोरखपुर दंगे की जांच सीबीआई से कराने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी मुकदमा चलाने की मांग में चल रही सुनवाई में शुक्रवार को नया मोड़ आ गया। हाईकोर्ट ने दंगे से संबंधित रिकार्ड तलब कर लिए हैं। कोर्ट ने महाधिवक्ता से कहा है कि दंगे की केस डायरी और अभियोजन स्वीकृति देने से मना करने संबंधी रिकार्ड 11 सितंबर को कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएं। परवेज परवाज और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति कृष्णमुरारी और न्यायमूर्ति एसी शर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
पिछले तीन दिनों से चल रही सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ने अभियोजन स्वीकृति देने से इंकार करने संबंधी आदेश पर सवाल उठाए हैं। कहा है कि यह आदेश कोर्ट के दबाव पर बैक डेट से किया गया है। गृह सचिव को ऐसा आदेश करने का अधिकार नहीं है इसलिए अभियोजन स्वीकृति से इंकार करने संबंधी आदेश ही अवैधानिक है।
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प्रदेश सरकार को अभी अपना पक्ष रखना है। इसके लिए महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह स्वयं कोर्ट में मौजूद रहे। हालांकि कोर्ट के दस्तावेज मांगे जाने के बाद अब प्रकरण में एक नया मोड़ आ गया है। शासन के दस्तावेजों की वैधानिकता पर कोर्ट दस्तावेजों को देखने के बाद नए सिरे से विचार करेगी। याची का वकील एसएफए नकवी का कहना है कि जिसकी सरकार है उसी के खिलाफ निष्पक्ष जांच की उम्मीद यूपी पुलिस से नहीं है इसलिए मामले को किसी अन्य एजेंसी को जांच के लिए सौंपा जाए। याचिका पर 11 सितंबर को सुनवाई होगी।
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