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इविवि में छात्रसंघ चुनाव रोकने की मांग खारिज
Updated Sat, 08 Jul 2017 08:59 PM IST
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इविवि में छात्रसंघ चुनाव रोकने की मांग खारिज
- जनहित याचिका में शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा बढ़ाने, शिकायत प्रकोष्ठ गठित करने की थी मांग
इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव और परिसर में राजनीतिक गतिविधि रोकने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका में हस्तक्षेप से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। याचिका में विश्वविद्यालय के छात्र, अध्यापकों और गैरशैक्षणिक कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा देने की भी मांग की गई थी। याची ने विश्वविद्यालय के विधि संकाय में बने ऑडिटोरियम हॉल को भी फिर से बनाने का आदेश देने की मांग की थी। देवेश सक्सेना और अन्य की याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की पीठ ने सुनवाई की।
पीठ का कहना था कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ का चुनाव सुप्रीमकोर्ट के 22 सितंबर 2006 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के आदेश केतहत छात्र संघ चुनाव का नया संविधान और नियमावली तैयार की है, जिसे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी यूनियन (कोड ऑफ इलेक्शन) 2012 के नाम से जाना जाता है। चुनाव इसी नियमावली के तहत कराया जाता है। याचिका में चुनाव नियमावली को चुनौती नहीं दी गई है। कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय स्वयं अपने छात्रों, कर्मचारियों और संपत्ति की रक्षा करने में सक्षम है, इसलिए अलग से ऐसा आदेश देने की आवश्यकता नहीं है। ऑडिटोरियम की मरम्मत कराना विश्वविद्यालय का दायित्व है, उसने ऐसा करने से मना भी नहीं किया है, इसी प्रकार से शिकायत प्रकोष्ठ पहले से गठित है। इस स्थिति में याचिका में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है।
याची का कहना था कि वह विश्वविद्यालय का छात्र रहा है। हाल के दिनों में विश्वविद्यालय परिसर में फैली अराजकता के कारण वहां चुनाव और राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाना आवश्यक है।
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- जनहित याचिका में शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा बढ़ाने, शिकायत प्रकोष्ठ गठित करने की थी मांग
इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव और परिसर में राजनीतिक गतिविधि रोकने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका में हस्तक्षेप से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। याचिका में विश्वविद्यालय के छात्र, अध्यापकों और गैरशैक्षणिक कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा देने की भी मांग की गई थी। याची ने विश्वविद्यालय के विधि संकाय में बने ऑडिटोरियम हॉल को भी फिर से बनाने का आदेश देने की मांग की थी। देवेश सक्सेना और अन्य की याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की पीठ ने सुनवाई की।
पीठ का कहना था कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ का चुनाव सुप्रीमकोर्ट के 22 सितंबर 2006 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के आदेश केतहत छात्र संघ चुनाव का नया संविधान और नियमावली तैयार की है, जिसे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी यूनियन (कोड ऑफ इलेक्शन) 2012 के नाम से जाना जाता है। चुनाव इसी नियमावली के तहत कराया जाता है। याचिका में चुनाव नियमावली को चुनौती नहीं दी गई है। कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय स्वयं अपने छात्रों, कर्मचारियों और संपत्ति की रक्षा करने में सक्षम है, इसलिए अलग से ऐसा आदेश देने की आवश्यकता नहीं है। ऑडिटोरियम की मरम्मत कराना विश्वविद्यालय का दायित्व है, उसने ऐसा करने से मना भी नहीं किया है, इसी प्रकार से शिकायत प्रकोष्ठ पहले से गठित है। इस स्थिति में याचिका में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है।
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याची का कहना था कि वह विश्वविद्यालय का छात्र रहा है। हाल के दिनों में विश्वविद्यालय परिसर में फैली अराजकता के कारण वहां चुनाव और राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाना आवश्यक है।
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