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प्रतियोगियों के निशने पर आयोग अध्यक्ष
Updated Sat, 24 Jun 2017 08:03 PM IST
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प्रतियोगियों के निशाने पर अब आयोग अध्यक्ष
पूर्व में प्राचार्य पद पर हुई नियुक्ति और बायोडाटा पर उठाए गए सवाल
अध्यक्ष ने कहा, उन पर आरोप लगाने वाले शासन पर उठा रहे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं में धांधली का आरोप लगाकर सीबीआई जांच की मांग कर रहे प्रतियोगी छात्रों के निशाने पर अब आयोग के अध्यक्ष हैं। प्रतियोगियों ने आयोग अध्यक्ष की पूर्व में हुई प्राचार्य पद पर नियुक्ति और बायोडाटा पर सवाल उठाते हुए शिकायत सीएम को भेजी है। हालांकि आयोग अध्यक्ष के खिलाफ प्रतियोगियों के पास कोई साक्ष्य नहीं है। आयोग अध्यक्ष का कहना है कि उनकी नियुक्ति सरकार की संस्तुति पर राज्यपाल ने की थी। जो लोग उन पर आरोप लगा रहे हैं, वह शासन पर भी सवाल उठा रहे हैं।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय ने सीएम को भेजी अपनी शिकायत में आयोग के मौजूदा अध्यक्ष डॉ. अनुरुद्ध यादव की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि विज्ञापन संख्या 23 से 39 तक प्राचार्यों की सभी नियुक्तियां रद्द हैं तो विज्ञापन संख्या 25 के तहत हायर एजुकेशन कमीशन की ओर से प्राचार्य पद पर डॉ. अनुरुद्ध यादव की नियुक्ति कैसे वैध हो सकती है। यह आरोप भी लगाया है कि उन्होंने नौकरी में रहते हुए स्नातक और पीएचडी की डिग्री हासिल की। साथ ही उनके बायोडाटा में शैक्षणिक वर्षों और सेवारत वर्षों का भी कोई उल्लेख नहीं है। इसके अलावा एक सदस्य पर आरोप लगाया है कि उन पर आपराधिक केस दर्ज है लेकिन उन्होंने अपने बायोडाटा में इसका कोई जिक्र नहीं किया है। इसके अलावा एक अन्य सदस्य पर भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
इस बारे में आयोग के अध्यक्ष अनुरुद्ध यादव का कहना है कि सिर्फ विज्ञापन संख्या 39 के तहत प्राचार्य पद की नियुक्ति रद्द हुई थी। उनकी नियुक्ति 1999-2000 में हुई थी, जो रद्द नहीं हुए थी। जहां तक नौकरी में रहते हुए एलएलबी और पीएचडी की डिग्री लेने का आरोप है तो यह सरासर गलत है। अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने नौकरी से पहले एलएलबी की डिग्री पूरी कर ली थी और नौकरी के दौरान पीएचडी किए जाने का प्रावधान है। बायोडाटा पर सवाल उठाने वालों को सोचना चाहिए कि तमाम जांच के बाद अध्यक्ष पर राज्यपाल ने उनकी नियुक्ति की। ऐसे में लोग आरोप लगा रहे हैं, वह बिना साक्ष्य सीधे शासन पर सवाल उठा रहे हैं।
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प्रतियोगियों के निशाने पर अब आयोग अध्यक्ष
पूर्व में प्राचार्य पद पर हुई नियुक्ति और बायोडाटा पर उठाए गए सवाल
अध्यक्ष ने कहा, उन पर आरोप लगाने वाले शासन पर उठा रहे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं में धांधली का आरोप लगाकर सीबीआई जांच की मांग कर रहे प्रतियोगी छात्रों के निशाने पर अब आयोग के अध्यक्ष हैं। प्रतियोगियों ने आयोग अध्यक्ष की पूर्व में हुई प्राचार्य पद पर नियुक्ति और बायोडाटा पर सवाल उठाते हुए शिकायत सीएम को भेजी है। हालांकि आयोग अध्यक्ष के खिलाफ प्रतियोगियों के पास कोई साक्ष्य नहीं है। आयोग अध्यक्ष का कहना है कि उनकी नियुक्ति सरकार की संस्तुति पर राज्यपाल ने की थी। जो लोग उन पर आरोप लगा रहे हैं, वह शासन पर भी सवाल उठा रहे हैं।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय ने सीएम को भेजी अपनी शिकायत में आयोग के मौजूदा अध्यक्ष डॉ. अनुरुद्ध यादव की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि विज्ञापन संख्या 23 से 39 तक प्राचार्यों की सभी नियुक्तियां रद्द हैं तो विज्ञापन संख्या 25 के तहत हायर एजुकेशन कमीशन की ओर से प्राचार्य पद पर डॉ. अनुरुद्ध यादव की नियुक्ति कैसे वैध हो सकती है। यह आरोप भी लगाया है कि उन्होंने नौकरी में रहते हुए स्नातक और पीएचडी की डिग्री हासिल की। साथ ही उनके बायोडाटा में शैक्षणिक वर्षों और सेवारत वर्षों का भी कोई उल्लेख नहीं है। इसके अलावा एक सदस्य पर आरोप लगाया है कि उन पर आपराधिक केस दर्ज है लेकिन उन्होंने अपने बायोडाटा में इसका कोई जिक्र नहीं किया है। इसके अलावा एक अन्य सदस्य पर भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
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इस बारे में आयोग के अध्यक्ष अनुरुद्ध यादव का कहना है कि सिर्फ विज्ञापन संख्या 39 के तहत प्राचार्य पद की नियुक्ति रद्द हुई थी। उनकी नियुक्ति 1999-2000 में हुई थी, जो रद्द नहीं हुए थी। जहां तक नौकरी में रहते हुए एलएलबी और पीएचडी की डिग्री लेने का आरोप है तो यह सरासर गलत है। अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने नौकरी से पहले एलएलबी की डिग्री पूरी कर ली थी और नौकरी के दौरान पीएचडी किए जाने का प्रावधान है। बायोडाटा पर सवाल उठाने वालों को सोचना चाहिए कि तमाम जांच के बाद अध्यक्ष पर राज्यपाल ने उनकी नियुक्ति की। ऐसे में लोग आरोप लगा रहे हैं, वह बिना साक्ष्य सीधे शासन पर सवाल उठा रहे हैं।
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