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50 लाख तक टर्नओवर वाले व्यापारी कर निर्धारण से बाहर
विजय सक्सेना/अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 30 Jul 2015 01:02 AM IST
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इलाहाबाद। वाणिज्य कर विभाग ने 50 लाख रुपये तक सालाना कारोबार करने वाले व्यापारियों को कर निर्धारण से मुक्त करके बड़ी राहत दे दी है। रिटर्न दाखिल करने केसाथ ही उनका स्वत: कर निर्धारण हो जाएगा। किसी व्यापारी के केस में गड़बड़ी मिलती है तो उसे नोटिस सिर्फ वाणिज्य कर कमिश्नर भेज सकेंगे। उनसे नीचे का कोई भी अधिकारी व्यापारियों को नोटिस नहीं जारी कर सकेगा। राज्यपाल ने नई व्यवस्था तत्काल लागू करने की अनुमति दे दी है।
वाणिज्य कर विभाग में अब तक 25 लाख रुपये तक सालाना टर्नओवर वाले व्यापारी कर निर्धारण की प्रक्रिया से बाहर थे। ऐसे व्यापारी विभाग में रिटर्न दाखिल करते हैं, जिसे बाद उनका स्वत: कर निर्धारण मान लिया जाता है। प्रदेश के कई व्यापारिक संगठनों ने यह सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति ने यह सीमा एक करोड़ रुपये सालाना करने की मांग की थी। फिलहाल सरकार ने 50 लाख तक सालाना कारोबार करने वाले व्यापारियों को यह राहत दी है, क्योंकि पूरे प्रदेश में कुल पंजीकृत व्यापारियों में से करीब 55 प्रतिशत 50 लाख रुपये तक सालाना कारोबार करने वाले ही हैं।
इलाहाबाद सहित, कानपुर, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी नोएडा, लखनऊ, सहारनपुर में ऐसे व्यापारियों की बड़ी संख्या हैं। अब ऐसे व्यापारी पूर्व की भांति ही रिटर्न दाखिल करेंगे जिसके बाद स्वत: कर निर्धारण हो जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद इस श्रेणी के व्यापारियों को वाणिज्य कर निर्धारण के नाम पर उत्पीड़न से राहत मिल सकेगी। उन्हें विभाग के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्यपाल राम नाईक से अनुमति मिलने के बाद संस्थागत वित्त कर एवं निबंधन विभाग के प्रमुख सचिव वीरेश कुमार ने तत्काल प्रभाव से इसे लागू करने के आदेश दिए हैं।
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वाणिज्य कर विभाग में अब तक 25 लाख रुपये तक सालाना टर्नओवर वाले व्यापारी कर निर्धारण की प्रक्रिया से बाहर थे। ऐसे व्यापारी विभाग में रिटर्न दाखिल करते हैं, जिसे बाद उनका स्वत: कर निर्धारण मान लिया जाता है। प्रदेश के कई व्यापारिक संगठनों ने यह सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति ने यह सीमा एक करोड़ रुपये सालाना करने की मांग की थी। फिलहाल सरकार ने 50 लाख तक सालाना कारोबार करने वाले व्यापारियों को यह राहत दी है, क्योंकि पूरे प्रदेश में कुल पंजीकृत व्यापारियों में से करीब 55 प्रतिशत 50 लाख रुपये तक सालाना कारोबार करने वाले ही हैं।
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इलाहाबाद सहित, कानपुर, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी नोएडा, लखनऊ, सहारनपुर में ऐसे व्यापारियों की बड़ी संख्या हैं। अब ऐसे व्यापारी पूर्व की भांति ही रिटर्न दाखिल करेंगे जिसके बाद स्वत: कर निर्धारण हो जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद इस श्रेणी के व्यापारियों को वाणिज्य कर निर्धारण के नाम पर उत्पीड़न से राहत मिल सकेगी। उन्हें विभाग के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्यपाल राम नाईक से अनुमति मिलने के बाद संस्थागत वित्त कर एवं निबंधन विभाग के प्रमुख सचिव वीरेश कुमार ने तत्काल प्रभाव से इसे लागू करने के आदेश दिए हैं।
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