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हाईकोर्ट : एनसीआर के 115 रेल कर्मचारियों के नियमितीकरण पर चार अधिकारियों से जवाब तलब

Sat, 22 Jul 2023 12:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 22 Jul 2023 12:11 PM IST
सार

High Court Allahabad : यह आदेश न्यायमूर्ति वीसी दीक्षित ने अधिवक्ता प्रदीप कुमार द्विवेदी की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याची का कहना है कि सेवा नियमित करने में हुए भ्रष्टाचार का मामला है। 1996 में रेलवे मंत्रालय ने कार्यरत अनियमित कर्मचारियों की सेवा नियमित किए जाने का निर्णय लिया था।

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4 officers summoned for regularization of 115 railway employees of NCR
इलाहबाद हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1998 में 115 अनियमित रेल कर्मचारियों के नियमितीकरण घोटाले के आरोपियों पर मुकदमा चलाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के महाप्रबंधक प्रमोद कुमार, डिविजनल पर्सनल आफीसर बृजेश कुमार चतुर्वेदी, पूर्व महाप्रबंधक/ओएसडी और डिविजनल पर्सनल आफीसर एनसीआर को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सरकार से भी जवाब मांगा है। आपराधिक पुनरीक्षण याचिका की अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी।

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यह आदेश न्यायमूर्ति वीसी दीक्षित ने अधिवक्ता प्रदीप कुमार द्विवेदी की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याची का कहना है कि सेवा नियमित करने में हुए भ्रष्टाचार का मामला है। 1996 में रेलवे मंत्रालय ने कार्यरत अनियमित कर्मचारियों की सेवा नियमित किए जाने का निर्णय लिया था। उत्तर मध्य रेलवे के 115 कर्मचारियों की सेवा नियमित की गई, जिसमें अधिकारियों ने चहेतों को समायोजित कर वास्तविक कर्मचारियों को नियमित करने से इन्कार कर दिया।

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छूटे कर्मचारियों की शिकायत पर विजिलेंस जांच हुई तो रेल अधिकारियों ने नियमित 115 कर्मचारियों के रिकार्ड नष्ट होने का बहाना बनाकर नियमित हुए कर्मचारियों की सूची देने से इन्कार कर दिया। सूचना अधिकार कानून की अनदेखी कर सहयोग करने से भी परहेज किया। लंबे समय तक कार्यरत अनियमित कर्मचारी भुखमरी के कगार पर हैं। रेलवे नियमित हुए कर्मचारियों की जानकारी तक नहीं दे रहा क्योंकि इससे घोटाले का पर्दाफाश हो जाएगा।

कहा गया कि कुछ ऐसे लोग भी नियमित सेवा में लिए गए हैं, जिन्होंने कभी रेलवे की सेवा ही नहीं की थी। याची का कहना है कि नियमित कर्मचारी कहां हैं, रेलवे को पता नहीं है, जबकि 1998 से अब तक रेलवे उन्हें ढाई सौ करोड़ रुपये वेतन दे चुकी है। याची ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की मांग की अर्जी जिला अदालत प्रयागराज में दाखिल की थी। इसके निरस्त होने पर हाईकोर्ट में अपील की गई है।

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