{"_id":"5709656c4f1c1bcf2ec81116","slug":"322-crore-scam-notice-to-the-chief-secretary","type":"story","status":"publish","title_hn":"322 करोड़ के घोटाले में मुख्य सचिव को नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
322 करोड़ के घोटाले में मुख्य सचिव को नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 10 Apr 2016 02:16 AM IST
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : demo photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड में 322 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव आलोक रंजन, प्रमुख सचिव/आयुक्त सोसाइटीज किशन सिंह अटेरिया को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी देने के लिए चीफ ऑडिट अफसर कोऑपरेटिव फेडरेशन एंड पंचायत को तलब कर लिया है। डॉ. महेश सिंह की अवमानना याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र ने दिया।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह के अनुसार डॉ. महेश सिंह ने एक जनहित याचिका दाखिल कर कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड में 322.91 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच और कार्रवाई किए जाने की मांग की। घोटालों की जानकारी फेडरेशन की ऑडिट रिपोर्ट में उठाई गई आपत्तियों के जरिए सामने आई। विभाग की ओर से कहा गया कि प्रदेश सरकार ने 14 जून 2013 को निर्देश जारी कर घोटाले के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने याचिका इस आदेश के साथ निस्तारित कर दी थी कि चूंकि राज्य सरकार कदम उठा चुकी है, इसलिए इस घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की जाए। अवमानना याचिका दाखिल कर कहा गया कि हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद प्रदेश सरकार और विभाग ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। कोर्ट ने अधिकारियों को नोटिस जारी कर इस मामले में 30 मई तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह के अनुसार डॉ. महेश सिंह ने एक जनहित याचिका दाखिल कर कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड में 322.91 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच और कार्रवाई किए जाने की मांग की। घोटालों की जानकारी फेडरेशन की ऑडिट रिपोर्ट में उठाई गई आपत्तियों के जरिए सामने आई। विभाग की ओर से कहा गया कि प्रदेश सरकार ने 14 जून 2013 को निर्देश जारी कर घोटाले के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने याचिका इस आदेश के साथ निस्तारित कर दी थी कि चूंकि राज्य सरकार कदम उठा चुकी है, इसलिए इस घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की जाए। अवमानना याचिका दाखिल कर कहा गया कि हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद प्रदेश सरकार और विभाग ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। कोर्ट ने अधिकारियों को नोटिस जारी कर इस मामले में 30 मई तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
विज्ञापन