शिक्षक भर्ती से संबंधित खबरें

Allahabad Bureau Updated Sat, 11 Nov 2017 01:22 AM IST
कई विभागों ने रोकी आवेदनों की स्क्रीनिंग
0 शिक्षक भर्ती में इंपैक्ट फैक्टर को लेकर बढ़ा विवाद
0 यूजीसी को भी पत्र भेजकर गाइड लाइन के बारे में पूछा
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
सीएमपी डिग्री कॉलेज में शिक्षक भर्ती के दौरान आवेदनों की स्क्रीनिंग को लेकर हुए विवाद के बाद अब कई विभागों ने स्क्रीनिंग की प्रक्रिया रोक दी है। कुछ विभागाध्यक्षों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के शिक्षक भर्ती प्रकोष्ठ (एफआरडीसी) को पत्र भेजकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को पत्र भेजकर स्क्रीनिंग के बारे में स्पष्ट गाइड लाइन जारी किए जाने की मांग की है।
इविवि और इसके संघटक महाविद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए आए आवेदनों की स्क्रीनिंग के लिए कमेटी गठित की जाती है। कॉलेजों में आवेदनों की स्क्रीनिंग कमेटी के संयोजक प्राचार्य होते हैं, जबकि इविवि में संबंधित विषय के विभागाध्यक्ष को कमेटी में विषय विशेषज्ञ के रूप में शामिल किया जाता है। डीन को भी कमेटी में रखा जाता है। इविवि में दर्शनशास्त्र विभाग के शिक्षकों ने आरोप लगाया था कि इम्पैक्ट फैक्टर के नाम पर अधिक योग्यता वाले अभ्यर्थियों को कम अंक दिए गए और कम योग्यता वाले अभ्यर्थियों को अधिक अंक दे दिए गए। हालांकि, यह आरोप लगाने वालों में इविवि दर्शनशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. ऋषिकांत पांडेय भी शामिल हैं, जो स्क्रीनिंग कमेटी में शामिल थे। फिलहाल, इम्पैक्ट फैक्टर की आड़ में नंबरों में हेरफेर किए जाने के आरोप के बाद दर्शनशास्त्र समेत इविवि के कुछ अन्य विभागों ने भी अन्य कॉलेजों में जारी अलग-अलग विषयों में शिक्षक भर्ती के लिए आए आवेदनों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया रोक दी है। विभागाध्यक्ष की ओर से इविवि के एफआरडीसी को पत्र भेजकर कहा गया है कि वे इम्पैक्ट फैक्टर को नहीं मानेंगे। साथ ही यूजीसी को पत्र भेजकर मामले में स्पष्ट गाइड लाइन जारी करने की मांग की गई है।

खुद की स्क्रीनिंग और लगाया गड़बड़ी का आरोप
0 सीएमपी के प्राचार्य ने इविवि दर्शनशास्त्र के विभागाध्यक्ष पर किया पलटवार
0 सीएम डिग्री कॉलेज प्रशासन ने चयन समिति के गठन को सही ठहराया
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
शिक्षक भर्ती में चयन समिति के गठन और आवेदनों की स्क्रीनिंग में गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाए जाने के बाद अब सीएमपी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आंनद श्रीवास्तव ने पलटवार किया है। उन्होंने दर्शनशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. ऋषिकांत पांडेय की ओर से लगाए गए आरोपों को हास्यास्पद करार दिया है। उनका कहना है कि डीन और प्राचार्य संबंधित विषय के विशेषज्ञ नहीं होते हैं। स्क्रीनिंग डॉ. ऋषिकांत पांडेय ने की और अब वही गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं, जो समझ से परे है।
सीएमपी के प्राचार्य ने चयन समिति का गठन नियमों के विपरीत किए जाने के आरोप का भी जवाब दिया है। आरोप लगाए जा रहे थे कि चयन समिति का गठन इविवि के अध्यादेश के अनुरूप नहीं हुआ है। प्राचार्य का कहना है कि इविवि का अध्यादेश नौ फरवरी 2008 को लागू हुआ था। यूजीसी ने 18 सितंबर 2010 को गजट प्रकाशित कर प्रावधान किया कि सभी विश्वविद्यालय इसे शीघ्र स्वीकार करें। इविवि कार्य परिषद की ओर से 2012 में यूजीसी रेग्युलेशन को स्वीकार कर लिया गया था। कार्य परिषद की ओर से ‘यूजीसी रेग्यूलेशन 2010’ स्वीकार किए जाने क बाद ही प्रभावी हो गया। अध्यादेश में व्यवस्था है कि समय-समय पर जारी यूजीसी की ओर से जारी रेग्युलेशन लागू होंगे। यूजीसी विनियम 2010 के क्लॉज पांच के अनुसार विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष को ही कुलपति की ओर से नामित किया जाना अनिवार्य नहीं है। इसलिए प्रो. ऋषिकांत पांडेय का आरोप निराधार एवं दुराग्रह से प्रेरित है। प्राचार्य का दावा है कि उनका कार्यकाल यूजीसी के निर्देशों के अनुरूप ही बढ़ाया गया है। इसके लिए शासी निकाय के अध्यक्ष ने सीधे कुलपति को पत्र भेजा था और उन्होंने चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था, जिसकी रिपोर्ट को कार्य परिषद की बैठक में पारित किया गया।

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