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कोतवाली बस्ती के छह उपनिरीक्षकों का निलंबन रद्द
Updated Tue, 26 Sep 2017 09:23 PM IST
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कोतवाली बस्ती के छह उपनिरीक्षकों का निलंबन रद्द
0 हिंदू युवा वाहिनी द्वारा थाने से मुल्जिमों को छुड़ा ले जाने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं द्वारा कोतवाली बस्ती से मुल्जिमों को छुड़ा ले जाने के मामले में निलंबित छह उपनिरीक्षकों को राहत देते हुए उनके निलंबन आदेश रद्द कर दिया है। उपनिरीक्षकों को एसएसपी बस्ती ने नौ सितंबर को निलंबित कर दिया था। कोर्ट ने अधिकारियों को छूट दी है कि वह मामले में नए सिरे से कार्यवाही कर सकते हैं। निलंबित उपनिरीक्षकों ने एसएसपी के आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि एपीएन डिग्री कालेज बस्ती में नौ सितंबर को यूनियन अध्यक्ष आदित्य तिवारी उर्फ कबीर और आलोक शुक्ला तथा प्रिंसिपल के बीच विवाद हुआ था। प्रिंसिपल की सूचना पर कोतलवाली थाने से पुलिस पहुंची और आदित्य तिवारी तथा आलोक शुक्ला को थाने ले आई। दोनों को हिरासत में ले लिया गया। इस सूचना पर भाजपा और हिंदू युवा वाहिनी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने थाना घेर लिया और दोनों को जबरदस्ती पुलिस हिरासत से छुड़ा ले गए।
एसएसपी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए थाने पर मौजूद रहे उपनिरीक्षक कामेश्वर सिंह, हरिनाथ यादव, मोतीलाल, रामप्रसाद, रणविजय सिंह और संतोष कुमार त्रिपाठी को नौ सितंबर को ही निलंबित कर दिया।
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अधिवक्ता ने दलील दी कि घटना में याचीगण का कोई दोष नहीं है। उन पर आरोप है कि वह पूरी घटना मूक दर्शक बनकर देखते रहे, जिससे जनता में पुलिस की छवि धूमिल हुई। जबकि वास्तविकता यह है कि याचीगण को गोली चलाने का आदेश नहीं था और सैकड़ोें की भीड़ के सामने छह उपनिरीक्षक कुछ नहीं कर सकते थे। वहीं पर मौजूद इंस्पेक्टर और क्षेत्राधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचीगण थाने की हिफाजत के लिए जो कुछ कर सकते थे, उन्होंने किया। निर्देश के अभाव में उनके हाथ बंधे थे। गोली चलाने पर दर्जनों लोगों की जान जा सकती थी। निलंबन का आदेश बिना प्रारंभिक जांच के किया गया।
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0 हिंदू युवा वाहिनी द्वारा थाने से मुल्जिमों को छुड़ा ले जाने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं द्वारा कोतवाली बस्ती से मुल्जिमों को छुड़ा ले जाने के मामले में निलंबित छह उपनिरीक्षकों को राहत देते हुए उनके निलंबन आदेश रद्द कर दिया है। उपनिरीक्षकों को एसएसपी बस्ती ने नौ सितंबर को निलंबित कर दिया था। कोर्ट ने अधिकारियों को छूट दी है कि वह मामले में नए सिरे से कार्यवाही कर सकते हैं। निलंबित उपनिरीक्षकों ने एसएसपी के आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि एपीएन डिग्री कालेज बस्ती में नौ सितंबर को यूनियन अध्यक्ष आदित्य तिवारी उर्फ कबीर और आलोक शुक्ला तथा प्रिंसिपल के बीच विवाद हुआ था। प्रिंसिपल की सूचना पर कोतलवाली थाने से पुलिस पहुंची और आदित्य तिवारी तथा आलोक शुक्ला को थाने ले आई। दोनों को हिरासत में ले लिया गया। इस सूचना पर भाजपा और हिंदू युवा वाहिनी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने थाना घेर लिया और दोनों को जबरदस्ती पुलिस हिरासत से छुड़ा ले गए।
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एसएसपी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए थाने पर मौजूद रहे उपनिरीक्षक कामेश्वर सिंह, हरिनाथ यादव, मोतीलाल, रामप्रसाद, रणविजय सिंह और संतोष कुमार त्रिपाठी को नौ सितंबर को ही निलंबित कर दिया।
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अधिवक्ता ने दलील दी कि घटना में याचीगण का कोई दोष नहीं है। उन पर आरोप है कि वह पूरी घटना मूक दर्शक बनकर देखते रहे, जिससे जनता में पुलिस की छवि धूमिल हुई। जबकि वास्तविकता यह है कि याचीगण को गोली चलाने का आदेश नहीं था और सैकड़ोें की भीड़ के सामने छह उपनिरीक्षक कुछ नहीं कर सकते थे। वहीं पर मौजूद इंस्पेक्टर और क्षेत्राधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचीगण थाने की हिफाजत के लिए जो कुछ कर सकते थे, उन्होंने किया। निर्देश के अभाव में उनके हाथ बंधे थे। गोली चलाने पर दर्जनों लोगों की जान जा सकती थी। निलंबन का आदेश बिना प्रारंभिक जांच के किया गया।