{"_id":"59bfe47c4f1c1bb0688b5328","slug":"31505748092-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह छात्र पांच साल के लिए निष्कासित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह छात्र पांच साल के लिए निष्कासित
Updated Mon, 18 Sep 2017 08:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच साल के लिए निष्कासित किए गए छह छात्र
0 इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने की कार्रवाई
0 निष्कासित किए गए चार छात्र एबीवीपी से जुड़े
0 ब्लैक लिस्टेड किया, फिर जांच के बाद निष्कासन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छह छात्रों को छह साल के लिए विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया है। इन सभी को कार्यवाहक कुलपति से मारपीट के आरोप में 13 जुलाई को ब्लैक लिस्ट किया गया था और इनके खिलाफ जांच चल रही थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद सोमवार को यह कार्रवाई की गई। सभी छह छात्रों के निष्कासन का आदेश रजिस्ट्रार एनके शुक्ला ने जारी कर दिया है। जिन चार छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें से चार एबीवीपी से जुड़े हुए हैं और एक छात्र भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) का राष्ट्रीय सचिव है।
जिन छात्रों को निष्कासित किया गया है, उनमें छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह समेत छात्र नेता नीरज प्रताप सिंह, विवेकानंद पाठक, अंकुश यादव, सूर्य प्रकाश मिश्र और आनंद कुमार सिंह के नाम शामिल हैं। नीरज प्रताप सिंह एबीवीपी से अध्यक्ष पद पर छात्रसंघ चुनाव लड़ने के लिए दावेदार हैं। विक्रांत सिंह एबीवीपी विश्वविद्यालय इकाई के विभाग संयोजक हैं। सूर्य प्रकाश मिश्र एबीवीपी के महानगर उपाध्यक्ष और नीरज प्रताप सिंह इकाई मंत्री हैं। वहीं, आनंद कुमार सिंह भी एबीवीपी से जुड़े हैं। विवेकानंद पाठक एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव और अंकुश यादव छात्रसंघ के पूर्व उपमंत्री हैं। इन छात्रों को कार्यवाहक कुलपति से मारपीट के आरोप में ब्लैक लिस्ट किया गया है। इसके खिलाफ दो छात्र इलाहाबाद हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंग्रेजी विभाग के प्रो. आरके सिंह की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई। जांच के दौरान छात्रों का पक्ष सुना गया। सोमवार को कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी और कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के निर्देश पर इन छह छात्रों को पांच वर्ष के लिए विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।
00
विश्वविद्यालय में नहीं मिलेगा प्रवेश
- जिन छात्रों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की गई है, उन्हें पांच वर्ष तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं मिलेगा। इनमें से जो छात्र वर्तमान में किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिए हुए हैं, उनका प्रवेश तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा और पांच वर्ष तक वह परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। इसके अलावा अकेले या समूह में उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।
विज्ञापन
00
अंकुश लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र
- इविवि से पांच वर्ष के लिए निष्कासित अंकुश यादव वर्तमान में लखनऊ विश्वविद्यालय में एमए सोशल वर्क के छात्र हैं। रजिस्ट्रार की ओर से जारी निष्कासन पत्र में कहा गया है कि अंकुश ने केपीयूसी हॉस्टल में अवैध रूप से कमरे में कब्जा कर रखा है। चूंकि राज्यपाल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रेक्टर होते हैं, सो अंकुश के खिलाफ कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से राज्यपाल को पत्र लिखा जाएगा।
00
विवेकानंद, सूर्य प्रकाश इविवि के छात्र नहीं
- निष्कासित किए गए छात्र नेता विवेकानंद पाठक और सूर्य प्रकाश मिश्र का वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं है। ऐसे में इविवि प्रशासन की ओर से चीफ प्रॉक्टर से कहा गया है कि इन दोनों छात्रों के बारे में पता करें कि वर्तमान में कहां पढ़ रहे हैं और संबंधित शिक्षण संस्थान के मुखिया को इस कार्रवाई से अवगत कराएं
00
छात्रों का दावा, एबीवीपी को रोकने की साजिश
- इविवि छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए दावे निष्कासित छात्र नीरज प्रताप सिंह का आरोप है कि छात्रों के निष्कासन की कार्रवाई विद्यार्थी परिषद को चुनाव में रोकने की कुत्सित योजना है। जांच समिति में उन शिक्षकों को शामिल किया गया था, जिन पर गंभीर आपराधिक, वित्तीय एवं चारित्रिक आरोप हैं और इसी वजह से वह कुलपति के दबाव में हैं। छात्र नेता ने यह भी आरोप लगाया है कि जांच समिति के अध्यक्ष प्रो. आरके सिंह पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है। उनका एक शोध छात्र भी अध्यक्ष पद का प्रत्याशी है और प्रो. सिंह चुनाव अधिकारी है। ऐसे में शोध छात्र को जिताने के लिए एबीवीपी के छात्रों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की गई है।
विज्ञापन
0 इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने की कार्रवाई
0 निष्कासित किए गए चार छात्र एबीवीपी से जुड़े
0 ब्लैक लिस्टेड किया, फिर जांच के बाद निष्कासन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छह छात्रों को छह साल के लिए विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया है। इन सभी को कार्यवाहक कुलपति से मारपीट के आरोप में 13 जुलाई को ब्लैक लिस्ट किया गया था और इनके खिलाफ जांच चल रही थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद सोमवार को यह कार्रवाई की गई। सभी छह छात्रों के निष्कासन का आदेश रजिस्ट्रार एनके शुक्ला ने जारी कर दिया है। जिन चार छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें से चार एबीवीपी से जुड़े हुए हैं और एक छात्र भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) का राष्ट्रीय सचिव है।
जिन छात्रों को निष्कासित किया गया है, उनमें छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह समेत छात्र नेता नीरज प्रताप सिंह, विवेकानंद पाठक, अंकुश यादव, सूर्य प्रकाश मिश्र और आनंद कुमार सिंह के नाम शामिल हैं। नीरज प्रताप सिंह एबीवीपी से अध्यक्ष पद पर छात्रसंघ चुनाव लड़ने के लिए दावेदार हैं। विक्रांत सिंह एबीवीपी विश्वविद्यालय इकाई के विभाग संयोजक हैं। सूर्य प्रकाश मिश्र एबीवीपी के महानगर उपाध्यक्ष और नीरज प्रताप सिंह इकाई मंत्री हैं। वहीं, आनंद कुमार सिंह भी एबीवीपी से जुड़े हैं। विवेकानंद पाठक एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव और अंकुश यादव छात्रसंघ के पूर्व उपमंत्री हैं। इन छात्रों को कार्यवाहक कुलपति से मारपीट के आरोप में ब्लैक लिस्ट किया गया है। इसके खिलाफ दो छात्र इलाहाबाद हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंग्रेजी विभाग के प्रो. आरके सिंह की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई। जांच के दौरान छात्रों का पक्ष सुना गया। सोमवार को कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी और कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के निर्देश पर इन छह छात्रों को पांच वर्ष के लिए विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।
विज्ञापन
00
विश्वविद्यालय में नहीं मिलेगा प्रवेश
- जिन छात्रों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की गई है, उन्हें पांच वर्ष तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं मिलेगा। इनमें से जो छात्र वर्तमान में किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिए हुए हैं, उनका प्रवेश तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा और पांच वर्ष तक वह परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। इसके अलावा अकेले या समूह में उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।
विज्ञापन
00
अंकुश लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र
- इविवि से पांच वर्ष के लिए निष्कासित अंकुश यादव वर्तमान में लखनऊ विश्वविद्यालय में एमए सोशल वर्क के छात्र हैं। रजिस्ट्रार की ओर से जारी निष्कासन पत्र में कहा गया है कि अंकुश ने केपीयूसी हॉस्टल में अवैध रूप से कमरे में कब्जा कर रखा है। चूंकि राज्यपाल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रेक्टर होते हैं, सो अंकुश के खिलाफ कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से राज्यपाल को पत्र लिखा जाएगा।
00
विवेकानंद, सूर्य प्रकाश इविवि के छात्र नहीं
- निष्कासित किए गए छात्र नेता विवेकानंद पाठक और सूर्य प्रकाश मिश्र का वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं है। ऐसे में इविवि प्रशासन की ओर से चीफ प्रॉक्टर से कहा गया है कि इन दोनों छात्रों के बारे में पता करें कि वर्तमान में कहां पढ़ रहे हैं और संबंधित शिक्षण संस्थान के मुखिया को इस कार्रवाई से अवगत कराएं
00
छात्रों का दावा, एबीवीपी को रोकने की साजिश
- इविवि छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए दावे निष्कासित छात्र नीरज प्रताप सिंह का आरोप है कि छात्रों के निष्कासन की कार्रवाई विद्यार्थी परिषद को चुनाव में रोकने की कुत्सित योजना है। जांच समिति में उन शिक्षकों को शामिल किया गया था, जिन पर गंभीर आपराधिक, वित्तीय एवं चारित्रिक आरोप हैं और इसी वजह से वह कुलपति के दबाव में हैं। छात्र नेता ने यह भी आरोप लगाया है कि जांच समिति के अध्यक्ष प्रो. आरके सिंह पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है। उनका एक शोध छात्र भी अध्यक्ष पद का प्रत्याशी है और प्रो. सिंह चुनाव अधिकारी है। ऐसे में शोध छात्र को जिताने के लिए एबीवीपी के छात्रों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की गई है।