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27 साल की चुप्पी का मतलब सहमति से अधिकारों का त्याग : हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jul 2025 01:42 AM IST
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27 years of silence means relinquishment of rights by consent: High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपने हक के लिए 27 साल खामोश रहे याची को अंतरिम राहत का हक नहीं है। लंबे वक्त के बीच चुप्पी का प्रथमदृष्टया मतलब है कि उसने स्वेच्छा से अपना हक त्याग दिया है। इस टिप्पणी संग मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने कानूनी किताबों के जाने माने प्रकाशक के साझेदारी विवाद को लेकर विभा सागर की ओर से दाखिल अपील खारिज कर दी।
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विभा सागर ने दावा किया कि वे फर्म में 1976 से साझेदार हैं और उनके परिवार के सदस्य उनकी जानकारी व अनुमति के बिना प्रयागराज स्थित कीमती संपत्तियों को बेचने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन एक्ट के तहत संपत्ति स्थानांतरण पर रोक और किराए की रकम कोर्ट में जमा कराने की मांग की थी। वाणिज्यिक अदालत ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दलील दिया कि खारिज होने पर उन्होंने धारा 37 के तहत हाईकोर्ट में अपील की। कोर्ट ने दलीलों को मानने से इन्कार करते हुए अपील खारिज कर दी।
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