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झूंसी में अवैध रूप से बनी 27 दुकानें ध्वस्त, हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 05 Jul 2018 01:00 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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ऐसा कम देखने को मिलता है कि अदालत पहले पहर आदेश दे और दूसरे पहर उसका क्रियान्वयन कर दिया जाए। झूंसी में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनी 27 अवैध दुकानों का ध्वस्तीकरण रोकने के लिए दाखिल याचिका बुधवार को सुबह ही हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद खारिज करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया। कोर्ट की ओर से ध्वस्तीकरण को हरी झंडी मिलते ही आदेश के अनुपालन में एडीए ने कार्रवाई शुरू कर दी और कुछ ही घंटों के भीतर अवैध मार्केट को जमींदोज कर दिया गया। सड़क चौड़ीकरण में बाधा बनीं 27 दुकानें जेसीबी लगाकर ध्वस्त करा दीं। इस दौरान इलाके में हड़कंप मचा रहा। मौके पर भीड़ जुटी थी। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने विरोध करने की कोशिश की, जिन्हें पुलिस ने खदेड़ दिया। सूत्रों के मुताबिक ये दुकानें एक पूर्व विधायक की बेनामी संपत्ति थीं।
एडीए कुंभ कार्यों के तहत झूंसी में जीटी रोड का चौड़ीकरण करा रहा है। इस कार्य में अन्य बाधाएं तो दूर कर ली गईं लेकिन एक ही भूखंड में बनीं 27 दुकानों को हटाने के लिए भूस्वामी राजी नहीं हुईं। एडीए ने ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया तो भू स्वामी सुंदरी देवी अदालत की शरण में गईं। वहां उनको राहत नहीं मिली। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने कोर्ट को रिपोर्ट दी कि मौके पर पैमाइश के बाद दुकानें याची द्वारा खरीदी गई जमीन से दुगनी जमीन पर कब्जा कर बनाई गई है। उन्होंने कहा कि याची सुंदरीदेवी ने स्वयं आश्वासन दिया था कि यदि नाप में दुकानें सड़क पर पाई गईं तो वह स्वयं इसे हटा लेंगी। रिपोर्ट देखने के बाद मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने याचिका खारिज कर दी। इसके तुरंत बाद एडीए के सचिव अजय कुमार अवस्थी, अपर सचिव गुडाकेश शर्मा, प्रवर्तन प्रभारी आलोक कुमार पांडेय, जोनल अधिकारी पीएन यादव, एसपी गंगापार के नेतृत्व में कई थानों की फोर्स, पुलिस-पीएसी बल और एसडीएम की मौजूदगी में कार्रवाई की गई। जेसीबी लगाकर एक के बाद एक 27 दुकानें ध्वस्त करा दी गईं। इस कार्रवाई को देख सकते में आए अन्य कब्जेदारों ने रात में खुद अपने निर्माण तोड़ने शुरू कर दिए।
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एडीए कुंभ कार्यों के तहत झूंसी में जीटी रोड का चौड़ीकरण करा रहा है। इस कार्य में अन्य बाधाएं तो दूर कर ली गईं लेकिन एक ही भूखंड में बनीं 27 दुकानों को हटाने के लिए भूस्वामी राजी नहीं हुईं। एडीए ने ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया तो भू स्वामी सुंदरी देवी अदालत की शरण में गईं। वहां उनको राहत नहीं मिली। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने कोर्ट को रिपोर्ट दी कि मौके पर पैमाइश के बाद दुकानें याची द्वारा खरीदी गई जमीन से दुगनी जमीन पर कब्जा कर बनाई गई है। उन्होंने कहा कि याची सुंदरीदेवी ने स्वयं आश्वासन दिया था कि यदि नाप में दुकानें सड़क पर पाई गईं तो वह स्वयं इसे हटा लेंगी। रिपोर्ट देखने के बाद मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने याचिका खारिज कर दी। इसके तुरंत बाद एडीए के सचिव अजय कुमार अवस्थी, अपर सचिव गुडाकेश शर्मा, प्रवर्तन प्रभारी आलोक कुमार पांडेय, जोनल अधिकारी पीएन यादव, एसपी गंगापार के नेतृत्व में कई थानों की फोर्स, पुलिस-पीएसी बल और एसडीएम की मौजूदगी में कार्रवाई की गई। जेसीबी लगाकर एक के बाद एक 27 दुकानें ध्वस्त करा दी गईं। इस कार्रवाई को देख सकते में आए अन्य कब्जेदारों ने रात में खुद अपने निर्माण तोड़ने शुरू कर दिए।
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