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रजिस्ट्रेशन निरस्त नहीं, अब रिटर्न भरना मजबूरी
Updated Tue, 12 Sep 2017 07:43 PM IST
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रजिस्ट्रेशन निरस्त नहीं, अब रिटर्न भरना मजबूरी
0 जीएसटी पोर्टल पर फॉर्म-16 न खुलने के कारण बढ़ी व्यापारियों की परेशान
0 20 लाख तक टर्नओवर वाले निरस्त कराना चाहते हैं जीएसटी रजिस्ट्रेशन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। वैट में रजिस्टर्ड बीस लाख रुपये से कम सालाना आय वाले व्यापारियों ने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन तो करा लिया लेकिन अब उसे निरस्त नहीं करा पा रहे हैं, क्योंकि रजिस्ट्रेशन निरस्त कराने के लिए जिस फॉर्म-16 की आवश्यकता है, वह जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है। रजिस्ट्रेशन निरस्त न होने के कारण अब इन व्यापारियों के लिए रिटर्न भरना मजबूरी हो गई है। जीएसटी की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन होने के कारण अफसरों ने भी हाथ खडे़ कर दिए हैं।
जीएसटी लागू होेने के पहले निर्देश दिया गया कि वैट में रजिस्टर्ड सभी व्यापारियों को इसमें रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। इसके साथ सालाना 20 लाख रुपये तक टर्नओवर वालों को रजिस्ट्रेशन से छूट दी गई, जबकि वैट में इस श्रेणी के व्यापारियों के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य था। हालांकि जीएसटी में यह व्यवस्था दी गई कि इस श्रेणी के व्यापारी ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म-16 भरके रजिस्ट्रेशन निरस्त भी करा सकते हैं। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य था सो 20 लाख तक सालाना टर्नओवर वाले व्यापारियों ने आईडी पासवर्ड के आधार पर माइग्रेशन करा लिया। इसके बाद जुलाई में जीएसटी लागू हुआ तो निर्देश आया कि ऐसे व्यापारी 30 दिन के भीतर फॉर्म-16 के माध्यम से रजिस्ट्रेशन निरस्त करा सकते हैं।
अकेले इलाहाबाद जोन में इस श्रेणी करीब पांच हजार व्यापारी हैं, जबकि पूरे प्रदेश में इस श्रेणी के व्यापारियों की संख्या 1.35 लाख से अधिक है। इसमें से ज्यादातर जीएसटी रजिस्ट्रेशन निरस्त कराना चाहते हैं। निर्देश के बाद इन व्यापारियों ने जीएसटी पोर्टल पर फॉर्म-16 खोलने का प्रयास किया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इससे उनकी चिंता बढ़ गई क्योंकि रजिस्ट्रेशन निरस्त नहीं हो पा रहा है और अब उन्हें रिटर्न दाखिल करना होगा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का आरोप है कि जीएसटी पोर्टल पर फॉर्म-16 न खुलने का सीधा मतलब है कि व्यापारी रिटर्न दाखिल करें और सरकार को टैक्स मिले, जबकि इस श्रेणी के ज्यादातर व्यापारी इन झंझटों से दूर रहना चाहते हैं। अगले कुछ दिनों में इन व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन निरस्त न हुआ तो उन्हें रिटर्न भरना होगा।
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0 जीएसटी पोर्टल पर फॉर्म-16 न खुलने के कारण बढ़ी व्यापारियों की परेशान
0 20 लाख तक टर्नओवर वाले निरस्त कराना चाहते हैं जीएसटी रजिस्ट्रेशन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। वैट में रजिस्टर्ड बीस लाख रुपये से कम सालाना आय वाले व्यापारियों ने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन तो करा लिया लेकिन अब उसे निरस्त नहीं करा पा रहे हैं, क्योंकि रजिस्ट्रेशन निरस्त कराने के लिए जिस फॉर्म-16 की आवश्यकता है, वह जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है। रजिस्ट्रेशन निरस्त न होने के कारण अब इन व्यापारियों के लिए रिटर्न भरना मजबूरी हो गई है। जीएसटी की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन होने के कारण अफसरों ने भी हाथ खडे़ कर दिए हैं।
जीएसटी लागू होेने के पहले निर्देश दिया गया कि वैट में रजिस्टर्ड सभी व्यापारियों को इसमें रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। इसके साथ सालाना 20 लाख रुपये तक टर्नओवर वालों को रजिस्ट्रेशन से छूट दी गई, जबकि वैट में इस श्रेणी के व्यापारियों के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य था। हालांकि जीएसटी में यह व्यवस्था दी गई कि इस श्रेणी के व्यापारी ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म-16 भरके रजिस्ट्रेशन निरस्त भी करा सकते हैं। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य था सो 20 लाख तक सालाना टर्नओवर वाले व्यापारियों ने आईडी पासवर्ड के आधार पर माइग्रेशन करा लिया। इसके बाद जुलाई में जीएसटी लागू हुआ तो निर्देश आया कि ऐसे व्यापारी 30 दिन के भीतर फॉर्म-16 के माध्यम से रजिस्ट्रेशन निरस्त करा सकते हैं।
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अकेले इलाहाबाद जोन में इस श्रेणी करीब पांच हजार व्यापारी हैं, जबकि पूरे प्रदेश में इस श्रेणी के व्यापारियों की संख्या 1.35 लाख से अधिक है। इसमें से ज्यादातर जीएसटी रजिस्ट्रेशन निरस्त कराना चाहते हैं। निर्देश के बाद इन व्यापारियों ने जीएसटी पोर्टल पर फॉर्म-16 खोलने का प्रयास किया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इससे उनकी चिंता बढ़ गई क्योंकि रजिस्ट्रेशन निरस्त नहीं हो पा रहा है और अब उन्हें रिटर्न दाखिल करना होगा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का आरोप है कि जीएसटी पोर्टल पर फॉर्म-16 न खुलने का सीधा मतलब है कि व्यापारी रिटर्न दाखिल करें और सरकार को टैक्स मिले, जबकि इस श्रेणी के ज्यादातर व्यापारी इन झंझटों से दूर रहना चाहते हैं। अगले कुछ दिनों में इन व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन निरस्त न हुआ तो उन्हें रिटर्न भरना होगा।
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