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21 जिलों में सिर्फ 140 महिला डॉक्टर
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Thu, 26 Mar 2015 11:59 PM IST
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प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में महिला डॉक्टरों की कमी पर हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य से जवाब तलब किया है। उनको 15 अप्रैल तक जानकारी देने का निर्देश दिया गया है। इससे पूर्व भी कोर्ट ने प्रमुख सचिव से इस मामले पर जानकारी मुहैया कराने का निर्देश दिया था मगर कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने कहा है कि यदि अगली तिथि पर जवाब नहीं आता है तो वह प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश देंगे।
कपिलवस्तु वेलफेयर सोसाइटी के वकीलों अनिल बिसेन और अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में महिला चिकित्सकों की काफी कमी है। सूबे के 72 जिलों में 3496 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 773 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जबकि 21 जिलों से प्राप्त आंकड़ों में इन केंद्रों में कुल 1261 चिकित्सकों के पद हैं, जिनमें 1121 पुरुष और मात्र 140 महिला चिकित्सक तैनात हैं। मुरादाबाद और बलरामपुर जिले में सिर्फ एक-एक महिला चिकित्सक हैं। याची का कहना है कि महिलाओं को कई ऐसी समस्याएं होती हैं, जिनके बारे में संकोच के कारण वह पुरुष डॉक्टर से बता नहीं पाती हैं। इसकी वजह से उनकी बीमारी बढ़ती जाती है। याची ने पर्याप्त संख्या में महिला चिकित्सकों की तैनाती की मांग की है।
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कपिलवस्तु वेलफेयर सोसाइटी के वकीलों अनिल बिसेन और अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में महिला चिकित्सकों की काफी कमी है। सूबे के 72 जिलों में 3496 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 773 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जबकि 21 जिलों से प्राप्त आंकड़ों में इन केंद्रों में कुल 1261 चिकित्सकों के पद हैं, जिनमें 1121 पुरुष और मात्र 140 महिला चिकित्सक तैनात हैं। मुरादाबाद और बलरामपुर जिले में सिर्फ एक-एक महिला चिकित्सक हैं। याची का कहना है कि महिलाओं को कई ऐसी समस्याएं होती हैं, जिनके बारे में संकोच के कारण वह पुरुष डॉक्टर से बता नहीं पाती हैं। इसकी वजह से उनकी बीमारी बढ़ती जाती है। याची ने पर्याप्त संख्या में महिला चिकित्सकों की तैनाती की मांग की है।
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