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हत्या का जुर्म गैरइरादतन हत्या में तब्दील
Updated Mon, 19 Jun 2017 10:11 PM IST
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झांसी के ध्यानार्थ
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हत्या का जुर्म गैरइरादतन हत्या में तब्दील
0 हाईकोर्ट ने घटाई उम्रकैद की सजा, क्षणिक आवेश में महिला को मार दी थी गोली
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने क्षणिक आवेश में आकर महिला को गोली मार देने के की घटना को सोची समझी हत्या मानने से इंकार करते हुए उम्रकैद की सजा घटाकर 10 साल कर दी है। कोर्ट ने इसे गैर इरादतन हत्या का मामला करार दिया है। आरोपी झांसी के अब्दुल आजाद की अपील पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति भारत भूषण और न्यायमूर्ति पीसी त्रिपाठी की पीठ ने यह आदेश दिया।
अब्दुल को झांसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 19 अप्रैल 2008 को अपने परिवार की एक महिला की हत्या करने के जुर्म में उम्रकैद और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। उसे अवैध असलहा रखने के जुर्म में भी दो वर्ष की कैद दी गई। सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई। घटना 20 फरवरी 2007 की है। वादी डॉली ने नवाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी मां हज्जान शकीला बानो और सौतेली भाभी फरजाना के बीच शादी में दिए गए जेवरों को लेकर विवाद हुआ था। दोनों ने एक दूसरे को दी गई अंगूठी और मंगलसूत्र वापस ले लिए थे। इस विवाद के बीच फरजाना अपने पति अब्दुल आजाद को बुला लाई। उस वक्त शकीला बानो रसोई में काम कर रही थी। अब्दुल ने उसे तमंचे से गोली मार दी। शकीला की बाद में अस्पताल में मौत हो गई।
अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि घटना परिवार के बीच हुए झगड़े की वजह से अचानक पैदा हुई परिस्थितियों की वजह से हुआ। आरोपी ने तत्कालिक आवेश में गोली मारी जिसे गैर इरादतन हत्या की श्रेणी का अपराध मानना उचित होगा। कोर्ट ने उम्रकैद की सजा को घटाकर दस वर्ष के कारावास में तब्दील कर दिया। अवैध असलहा रखने के जुर्म में दी गई सजा बरकरार रखी है।
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हत्या का जुर्म गैरइरादतन हत्या में तब्दील
0 हाईकोर्ट ने घटाई उम्रकैद की सजा, क्षणिक आवेश में महिला को मार दी थी गोली
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने क्षणिक आवेश में आकर महिला को गोली मार देने के की घटना को सोची समझी हत्या मानने से इंकार करते हुए उम्रकैद की सजा घटाकर 10 साल कर दी है। कोर्ट ने इसे गैर इरादतन हत्या का मामला करार दिया है। आरोपी झांसी के अब्दुल आजाद की अपील पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति भारत भूषण और न्यायमूर्ति पीसी त्रिपाठी की पीठ ने यह आदेश दिया।
अब्दुल को झांसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 19 अप्रैल 2008 को अपने परिवार की एक महिला की हत्या करने के जुर्म में उम्रकैद और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। उसे अवैध असलहा रखने के जुर्म में भी दो वर्ष की कैद दी गई। सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई। घटना 20 फरवरी 2007 की है। वादी डॉली ने नवाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी मां हज्जान शकीला बानो और सौतेली भाभी फरजाना के बीच शादी में दिए गए जेवरों को लेकर विवाद हुआ था। दोनों ने एक दूसरे को दी गई अंगूठी और मंगलसूत्र वापस ले लिए थे। इस विवाद के बीच फरजाना अपने पति अब्दुल आजाद को बुला लाई। उस वक्त शकीला बानो रसोई में काम कर रही थी। अब्दुल ने उसे तमंचे से गोली मार दी। शकीला की बाद में अस्पताल में मौत हो गई।
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अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि घटना परिवार के बीच हुए झगड़े की वजह से अचानक पैदा हुई परिस्थितियों की वजह से हुआ। आरोपी ने तत्कालिक आवेश में गोली मारी जिसे गैर इरादतन हत्या की श्रेणी का अपराध मानना उचित होगा। कोर्ट ने उम्रकैद की सजा को घटाकर दस वर्ष के कारावास में तब्दील कर दिया। अवैध असलहा रखने के जुर्म में दी गई सजा बरकरार रखी है।
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