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दो बार संगम स्नान और चारों धाम की यात्रा पूरी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 17 Jan 2018 06:08 PM IST
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मौनी अमावस्या स्नान पर संगम की तरफ जाने वाली हर सड़क पर स्नानार्थियाें का रेला रहा। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु देश के हर कोने से आए लोगों का संगम क्षेत्र ही नहीं, पूरे शहर में स्वागत हुआ। कोई पुण्य तो कोई परिवार के कल्याण के लिए डुबकी लगाने आया। महाराष्ट्र के अहमद नगर की टोली ने तो संगम में दो डुबकी लगाने के साथ जैसे चारों धाम की यात्रा पूरी कर ली। पुण्य की इच्छा में लोग कई किलोमीटर पैदल चले।
अहमदनगर के 48 लोगों की टीम चारों धाम की यात्रा और दादा-परदादा की मुक्ति के लिए यहां आई है। 25 वर्ष के युवा अतुल टीम में शामिल अन्य लोगों का भरोसा थे तो 67 साल की आशा बाई की मौजूदगी लोगों का उत्साह बढ़ा रहीं थीं। हर्षवर्धन चौराहे पर अन्य साथियों का इंतजार कर रहे गोविंद दास, बच्छेंद्र, का कहना था, ‘जहां-जहां भगवान हैं वहां-वहां जाते हैं।’ कचरू बताते हैं, ‘दादा-परदादा की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया।’ अतुल और अन्ना वरके का कहना था, ‘उनके यहां मान्यता है कि मौनी अमावस्या फिर इसके बाद जुलाई में यानी, एक वर्ष में दो बार संगम स्नान कर लेने से चार धाम की यात्रा पूरी हो जाती है।’ इसी कामना के साथ उन लोगों ने संगम स्नान किया। उन्होंने बताया, दो बार स्नान और पिंडदान के बाद घर जाने पर विद्यापन पूजा होती है। यह पूजा बड़े स्तर पर होती, जिसमें गांव के लोगों के साथ रिश्तेदार आदि शामिल होते हैं।
गोंडा शहर और बेलथर ब्लाक के सलोनी गांव के 100 से अधिक लोग अलग-अलग समूह में ट्रक एवं बस से पहुंचे थे। ट्रक में अधिक से अधिक लोग आ जाएं इसलिए बांस-बल्ली की मदद से उसे दो मंजिला बना लिया गया था। उन लोगों ने स्नान के बाद केपी कम्युनिटी के सामने बाटी-चोखा बनाकर पिकनिक का आनंद भी उठाया। देवी प्रसाद, तारा देवी, राम सुमेर, राजाराम, सीता आदि का कहना था, ‘गंगा मइया बुलाएन चले आइन। गंगा मइया बच्चन के खुश रखें, धन बढ़ावें एही खातिन आइन है।’ चित्रकूट से अखिलेश, गोकरन दास के साथ आए 32 लोगों ने मुंडन करा और दान करके मन्नतें पूरी कीं। विश्व और परिवार के कल्याण की कामना के साथ लाखों लोग संगम खींचे आए तो शहरियों ने भी भंडारा, चाय के स्टाल आदि लगाकर मेहमानों का स्वागत किया और पुण्य कमाया।
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अहमदनगर के 48 लोगों की टीम चारों धाम की यात्रा और दादा-परदादा की मुक्ति के लिए यहां आई है। 25 वर्ष के युवा अतुल टीम में शामिल अन्य लोगों का भरोसा थे तो 67 साल की आशा बाई की मौजूदगी लोगों का उत्साह बढ़ा रहीं थीं। हर्षवर्धन चौराहे पर अन्य साथियों का इंतजार कर रहे गोविंद दास, बच्छेंद्र, का कहना था, ‘जहां-जहां भगवान हैं वहां-वहां जाते हैं।’ कचरू बताते हैं, ‘दादा-परदादा की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया।’ अतुल और अन्ना वरके का कहना था, ‘उनके यहां मान्यता है कि मौनी अमावस्या फिर इसके बाद जुलाई में यानी, एक वर्ष में दो बार संगम स्नान कर लेने से चार धाम की यात्रा पूरी हो जाती है।’ इसी कामना के साथ उन लोगों ने संगम स्नान किया। उन्होंने बताया, दो बार स्नान और पिंडदान के बाद घर जाने पर विद्यापन पूजा होती है। यह पूजा बड़े स्तर पर होती, जिसमें गांव के लोगों के साथ रिश्तेदार आदि शामिल होते हैं।
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गोंडा शहर और बेलथर ब्लाक के सलोनी गांव के 100 से अधिक लोग अलग-अलग समूह में ट्रक एवं बस से पहुंचे थे। ट्रक में अधिक से अधिक लोग आ जाएं इसलिए बांस-बल्ली की मदद से उसे दो मंजिला बना लिया गया था। उन लोगों ने स्नान के बाद केपी कम्युनिटी के सामने बाटी-चोखा बनाकर पिकनिक का आनंद भी उठाया। देवी प्रसाद, तारा देवी, राम सुमेर, राजाराम, सीता आदि का कहना था, ‘गंगा मइया बुलाएन चले आइन। गंगा मइया बच्चन के खुश रखें, धन बढ़ावें एही खातिन आइन है।’ चित्रकूट से अखिलेश, गोकरन दास के साथ आए 32 लोगों ने मुंडन करा और दान करके मन्नतें पूरी कीं। विश्व और परिवार के कल्याण की कामना के साथ लाखों लोग संगम खींचे आए तो शहरियों ने भी भंडारा, चाय के स्टाल आदि लगाकर मेहमानों का स्वागत किया और पुण्य कमाया।
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