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आजादी के बाद पहली बार बिना राजाराम के कुंभ
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कुंभनगर। ऐसा पहली बार है जब कुंभ का आयोजन बिना राजाराम तिवारी के हो रहा है। उन्होंने कुंभ और माघ मेले में भूले-भटकों को मिलने के लिए जो मुहिम छेड़ी उसे अब उनके पुत्र पंडित लालजी तिवारी और उमेश तिवारी आगे बढ़ा रहा हैं।
राजाराम तिवारी ने वर्ष 1946 में भारत सेवा दल की स्थापना की थी और इसी संस्था के बैनर तले भूले-भटके शिविर का संचालन किया जाता है। पिछले कुंभ तक उन्होंने मेला क्षेत्र में कुल 12 लाख 50 हजार भूले-भटके पुरुषों और महिलाओं को मिलाया। इसके अलावा 20 हजार से अधिक बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाया। इस उपलब्धि के लिए राजाराम तिवारी का नाम वर्ष 2008 में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया। इसके अलावा वर्ष में उन्हें अमिताभ बच्चन और अजय देवगन के कार्यक्रम आज की रात है जिंदगी में बुलाकर सम्मानित किया गया।
राजाराम तिवारी को सरकार से कई पुरस्कार मिले। उन्होंने कुंभ में ऐसी शुरुआत की जो सभी के लिए नजीर बन गई। 88 वर्ष की आयु में 20 अगस्त 2016 में राजाराम तिवारी का निधन हो गया। लोग उन्हें ‘भूले भटके तिवारी’ उपनाम से भी पुकारते थे। राजाराम तिवारी के चार पुत्र हैं, जिनमें सबसे बड़े पुत्र पंडित लालजी तिवारी भारत सेवा दल के अध्यक्ष और सबसे छोटे पुत्र उमेश तिवारी संस्था के संचालक हैं।
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राजाराम तिवारी ने वर्ष 1946 में भारत सेवा दल की स्थापना की थी और इसी संस्था के बैनर तले भूले-भटके शिविर का संचालन किया जाता है। पिछले कुंभ तक उन्होंने मेला क्षेत्र में कुल 12 लाख 50 हजार भूले-भटके पुरुषों और महिलाओं को मिलाया। इसके अलावा 20 हजार से अधिक बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाया। इस उपलब्धि के लिए राजाराम तिवारी का नाम वर्ष 2008 में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया। इसके अलावा वर्ष में उन्हें अमिताभ बच्चन और अजय देवगन के कार्यक्रम आज की रात है जिंदगी में बुलाकर सम्मानित किया गया।
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राजाराम तिवारी को सरकार से कई पुरस्कार मिले। उन्होंने कुंभ में ऐसी शुरुआत की जो सभी के लिए नजीर बन गई। 88 वर्ष की आयु में 20 अगस्त 2016 में राजाराम तिवारी का निधन हो गया। लोग उन्हें ‘भूले भटके तिवारी’ उपनाम से भी पुकारते थे। राजाराम तिवारी के चार पुत्र हैं, जिनमें सबसे बड़े पुत्र पंडित लालजी तिवारी भारत सेवा दल के अध्यक्ष और सबसे छोटे पुत्र उमेश तिवारी संस्था के संचालक हैं।
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