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परिषदीय स्कूलों के ट्रांसफर में सिर्फ एनआईसी की चली

Fri, 06 Jul 2018 01:04 AM IST
Updated Fri, 06 Jul 2018 01:04 AM IST
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परिषदीय स्कूलों के ट्रांसफर में सिर्फ एनआईसी की चली
परिषदीय स्कूलों के ट्रांसफर में सिर्फ एनआईसी की चली
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0 बीमार, दिव्यांग और सेना के आश्रितों के आवेदन को दरकिनार कर हुए स्थानांतरण
0 पूर्व में स्थानांतरण का लाभ लेने वाले शिक्षकों को भी मिल गया लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से परिषदीय विद्यालयों में हाल में हुए स्थानांतरण से उम्मीद लगाए शिक्षकों को निराशा हाथ लगी। ऑनलाइन स्थानांतरण के लिए आवेदन मांगने वाली संस्था एनआईसी ने मनमाने तरीके से तबादले की सूची तैयार करके इसे सीधे जिले में बीएसए को भेज दिया। स्थानांतरण की मुख्य जिम्मेदारी निभाने वाले उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद एवं निदेशक बेसिक शिक्षा को इस बारे में कुछ भी पता नहीं है। तबादले में बीमार, दिव्यांग और सेना के आश्रितों को दरकिनार कर दिया गया। बेसिक शिक्षा परिषद को पता ही नहीं कि किस शिक्षक का तबादला कौन से जिले में हुआ है। तबादले की सूची परिषद को न भेजकर जिले में बीएसए कार्यालय को भेज दी गई।
कानपुर देहात में 100 से अधिक शिक्षकों को दोबारा तबादले का लाभ
0 तबादले से वंचित शिक्षकों का कहना है सचिव बेसिक शिक्षा परिषद और निदेशक बेसिक शिक्षा को कितना तबादला हुआ, इसकी जानकारी नहीं है। अंतर्जनपदीय तबादले के बारे में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय को शिकायत मिली है कि 2016 में तबादले का लाभ ले चुकी कन्नौज की एक शिक्षिका को पहले कानपुर देहात और कानपुर नगर तबादला किया गया है। इसी प्रकार रायबरेली से एक शिक्षक को पहले कानपुर देहात और अब कानपुर नगर तबादला किया गया है। सीतापुर से एक शिक्षक को पहले कानपुर देहात और अब कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी से पहले एक शिक्षक को कानपुर देहात और अब कानपुर नगर तबादला किया गया है। शिकायत में 100 से अधिक शिक्षकों को मात्र कानपुर देहात से दोबारा अंतर्जनपदीय तबादले का लाभ दिया गया है।
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बीमार, दिव्यांग, सेना के आश्रितों के दावे दरकिनार
0 एनआईसी की ओर से मनमाने तरीके से किए गए तबादले में कैंसर, लीवर, किडनी रोग से पीड़ित शिक्षकों की उपेक्षा हुई है। दिव्यांग शिक्षक दंपत्ति को भी तबादले में मौका नहीं मिला। सीमा सुरक्षा बल में तैनात सैनिक की पत्नी के मामले में की भी अनदेखी की गई है जबकि सैनिक की बीमार मां की देखभाल के लिए घर में कोई दूसरा नहीं है। बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पहुंचे कानपुर नगर, रायबरेली, बस्ती, भदोही से पहुंचे शिक्षकों ने आरोप लगाया कि गुणांक अधिक होने के बाद भी कम गुणांक वालों को तबादले का लाभ दिया गया है। इस बारे में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद सहित कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने से बचते रहे।
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‘‘ प्रदेश सरकार की ओर से पारदर्शिता के नाम पर एनआईसी के जरिए हुए तबादले में पूरी तरह से मनमानी हुई है। परेशान शिक्षकों की अनदेखी करके एक बार तबादले का लाभ ले चुके शिक्षकों को दोबारा अंतर्जनपदीय तबादले का लाभ मिला है। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद, निदेशक बेसिक शिक्षा को पूरी तरह से इस मामले में अलग रखा गया। इनके पास तबादले की कोई जानकारी नहीं है। अपर मुख्य सचिव से हाल में हटे एक अधिकारी के बारे में पता चला है कि उन्होंने तबादले में मनमानी की है।’’
देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव
उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ


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