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बकरीद पर स्लाटर हादस खोलने की मांग खारिज
Updated Fri, 01 Sep 2017 08:39 PM IST
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बकरीद पर स्लाटर हाउस खोलने की मांग खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। बकरीद के त्यौहार पर पशुओं की कुर्बानी के लिए स्लाटर हाउस खोलने की मांग में दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। याचिका कौशांबी के करारी निवासी मो. इमरान ने दाखिल की थी। याची का कहना था कि जिलाधिकारी कौशांबी ने पशुओं को काटने के लिए स्लाटर हाउस खोलने से इंकार कर दिया है। खुले में पशुओं को काटना उचित नहीं है। इससे काफी मुश्किलें आएंगी। इसलिए तीन दिन के लिए पशुओं की कटाई हेतु स्लाटर खोलने की अनुमति दी जाए।
याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति अशोक कुमार की पीठ ने टिप्पणी की कि देश कानून और संविधान से चलेगा न कि आस्था पर। आस्था के नाम पर पशुओं को काटने की मांग नहीं की जा सकती है। सरकार ने पशुओं को काटने के लिए दुकानदारों को लाइसेंस दिए हैं, जहां छोटे पशु 20 की संख्या में और बड़े पशु बकरा आदि 10 की संख्या में काटे जा सकते हैं। अवैध स्लाटर हाउस बंद करने का आदेश है। कोर्ट की टिप्पणी के बाद याची ने अपनी याचिका वापस करने की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। याचिका पर अधिवक्ता शाही अली सिद्दीकी ने पक्ष रखा।
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अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। बकरीद के त्यौहार पर पशुओं की कुर्बानी के लिए स्लाटर हाउस खोलने की मांग में दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। याचिका कौशांबी के करारी निवासी मो. इमरान ने दाखिल की थी। याची का कहना था कि जिलाधिकारी कौशांबी ने पशुओं को काटने के लिए स्लाटर हाउस खोलने से इंकार कर दिया है। खुले में पशुओं को काटना उचित नहीं है। इससे काफी मुश्किलें आएंगी। इसलिए तीन दिन के लिए पशुओं की कटाई हेतु स्लाटर खोलने की अनुमति दी जाए।
याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति अशोक कुमार की पीठ ने टिप्पणी की कि देश कानून और संविधान से चलेगा न कि आस्था पर। आस्था के नाम पर पशुओं को काटने की मांग नहीं की जा सकती है। सरकार ने पशुओं को काटने के लिए दुकानदारों को लाइसेंस दिए हैं, जहां छोटे पशु 20 की संख्या में और बड़े पशु बकरा आदि 10 की संख्या में काटे जा सकते हैं। अवैध स्लाटर हाउस बंद करने का आदेश है। कोर्ट की टिप्पणी के बाद याची ने अपनी याचिका वापस करने की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। याचिका पर अधिवक्ता शाही अली सिद्दीकी ने पक्ष रखा।
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