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जैन महापर्व दशलक्षण पर्व
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:53 AM IST
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श्रीजिन की पूजा, आत्म अनुशासन का लिया व्रत
0 जैन मंदिरों में उमड़ा ‘दशलक्षण’ पर्व का उल्लास
0 पहले सोपान ‘उत्तम क्षमा’ के बारे में दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
आत्मशुद्धि का महापर्व दशलक्षण (पर्यूषण) शनिवार को हर्षोल्लास के साथ शुरू हुआ। शहर के जैन मंदिरों में विविध अनुष्ठान पूजन हुए। जैन समुदाय के लोगों ने घर और मंदिरों में श्रीजिन की विधिविधान से पूजा अर्चना की और दस दिनों तक आत्म अनुशासन का व्रत लिया। सांस्कृतिक संध्या में भजनकीर्तन की प्रस्तुतियों ने मंत्रमुग्ध किया।
जीरो रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में मनीष जैन, सुनील कुमार जैन के निर्देशन में श्रीजिन अभिषेक, शांतिधारा, पूजा अर्चना व आरती की गई। मनीष जैन ने कहा कि दशलक्षण पर्व के दौरान उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम शौच, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम अकिंचन और उत्तम ब्रह्मचर्य की आराधना की जाती है। ये सभी आत्मा के धर्म हैं। कहा, पर्व का पहला सोपान उत्तम क्षमा है। क्षमा आत्मा का गुण है। उत्तम क्षमा से आत्म परिणाम निर्मल होते हैं।
जैन महिला मंडल की मंत्री बाला जैन कहा कि ‘क्षमा’ आत्मा का स्वभाव और पृथ्वी का नाम है। जिस प्रकार पृथ्वी तरह-तरह के बोझ सहन करती है, उसी प्रकार चाहे कितनी भी विषम परिस्थिति आए मन को स्थिर रखना चाहिए। क्रोध आत्मा का शत्रु है। इसके वशीभूत प्राणी अपने आपको भी भूल जाता है, जिससे सारे प्रयोजन नष्ट हो जाते हैं। सांस्कृतिक संध्या में भजनकीर्तन, धर्म पर आधारित प्रश्न मंच, शास्त्र प्रवचन, आरती हुई। इस अवसर पर राजेश कुमार जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समुदाय के लोग उपस्थित थे। कर्नलगंज स्थित जैन मंदिर, जानकी प्रसाद दिगंबर जैन मंदिर, मुकुंदी लाल जैन मंदिर, बेनीगंज जैन मंदिर, ऋषभ देव तपस्थली अंदावा आदि में विविध अनुष्ठान पूजन हुए।
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0 जैन मंदिरों में उमड़ा ‘दशलक्षण’ पर्व का उल्लास
0 पहले सोपान ‘उत्तम क्षमा’ के बारे में दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
आत्मशुद्धि का महापर्व दशलक्षण (पर्यूषण) शनिवार को हर्षोल्लास के साथ शुरू हुआ। शहर के जैन मंदिरों में विविध अनुष्ठान पूजन हुए। जैन समुदाय के लोगों ने घर और मंदिरों में श्रीजिन की विधिविधान से पूजा अर्चना की और दस दिनों तक आत्म अनुशासन का व्रत लिया। सांस्कृतिक संध्या में भजनकीर्तन की प्रस्तुतियों ने मंत्रमुग्ध किया।
जीरो रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में मनीष जैन, सुनील कुमार जैन के निर्देशन में श्रीजिन अभिषेक, शांतिधारा, पूजा अर्चना व आरती की गई। मनीष जैन ने कहा कि दशलक्षण पर्व के दौरान उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम शौच, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम अकिंचन और उत्तम ब्रह्मचर्य की आराधना की जाती है। ये सभी आत्मा के धर्म हैं। कहा, पर्व का पहला सोपान उत्तम क्षमा है। क्षमा आत्मा का गुण है। उत्तम क्षमा से आत्म परिणाम निर्मल होते हैं।
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जैन महिला मंडल की मंत्री बाला जैन कहा कि ‘क्षमा’ आत्मा का स्वभाव और पृथ्वी का नाम है। जिस प्रकार पृथ्वी तरह-तरह के बोझ सहन करती है, उसी प्रकार चाहे कितनी भी विषम परिस्थिति आए मन को स्थिर रखना चाहिए। क्रोध आत्मा का शत्रु है। इसके वशीभूत प्राणी अपने आपको भी भूल जाता है, जिससे सारे प्रयोजन नष्ट हो जाते हैं। सांस्कृतिक संध्या में भजनकीर्तन, धर्म पर आधारित प्रश्न मंच, शास्त्र प्रवचन, आरती हुई। इस अवसर पर राजेश कुमार जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समुदाय के लोग उपस्थित थे। कर्नलगंज स्थित जैन मंदिर, जानकी प्रसाद दिगंबर जैन मंदिर, मुकुंदी लाल जैन मंदिर, बेनीगंज जैन मंदिर, ऋषभ देव तपस्थली अंदावा आदि में विविध अनुष्ठान पूजन हुए।
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