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बलिया जीपीएफ घोटाले की जांच सीबीआई को
Updated Tue, 08 Aug 2017 08:11 PM IST
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बलिया जीपीएफ घोटाले की जांच सीबीआई को
आईएएस अधिकारी को बचाने के लिए लीपापोती कर रही सरकार: हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
बलिया जिले के शिक्षा विभाग में हुए करोड़ों रुपये के प्राविडेंट फंड घोटाले की जांच हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंप दी है। कोर्ट ने सीबीआई को तीन माह में जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। स्थानीय पुलिस और अधिकारियों को मामले से संबंधित सभी दस्तावेज सीबीआई अधिकारियों को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस पूरे में मामले में प्रदेश सरकार के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि घोटाला स्वीकार करने के बावजूद सरकार दोषी अफसरों को बचाने केे लिए पूरे मामले की लीपा पोती कर रही है। बलिया के भीम सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ ने यह आदेश दिया।
फर्जी तरीके से नियुक्त अध्यापकों को दिया वेतन
मामला वित्तीय वर्ष 1994-95 का है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने 31 मार्च को बजट लैप्स होने के डर से साढ़े तीन करोड़ रुपये अध्यापकों के जीपीएफ खाते में जमा कर दिए। रकम जमा कराने का आदेश तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट राम गणेश ने दिया। रामगणेश वर्तमान में शासन में विशेष सचिव के पद पर हैं। बलिया डीआईओएस और बीएसए ने इसी दौरान में 104 अध्यापकों की फर्जी तौर से नियुक्ति कर ली थी। इन अध्यापकों को इसी बजट से वेतन दे दिया गया। वर्ष 2000 से इन अध्यापकोें को सरकारी खजाने से वेतन दिया जा रहा है। शिकायत पर विजलेंस से जांच कराई गई। विजलेंस की रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि होने पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
कोर्ट के आदेश पर भी कार्रवाई नहीं
विजलेंस ने अपनी रिपोर्ट मार्च 2016 में दी। रिपोर्ट में करीब 12 करोड़ रुपये की घपले की बात सामने आई। मामले मेें तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट रामगणेश, डीआईओएस जितेंद्र, वित्त अधिकारी दिलीप पांडेय और बली राम तथा कमलाकांत को आरोपी बनाया गया। कार्रवाई का दिखावा करते हुए कमलाकांत को बर्खास्त कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और रकम वसूलने का आदेश दिया था। जब कोर्ट ने कार्रवाई रिपोर्ट मांगी तो बताया गया कि इस मामले में हाईपावर कमेटी गठित कर दी गई है। इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि स्पष्ट है कि सरकार दोषियों को बचाना चाहती है। एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की सरकार में हिम्मत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकार घोटाले को स्वीकार कर रही है मगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं करना चाह रही है।
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मुख्य सचिव को आदेश पढ़ने का समय नहीं
पूरे मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि समस्या पूरे सिस्टम की है। यहां मुख्य सचिव के पास अदालत का आदेश पढ़ने का समय नहीं है। इसीलिए आदेशों का पालन भी नहीं होता है।
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आईएएस अधिकारी को बचाने के लिए लीपापोती कर रही सरकार: हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
बलिया जिले के शिक्षा विभाग में हुए करोड़ों रुपये के प्राविडेंट फंड घोटाले की जांच हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंप दी है। कोर्ट ने सीबीआई को तीन माह में जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। स्थानीय पुलिस और अधिकारियों को मामले से संबंधित सभी दस्तावेज सीबीआई अधिकारियों को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस पूरे में मामले में प्रदेश सरकार के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि घोटाला स्वीकार करने के बावजूद सरकार दोषी अफसरों को बचाने केे लिए पूरे मामले की लीपा पोती कर रही है। बलिया के भीम सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ ने यह आदेश दिया।
फर्जी तरीके से नियुक्त अध्यापकों को दिया वेतन
मामला वित्तीय वर्ष 1994-95 का है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने 31 मार्च को बजट लैप्स होने के डर से साढ़े तीन करोड़ रुपये अध्यापकों के जीपीएफ खाते में जमा कर दिए। रकम जमा कराने का आदेश तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट राम गणेश ने दिया। रामगणेश वर्तमान में शासन में विशेष सचिव के पद पर हैं। बलिया डीआईओएस और बीएसए ने इसी दौरान में 104 अध्यापकों की फर्जी तौर से नियुक्ति कर ली थी। इन अध्यापकों को इसी बजट से वेतन दे दिया गया। वर्ष 2000 से इन अध्यापकोें को सरकारी खजाने से वेतन दिया जा रहा है। शिकायत पर विजलेंस से जांच कराई गई। विजलेंस की रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि होने पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
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कोर्ट के आदेश पर भी कार्रवाई नहीं
विजलेंस ने अपनी रिपोर्ट मार्च 2016 में दी। रिपोर्ट में करीब 12 करोड़ रुपये की घपले की बात सामने आई। मामले मेें तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट रामगणेश, डीआईओएस जितेंद्र, वित्त अधिकारी दिलीप पांडेय और बली राम तथा कमलाकांत को आरोपी बनाया गया। कार्रवाई का दिखावा करते हुए कमलाकांत को बर्खास्त कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और रकम वसूलने का आदेश दिया था। जब कोर्ट ने कार्रवाई रिपोर्ट मांगी तो बताया गया कि इस मामले में हाईपावर कमेटी गठित कर दी गई है। इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि स्पष्ट है कि सरकार दोषियों को बचाना चाहती है। एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की सरकार में हिम्मत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकार घोटाले को स्वीकार कर रही है मगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं करना चाह रही है।
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मुख्य सचिव को आदेश पढ़ने का समय नहीं
पूरे मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि समस्या पूरे सिस्टम की है। यहां मुख्य सचिव के पास अदालत का आदेश पढ़ने का समय नहीं है। इसीलिए आदेशों का पालन भी नहीं होता है।