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टीईटी 15 गलत सवालों पर निर्णय सुरक्षित
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टीईटी 2018
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15 गलत सवालों पर हाईकोर्ट
ने सुरक्षित किया निर्णय
- एकलपीठ के निर्णय को विशेष अपील में दी गई चुनौती
प्रयागराज। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2018 में पूछे गए 15 सवालों को लेकर विवाद अभी थमा नहीं है। हाईकोर्ट की एकल न्यायपीठ द्वारा 15 में से दो प्रश्नों को ही विशेषज्ञ राय के लिए भेजे जाने के निर्णय को विशेष अपील में चुनौती दी गई है। अपील पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। इसे शनिवार को सुनाया जाएगा।
हिमांशु गंगवार सहित दर्जनों अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे और सीमांत सिंह ने बहस की। अधिवक्ताओं का कहना था कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी द्वारा जारी आंसर की से मिलान पर कुल 15 प्रश्नों के विकल्प या तो गलत पाए गए या एक से अधिक विकल्प सही थे। एक प्रश्न कोर्स से बाहर का पूछा गया था, इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। एकल न्यायपीठ ने संस्कृत और उर्दू के एक-एक प्रश्न को विशेषज्ञ राय के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पास भेज दिया। मगर शेष 13 प्रश्नों पर परीक्षा नियामक प्राधिकारी के विशेषज्ञों की राय ही मान ली गई। ऐसा करना गलत है।
सुप्रीमकोर्ट का निर्णय है, जब किसी प्रश्न को लेकर विवाद हो तो उस पर बाहर के किसी विशेषज्ञ की राय के लिए भेजा जाना चाहिए। मांग की गई कि शेष 13 प्रश्नों पर भी विशेषज्ञ राय लेने के बाद ही परिणाम जारी किया जाए। कोर्ट ने आउट ऑफ कोर्स पूछे गए प्रश्न पर भी दोनों पक्षों की बहस सुनी तथा निर्णय सुरक्षित कर लिया है। याचिका में कहा गया है कि यदि इन गलत प्रश्नों को हटाकर उनके अंक दे दिए जाएं तो याचीगण टीईटी में उत्तीर्ण हो जाएंगे तथा शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल होने केलिए अर्ह होंगे। भर्ती परीक्षा छह जनवरी को होनी है।
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15 गलत सवालों पर हाईकोर्ट
ने सुरक्षित किया निर्णय
- एकलपीठ के निर्णय को विशेष अपील में दी गई चुनौती
प्रयागराज। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2018 में पूछे गए 15 सवालों को लेकर विवाद अभी थमा नहीं है। हाईकोर्ट की एकल न्यायपीठ द्वारा 15 में से दो प्रश्नों को ही विशेषज्ञ राय के लिए भेजे जाने के निर्णय को विशेष अपील में चुनौती दी गई है। अपील पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। इसे शनिवार को सुनाया जाएगा।
हिमांशु गंगवार सहित दर्जनों अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे और सीमांत सिंह ने बहस की। अधिवक्ताओं का कहना था कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी द्वारा जारी आंसर की से मिलान पर कुल 15 प्रश्नों के विकल्प या तो गलत पाए गए या एक से अधिक विकल्प सही थे। एक प्रश्न कोर्स से बाहर का पूछा गया था, इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। एकल न्यायपीठ ने संस्कृत और उर्दू के एक-एक प्रश्न को विशेषज्ञ राय के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पास भेज दिया। मगर शेष 13 प्रश्नों पर परीक्षा नियामक प्राधिकारी के विशेषज्ञों की राय ही मान ली गई। ऐसा करना गलत है।
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सुप्रीमकोर्ट का निर्णय है, जब किसी प्रश्न को लेकर विवाद हो तो उस पर बाहर के किसी विशेषज्ञ की राय के लिए भेजा जाना चाहिए। मांग की गई कि शेष 13 प्रश्नों पर भी विशेषज्ञ राय लेने के बाद ही परिणाम जारी किया जाए। कोर्ट ने आउट ऑफ कोर्स पूछे गए प्रश्न पर भी दोनों पक्षों की बहस सुनी तथा निर्णय सुरक्षित कर लिया है। याचिका में कहा गया है कि यदि इन गलत प्रश्नों को हटाकर उनके अंक दे दिए जाएं तो याचीगण टीईटी में उत्तीर्ण हो जाएंगे तथा शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल होने केलिए अर्ह होंगे। भर्ती परीक्षा छह जनवरी को होनी है।
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