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इंडियन गर्ल्स के प्रंध्क को हाईकोर्ट से राहत
Updated Thu, 01 Nov 2018 08:16 PM IST
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इंडियन गर्ल्स के प्रबंधक को हाईकोर्ट से राहत
0 गिरफ्तारी पर रोक, मजिस्ट्रेटी जांच की रिपोर्ट तलब
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने इंडियन गर्ल्स इंटर कॉलेज के प्रबंधक को शिक्षिकाओं से छेड़खानी और शारीरिक उत्पीड़न के मामले में राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में चल रही मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट अगली सुनवाई पर सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। तब तक प्रबंधक के खिलाफ किसी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है।
प्रबंधक सहदेव मुखर्जी की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति महबूब अली की पीठ सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि याची को झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। उसने स्कूल की कुछ शिक्षिकाओं को देरी से आने के लिए टोका था। वह लोग नहीं मानीं तो उनकी बायोमैट्रिक अटेंडेंस का प्रिंट आउट जिला विद्यालय निरीक्षक के पास भेजा था। इसी के बाद उनके ऊपर छेड़खानी और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया है। कोर्ट को बताया गया कि इस मामले की जांच मजिस्ट्रेट द्वारा की जा रही है और जांच जल्दी पूरी होने की उम्मीद है। इस पर अदालत ने उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए 19 नवंबर तक जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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0 गिरफ्तारी पर रोक, मजिस्ट्रेटी जांच की रिपोर्ट तलब
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने इंडियन गर्ल्स इंटर कॉलेज के प्रबंधक को शिक्षिकाओं से छेड़खानी और शारीरिक उत्पीड़न के मामले में राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में चल रही मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट अगली सुनवाई पर सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। तब तक प्रबंधक के खिलाफ किसी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है।
प्रबंधक सहदेव मुखर्जी की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति महबूब अली की पीठ सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि याची को झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। उसने स्कूल की कुछ शिक्षिकाओं को देरी से आने के लिए टोका था। वह लोग नहीं मानीं तो उनकी बायोमैट्रिक अटेंडेंस का प्रिंट आउट जिला विद्यालय निरीक्षक के पास भेजा था। इसी के बाद उनके ऊपर छेड़खानी और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया है। कोर्ट को बताया गया कि इस मामले की जांच मजिस्ट्रेट द्वारा की जा रही है और जांच जल्दी पूरी होने की उम्मीद है। इस पर अदालत ने उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए 19 नवंबर तक जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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