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अपर निजी सचिव भर्ती परिणाम को चुनौती
Updated Fri, 27 Oct 2017 08:46 PM IST
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अपर निजी सचिव भर्ती परिणाम को चुनौती
0 भर्ती प्रक्रिया में धांधली का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश सचिवालय में अपर निजी सचिवों की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता बरतने का आरोप है। कई अभ्यर्थियों ने तीन अक्तूबर 2017 को जारी अंतिम चयन परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने इस पर प्रदेश सरकार और लोकसेवा आयोग से जवाब मांगा है। अजीत कुमार सिंह और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति आरएसआर मौर्या सुनवाई कर रहे हैं।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि सचिवालय में 250 पदों पर अपर निजी सचिवों की भर्ती के लिए 25 दिसंबर 2010 को विज्ञापन जारी किया गया था। विज्ञापन में स्नातक के साथ डुएट से कंप्यूटर में ट्रिपल सी का सर्टिफिकेट या यूपी बोर्ड द्वारा संचालित कंप्यूटर पाठ्यक्रम में प्रमाणपत्र अथवा राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी संस्थान से ट्रिपल सी का सर्टिफिकेट अनिवार्य अर्हता रखी गई।
परीक्षा लोकसेवा आयोग द्वारा कराई गई। आवेदन प्राप्त होने के बाद आयोग ने 385 ऐसे अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए, जिन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थान का प्रमाणपत्र नहीं लगाया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीन अक्तूबर 2017 को अंतिम परिणाम जारी होने पर पता चला कि कम से कम सात ऐसे अभ्यर्थियों का भी चयन हुआ, जिनका आवेदन निरस्त हो चुका था। याचिका में यह भी कहा गया है कि चार ऐसे अभ्यर्थियों का भी पता चला है कि जिनका आवेदन निरस्त होने के बावजूद पूरी चयन प्रक्रिया में उनको शामिल किया गया।
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आयोग ने विज्ञापन में कंप्यूटर के प्रैक्टिकल टेस्ट की बात की थी मगर कंप्यूटर की लिखित परीक्षा ली गई। इसी प्रकार से शार्ट हैंड में पांच प्रतिशत गलतियों तक चयन की छूट थी मगर आयोग ने उसमें तीन प्रतिशत और जोड़कर आठ प्रतिशत कर दिया जबकि सेवा नियमावली में ऐसा कोई नियम नहीं है। याचिका पर अगली सुनवाई तीन नवंबर को होगी।
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अपर निजी सचिव भर्ती परिणाम को चुनौती
0 भर्ती प्रक्रिया में धांधली का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश सचिवालय में अपर निजी सचिवों की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता बरतने का आरोप है। कई अभ्यर्थियों ने तीन अक्तूबर 2017 को जारी अंतिम चयन परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने इस पर प्रदेश सरकार और लोकसेवा आयोग से जवाब मांगा है। अजीत कुमार सिंह और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति आरएसआर मौर्या सुनवाई कर रहे हैं।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि सचिवालय में 250 पदों पर अपर निजी सचिवों की भर्ती के लिए 25 दिसंबर 2010 को विज्ञापन जारी किया गया था। विज्ञापन में स्नातक के साथ डुएट से कंप्यूटर में ट्रिपल सी का सर्टिफिकेट या यूपी बोर्ड द्वारा संचालित कंप्यूटर पाठ्यक्रम में प्रमाणपत्र अथवा राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी संस्थान से ट्रिपल सी का सर्टिफिकेट अनिवार्य अर्हता रखी गई।
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परीक्षा लोकसेवा आयोग द्वारा कराई गई। आवेदन प्राप्त होने के बाद आयोग ने 385 ऐसे अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए, जिन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थान का प्रमाणपत्र नहीं लगाया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीन अक्तूबर 2017 को अंतिम परिणाम जारी होने पर पता चला कि कम से कम सात ऐसे अभ्यर्थियों का भी चयन हुआ, जिनका आवेदन निरस्त हो चुका था। याचिका में यह भी कहा गया है कि चार ऐसे अभ्यर्थियों का भी पता चला है कि जिनका आवेदन निरस्त होने के बावजूद पूरी चयन प्रक्रिया में उनको शामिल किया गया।
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आयोग ने विज्ञापन में कंप्यूटर के प्रैक्टिकल टेस्ट की बात की थी मगर कंप्यूटर की लिखित परीक्षा ली गई। इसी प्रकार से शार्ट हैंड में पांच प्रतिशत गलतियों तक चयन की छूट थी मगर आयोग ने उसमें तीन प्रतिशत और जोड़कर आठ प्रतिशत कर दिया जबकि सेवा नियमावली में ऐसा कोई नियम नहीं है। याचिका पर अगली सुनवाई तीन नवंबर को होगी।