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इंसेफलाइटिस से निपटने की ठोस कार्ययोजना दे सरकार
Updated Mon, 18 Sep 2017 07:59 PM IST
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज हादसा
इंसेफलाइटिस से निपटने की ठोस कार्ययोजना दे सरकार
0 हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांगा प्रस्ताव
0 कार्रवाई ही नहीं समस्या का स्थायी समाधान जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इंसेफलाइटिस से पीड़ित बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने समस्या के स्थायी समाधान पर जोर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार इस मामले पर ठोस कार्ययोजना अगली तारीख पर पेश करें, ताकि इंसेफलाइटिस या दूसरी किसी बीमारी से होने वाली मौतों को रोका जा सके।
मेरठ के लोकेश खुराना सहित अन्य दर्जनों की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले की अध्यक्षता वाली पीठ ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज की जांच करने का विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को निर्देश दिया था। पिछली सुनवाई पर सचिव ने रिपोर्ट दाखिल कर दी। राज्य सरकार को भी अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में देनी है। अदालत दोनों रिपोर्टों का एक साथ निरीक्षण कर अग्रिम आदेश पारित करेगी। सोमवार को कोर्ट ने सभी पक्षकारों को निर्देश दिया कि वह अपने-अपने सुझाव अदालत के समक्ष रखें कि किस प्रकार से जानलेवा बीमारियों से बच्चों को बचाया जा सकता है। केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई पर इस बाबत ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करें।
कोर्ट ने कहा कि बीमारी से निपटने के लिए स्थायी हल के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जानी चाहिए। उनके राय के अनुसार ऐसे प्रभावी प्रबंध होने चाहिए, जिससे इस समस्या से स्थायी रूप से निजात मिल सके। याची के अधिवक्ता केके रॉय, वीसी श्रीवास्तव आदि का कहना था कि हर साल प्रदेश में हजारों बच्चों की मौत हो जाती है। सरकारी उदासीनता की वजह से ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज जैसे हादसे होते हैं। प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता नवीन सिन्हा को नामित किया है। अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने भी सरकार का पक्ष रहा। मामले की अगली सुनवाई छह अक्तूबर को होगी।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज हादसा
इंसेफलाइटिस से निपटने की ठोस कार्ययोजना दे सरकार
0 हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांगा प्रस्ताव
0 कार्रवाई ही नहीं समस्या का स्थायी समाधान जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इंसेफलाइटिस से पीड़ित बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने समस्या के स्थायी समाधान पर जोर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार इस मामले पर ठोस कार्ययोजना अगली तारीख पर पेश करें, ताकि इंसेफलाइटिस या दूसरी किसी बीमारी से होने वाली मौतों को रोका जा सके।
मेरठ के लोकेश खुराना सहित अन्य दर्जनों की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले की अध्यक्षता वाली पीठ ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज की जांच करने का विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को निर्देश दिया था। पिछली सुनवाई पर सचिव ने रिपोर्ट दाखिल कर दी। राज्य सरकार को भी अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में देनी है। अदालत दोनों रिपोर्टों का एक साथ निरीक्षण कर अग्रिम आदेश पारित करेगी। सोमवार को कोर्ट ने सभी पक्षकारों को निर्देश दिया कि वह अपने-अपने सुझाव अदालत के समक्ष रखें कि किस प्रकार से जानलेवा बीमारियों से बच्चों को बचाया जा सकता है। केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई पर इस बाबत ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करें।
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कोर्ट ने कहा कि बीमारी से निपटने के लिए स्थायी हल के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जानी चाहिए। उनके राय के अनुसार ऐसे प्रभावी प्रबंध होने चाहिए, जिससे इस समस्या से स्थायी रूप से निजात मिल सके। याची के अधिवक्ता केके रॉय, वीसी श्रीवास्तव आदि का कहना था कि हर साल प्रदेश में हजारों बच्चों की मौत हो जाती है। सरकारी उदासीनता की वजह से ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज जैसे हादसे होते हैं। प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता नवीन सिन्हा को नामित किया है। अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने भी सरकार का पक्ष रहा। मामले की अगली सुनवाई छह अक्तूबर को होगी।
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